आखिर क्यों NCR से अपने 5 जिले बाहर करना चाहता है हरियाणा, नेशनल कैपिटल रीजन में होने के क्या फायदे और क्या नुकसान?
हरियाणा NCR का दायरा 25,327 से घटाकर 10,546 वर्ग किमी करना चाहता है. जानिए किन 5 जिलों पर असर होगा और NCR में रहने के फायदे-नुकसान क्या हैं.
नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में फिलहाल हरियाणा के 14 जिले शामिल हैं. इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, रोहतक, झज्जर, रेवाड़ी, नूंह, पलवल, पानीपत, करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी शामिल हैं. इन जिलों को मिलाकर हरियाणा का लगभग 25,327 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र NCR के दायरे में आता है. क्षेत्रफल के लिहाज से हरियाणा NCR का सबसे बड़ा हिस्सा रखने वाले राज्यों में शामिल है.
किन 5 जिलों को NCR से बाहर करने की तैयारी?
हरियाणा सरकार ने NCR की सीमाओं के फिर से निर्धारित करने की प्रक्रिया के दौरान करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी के बड़े हिस्से को NCR से बाहर करने का प्रस्ताव दिया है. सरकार का मानना है कि ये जिले दिल्ली से काफी दूर स्थित हैं और NCR की मूल अवधारणा के अनुरूप नहीं बैठते. प्रस्ताव लागू होने पर हरियाणा का NCR क्षेत्र करीब 60 प्रतिशत तक कम हो सकता है.
NCR से बाहर करने की मांग क्यों उठी?
हरियाणा सरकार का तर्क है कि NCR का गठन दिल्ली पर बढ़ते जनसंख्या और शहरीकरण के दबाव को आसपास के क्षेत्रों में बांटने के लिए किया गया था. लेकिन समय के साथ NCR का विस्तार ऐसे जिलों तक हो गया, जो न तो दिल्ली के दैनिक आर्थिक प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा हैं और न ही बड़ी संख्या में लोग वहां से दिल्ली आना-जाना करते हैं. ऐसे में दूरस्थ जिलों को NCR में बनाए रखने का उद्देश्य कमजोर पड़ जाता है.
नियम ज्यादा, फायदा कम?
नायब सिंह सैनी सरकार का कहना है कि NCR में शामिल जिलों को कई अतिरिक्त पर्यावरणीय और विकास संबंधी नियमों का पालन करना पड़ता है. वायु प्रदूषण नियंत्रण, निर्माण गतिविधियों, भूमि उपयोग और औद्योगिक परियोजनाओं पर सख्त मानक लागू होते हैं., लेकिन करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी जैसे जिलों को गुरुग्राम और फरीदाबाद की तरह बड़े निवेश, कॉरपोरेट उपस्थिति या आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ नहीं मिल पाया. सरकार के मुताबिक इन जिलों को NCR की पाबंदियां तो झेलनी पड़ती हैं, लेकिन लाभ सीमित मिलता है.
NCR में शामिल होने के क्या फायदे हैं?
NCR का हिस्सा बनने से किसी क्षेत्र को क्षेत्रीय विकास योजनाओं, बेहतर सड़क और परिवहन नेटवर्क, निवेश आकर्षित करने और शहरी बुनियादी ढांचे के विस्तार का लाभ मिल सकता है. NCR की पहचान भी उद्योगों और रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए आकर्षण का केंद्र मानी जाती है. यही वजह है कि गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत जैसे शहरों ने पिछले वर्षों में तेज विकास देखा है.
NCR से बाहर होने पर क्या बदलेगा?
यदि प्रस्ताव मंजूर होता है तो संबंधित जिलों पर NCR से जुड़े कुछ नियामकीय प्रतिबंध कम हो सकते हैं. राज्य सरकार को स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास और औद्योगिक नीतियां बनाने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी. हालांकि, दूसरी तरफ NCR ब्रांडिंग, क्षेत्रीय परियोजनाओं और कुछ संभावित निवेश अवसरों का लाभ भी कम हो सकता है.
क्या है हरियाणा सरकार की दलील?
हरियाणा सरकार का कहना है कि NCR का दायरा केवल उन क्षेत्रों तक सीमित होना चाहिए जो वास्तव में दिल्ली के शहरी और आर्थिक प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा हैं. जो जिले राजधानी से काफी दूर हैं और NCR का अपेक्षित लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, उन्हें इस दायरे से बाहर किया जाना चाहिए. सरकार का मानना है कि इससे NCR की अवधारणा अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बन सकेगी.




