G7 की मेज पर भारत की 5 बड़ी प्राथमिकताएं क्या, Modi के लिए क्यों है यह अग्निपरीक्षा?
G7 Summit 2026 में भारत निवेश, सप्लाई चेन, AI, आतंकवाद और ग्लोबल साउथ के मुद्दे उठाएगा. जानिए पीएम मोदी के लिए यह सम्मेलन क्यों अहम है.
दुनिया की सबसे प्रभावशाली अर्थव्यवस्थाओं के समूह G7 की बैठक में इस बार भारत भले ही सदस्य देश के रूप में नहीं, लेकिन एक अहम वैश्विक शक्ति के तौर पर मौजूद है. 15 से 17 जून तक फ्रांस के Évian-les-Bains में होने वाले शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजर केवल कूटनीतिक मुलाकातों पर नहीं, बल्कि भारत के दीर्घकालिक रणनीतिक हितों पर होगी. ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती देना, निवेश आकर्षित करना, सप्लाई चेन में भारत की भूमिका बढ़ाना, आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक समर्थन जुटाना और AI व नई तकनीकों में साझेदारी बढ़ाना भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं.
साथ ही अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, रूस-यूक्रेन युद्ध और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच संतुलन साधना भी मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी. ऐसे में G7 सम्मेलन भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और मोदी की कूटनीतिक क्षमता की महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए G7 सिर्फ एक शिखर सम्मेलन नहीं बल्कि भारत की वैश्विक स्थिति को और मजबूत करने का अवसर है. यही वजह है कि इसे मोदी मिशन की एक तरह की "अग्निपरीक्षा" भी माना जा रहा है.
G7 की मेज पर भारत की 5 बड़ी प्राथमिकताएं
1. ग्लोबल साउथ की आवाज
भारत लगातार खुद को विकासशील देशों की आवाज के रूप में पेश कर रहा है. अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के देशों के हितों को G7 जैसे मंचों पर उठाना मोदी सरकार की प्रमुख प्राथमिकता रहेगी.
2. व्यापार और निवेश बढ़ाना
भारत चाहता है कि वैश्विक कंपनियां चीन-प्लस-वन रणनीति के तहत भारत में अधिक निवेश करें. सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और मैन्युफैक्चरिंग में निवेश आकर्षित करना बड़ा लक्ष्य होगा.
3. सप्लाई चेन और आर्थिक सुरक्षा
कोविड और भू-राजनीतिक तनावों के बाद दुनिया चीन पर निर्भरता कम करना चाहती है. भारत खुद को विश्वसनीय सप्लाई चेन पार्टनर के रूप में स्थापित करने की कोशिश करेगा.
4. आतंकवाद और सुरक्षा
सीमा पार आतंकवाद, कट्टरपंथ और वैश्विक सुरक्षा के मुद्दों पर भारत कड़ा रुख रखता है. भारत चाहता है कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग और मजबूत हो.
5. AI, टेक्नोलॉजी और ऊर्जा परिवर्तन
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स और जलवायु वित्त जैसे क्षेत्रों में भारत अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश करेगा.
मोदी मिशन की अग्निपरीक्षा कैसे?
अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता के बीच संतुलन बनाए रखना. रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को कायम रखना. विकसित देशों और ग्लोबल साउथ के बीच सेतु की भूमिका निभाना. निवेश और तकनीकी सहयोग के ठोस परिणाम हासिल करना. आतंकवाद पर भारत की चिंताओं को वैश्विक समर्थन दिलाना.मोदी के लिए यह सम्मेलन सिर्फ तस्वीरों और द्विपक्षीय बैठकों का मंच नहीं, बल्कि भारत को निवेश, सुरक्षा, तकनीक और वैश्विक नेतृत्व के केंद्र में स्थापित करने की परीक्षा है. यदि इन पांच प्राथमिकताओं पर प्रगति होती है, तो इसे मोदी की कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जाएगा.
G7 के सदस्य देश कौन हैं?
G7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है. इसके स्थायी सदस्य अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान है. इनके अलावा यूरोपियन यूनियन के शीर्ष प्रतिनिधि भी बैठकों में भाग लेते हैं. मेजबान देश फ्रांस ने इस बार कई महत्वपूर्ण साझेदार देशों को भी आमंत्रित किया है. इनमें इंडिया, ब्राजील, सउदी अरब, यूएई, इजिप्ट, केन्या और साउथ कोरिया शामिल हैं. इन देशों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि G7 अब केवल पश्चिमी देशों का मंच नहीं रह गया बल्कि वैश्विक चुनौतियों पर व्यापक संवाद का केंद्र बनता जा रहा है.
किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
सम्मेलन में पश्चिम एशिया की स्थिति, ईरान से जुड़े तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन सुरक्षा, चीन से जुड़ी आर्थिक चुनौतियां, ऊर्जा सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे. इसके अलावा, विकासशील देशों के लिए वित्तीय सहायता और वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर भी चर्चा होने की संभावना है.




