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नक्सली बनने का भूत सवार था इस सुपरस्टार पर, बड़े भाई ने स्टारडम का वास्ता देकर रोका; आज हैं डिप्टी सीएम

युवावस्था में सिस्टम के प्रति गुस्से के कारण पवन कल्याण नक्सल आंदोलन की ओर आकर्षित हो गए थे. हालांकि, बड़े भाई चिरंजीवी की एक सीख ने उनकी सोच बदल दी और उन्हें नई दिशा दिखाई.

नक्सली बनने का भूत सवार था इस सुपरस्टार पर, बड़े भाई ने स्टारडम का वास्ता देकर रोका; आज हैं डिप्टी सीएम
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( Image Source:  IMDB )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय5 Mins Read

Updated on: 11 Jun 2026 1:26 PM IST

तेलुगु सिनेमा के 'पावर स्टार' और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण (Pawan Kalyan) आज राजनीति और एक्टिंग की दुनिया का एक बड़ा नाम हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज जनता के अधिकारों की बात करने वाला यह राजनेता कभी व्यवस्था से इतना तंग आ चुका था कि वह हथियार उठाने की सोच रहा था? जी हां, हाल ही में पवन कल्याण ने एक इंटरव्यू में अपनी जिंदगी का वह चौंकाने वाला राज खोला है, जिसके बारे में शायद ही कोई जानता हो.

जब नक्सली बनना चाहते थे 'पावर स्टार'

पवन कल्याण ने राजनीति में कदम साल 2014 में 'जनसेना पार्टी' (JSP) बनाकर रखा था. लेकिन राजनीति से बहुत पहले, उनकी जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आया था जब वे देश के सिस्टम से बेहद नाराज थे. एएनआई (ANI) के एक पॉडकास्ट में बात करते हुए पवन कल्याण ने खुलासा किया कि जब वे 17 से 21 साल के थे तब उनके दिमाग में नक्सल आंदोलन में शामिल होने का विचार चल रहा था. वे समाज में फैले अन्याय से इस कदर परेशान थे कि वे कुछ जनसभाओं में भी शामिल हुए और उनके मन में बंदूक उठाने तक का ख्याल आ गया था. पवन कल्याण के मुताबिक, उस उम्र में उनके भीतर व्यवस्था के खिलाफ एक अजीब सा गुस्सा और उथल-पुथल मची हुई थी.

भाई चिरंजीवी के एक सवाल ने बदल दी जिंदगी

जब पवन कल्याण के भीतर यह गुस्सा पनप रहा था, तब उनके बड़े भाई और तेलुगु सिनेमा के मेगास्टार चिरंजीवी उनके लिए ढाल बनकर खड़े हुए. पवन कल्याण के इस बदले स्वभाव को देखकर चिरंजीवी काफी चिंतित हो गए थे. उन्होंने पवन को सही रास्ते पर लाने के लिए उनसे एक ऐसा तीखा सवाल पूछा, जिसने उनके सोचने का नजरिया ही बदल दिया. चिरंजीवी ने पवन से पूछा था, 'अगर तुम्हारा भाई चिरंजीवी न होता, और तुम्हारे कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी होती, जहां लोग तुम्हारी मेहनत और तनख्वाह पर निर्भर होते, तब भी क्या तुम यही रास्ता चुनते?'. पवन कल्याण बताते हैं कि बड़े भाई के इस सवाल का उनके पास कोई जवाब नहीं था. वे पूरी तरह खामोश हो गए. चिरंजीवी ने उन्हें समझाया कि नफरत के बजाय कुछ क्रिएटिव काम करके भी समाज को बदला जा सकता है. बस इसी बातचीत ने पवन कल्याण को एक गलत रास्ते पर जाने से रोक लिया.

'चिरंजीवी ही मेरे इकलौते हीरो हैं'

अपने बड़े भाई के प्रति पवन कल्याण का सम्मान जगजाहिर है. इसी साल मार्च में अपनी फिल्म 'उस्ताद भगत सिंह' के एक इवेंट के दौरान उन्होंने इमोशनल होते हुए कहा था, 'मेरे लिए सिनेमा और जिंदगी में सिर्फ एक ही हीरो हैं मेगास्टार चिरंजीवी. जब मैं उनके सामने खड़ा होता हूँ, तो मैं भूल जाता हूं कि मैं खुद भी एक स्टार हूं.'

कश्मीर का वो दौर और बॉलीवुड फिल्मों की तारीफ

इसी बातचीत के दौरान पवन कल्याण ने देश की सुरक्षा और सिनेमा पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने रणवीर सिंह की स्पाई थ्रिलर फिल्म 'धुरंधर' की जमकर तारीफ की. इसके साथ ही उन्होंने मानव कौल की फिल्म 'बारामूला' का जिक्र करते हुए 1980 के दशक के अपने कश्मीर दौरे को याद किया, जब उन्होंने खुद घाटी में तनाव को बढ़ते हुए देखा था.

वर्क फ्रंट पर क्या कर रहे हैं पवन कल्याण?

राजनीति की व्यस्तताओं के बीच पवन कल्याण अपने फैंस के लिए फिल्मों में भी एक्टिव हैं. हाल के समय में वे 'हरि हारा वीरा मल्लु' और 'दे कॉल हिम ओजी' (OG) जैसी बड़ी फिल्मों में नजर आए. वहीं साल 2026 में उनकी फिल्म 'उस्ताद भगत सिंह' भी चर्चा में रही. आने वाले दिनों में वे निर्देशक सुरेंद्र रेड्डी के साथ एक बड़े बजट की अनटाइटल्ड फिल्म में नजर आने वाले हैं, जिसका फैंस को बेसब्री से इंतजार है.

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