होर्मुज में जिस 'ड्रोन बोट' से बचाए गए अपाचे हेलीकॉप्टर के दोनों अमेरिकी पायलट, FAQ से जानें उसकी खासियत और भारत कनेक्शन
होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक सैन्य ऑपरेशन के दौरान निशाना बनाए गए अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर के दोनों पायलटों को सुरक्षित निकालने के लिए पहली बार ड्रोन बोट तकनीक का इस्तेमाल किया गया.
Corsair Drone Boat
होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक सैन्य ऑपरेशन के दौरान निशाना बनाए गए अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर के दोनों पायलटों को सुरक्षित निकालने के लिए पहली बार ड्रोन बोट तकनीक का इस्तेमाल किया गया. इस हाई-टेक रेस्क्यू ऑपरेशन ने समुद्री बचाव अभियानों में नई तकनीकी दिशा की शुरुआत कर दी है.
सबसे खास बात यह है कि इस मिशन में इस्तेमाल हुई 'कोरसैर ड्रोन बोट' भारतीय मूल के इंजीनियर विभव अल्टेकर की कंपनी सैरोनिक टेक्नोलॉजीज द्वारा बनाई गई है. अमेरिकी नौसेना की टास्क फोर्स 59 ने इस ऑटोनॉमस सिस्टम की मदद से बेहद खतरनाक समुद्री क्षेत्र में सफलतापूर्वक रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया. इस ड्रोन बोट ने मात्र दो घंटे के भीतर दोनों पायलटों का पता लगा लिया.
FAQ से जानें इस ड्रोन बोट की खासियत
इस हाई-स्पीड रोबोटिक ड्रोन बोट की लंबाई 24 फीट है. जिससे यह लहरों के बीच भी स्थिर और सुरक्षित बनी रहती है.
ये ड्रोन बोट समुद्र में 35 नॉट्स (लगभग 65 किमी/घंटा) से भी ज्यादा की तेज रफ्तार से दौड़ सकती है.
यह ड्रोन बोट पानी में बिना रुके 1,000 समुद्री मील (Nautical Miles) से अधिक का सफर तय कर सकती है.
ये ड्रोन बोट अपने साथ 1,000 पाउंड (लगभग 453 किलोग्राम) तक का पेलोड (सामान या हथियार) ले जा सकती है.
ये ड्रोन बोट रेस्क्यू मिशन, खतरनाक मिशन, निगरानी और जासूसी जैसे काम कर सकती है.
ये ड्रोन बोट खुद से अपना रास्ता तय करती है, इसको चलाने के लिए किसी कप्तान या क्रू की जरूरत नहीं पड़ती है.
रिपोर्ट के मुताबिक इस ड्रोन बोट की कीमत करीब 8.3 करोड़ से 10 करोड़ रुपये है.




