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'मुझसे पूछे बिना बिजली महंगी क्यों...', UPPCL चेयरमैन पर भड़के ऊर्जा मंत्री, 7 पॉइंट में जानें यूपी बिजली बिल विवाद का पूरा मामला

उत्तर प्रदेश में बिजली बिलों पर 10 फीसदी अतिरिक्त सरचार्ज लगाने के प्रस्ताव को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा और यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के चेयरमैन आशीष गोयल के बीच इस फैसले को लेकर खुला मतभेद सामने आया है.

UP electricity bill hike controversy
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UP electricity bill hike controversy

( Image Source:  X/ @AnuragChaddha )

उत्तर प्रदेश में बिजली बिलों पर 10 फीसदी अतिरिक्त सरचार्ज लगाने के प्रस्ताव को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. कुछ दिन पहले खबर आई थी कि जून 2026 से उपभोक्ताओं को बिजली के बिल में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी का बोझ उठाना पड़ सकता है. हालांकि बाद में इस फैसले को वापस ले लिया गया, लेकिन अब इस मुद्दे ने ऊर्जा विभाग के भीतर ही टकराव की स्थिति पैदा कर दी है.

ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा और यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के चेयरमैन आशीष गोयल के बीच इस फैसले को लेकर खुला मतभेद सामने आया है. मंत्री ने पत्र लिखकर न केवल फैसले पर सवाल उठाए हैं, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली और बिजली व्यवस्था को लेकर भी गंभीर नाराजगी जाहिर की है.

7 पॉइंट में समझें पूरा विवाद

1. मामले की शुरुआत जून 2026 के बिजली बिलों में 10 प्रतिशत Fuel & Power Purchase Adjustment Surcharge (FPPAS) जोड़ने के प्रस्ताव से हुई. यह खबर सामने आने के बाद उपभोक्ताओं में नाराजगी देखने को मिली थी. हालांकि कुछ ही दिनों बाद इस प्रस्ताव को वापस ले लिया गया, लेकिन इसके पीछे की प्रक्रिया पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं.

2. ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने UPPCL चेयरमैन आशीष गोयल को पत्र लिखकर पूछा है कि इतना बड़ा फैसला उनकी जानकारी और अनुमति के बिना कैसे लिया गया. मंत्री ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जवाब तलब किया है.

3. मंत्री ने अपने पत्र में कहा कि इस फैसले के कारण सरकार की छवि प्रभावित हुई और विभाग की भी बदनामी हुई. उन्होंने सवाल उठाया कि आम जनता को प्रभावित करने वाले इतने महत्वपूर्ण निर्णय में मंत्री को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया.

4. ऊर्जा मंत्री ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा "मुझे मेरे ही विभाग के फैसले मीडिया से पता चलते हैं. ये रवैया ठीक नहीं." इस बयान को विभाग के भीतर बढ़ते मतभेद का बड़ा संकेत माना जा रहा है.

5. पत्र में मंत्री ने चेयरमैन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि संकट की परिस्थितियों में भी चेयरमैन अक्सर मुख्यालय से बाहर रहते हैं और विभागीय मामलों में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखती.

6. ऊर्जा मंत्री ने विभाग में अनुभवी अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाने को लेकर भी चिंता व्यक्त की है. उनका कहना है कि अनुभवी कर्मियों की जगह कम अनुभव वाले लोगों की तैनाती से विभाग की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है और इसका असर बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ रहा है.

7. पत्र में बिजली आपूर्ति से जुड़ी कमियों और प्रशासनिक स्तर पर हो रही कथित लापरवाही का भी जिक्र किया गया है. मंत्री ने इसे जनहित के खिलाफ बताते हुए कहा कि विभाग को जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप अधिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के साथ काम करना चाहिए.

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