Begin typing your search...

आज़ादी की मांग पर फांसी! कौन है 26 साल का इरफान सोलतानी जिसपर ‘ईश्वर के खिलाफ युद्ध’ का है आरोप?

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच 26 वर्षीय इरफान सोलतानी का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गया है. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इरफान को केवल विरोध प्रदर्शन में शामिल होने और आज़ादी की मांग करने पर मौत की सजा सुनाई गई है. उस पर ‘ईश्वर के खिलाफ युद्ध छेड़ने’ का गंभीर आरोप लगाया गया है, जो ईरानी कानून में फांसी योग्य अपराध है. आरोप है कि इरफान को न तो स्वतंत्र कानूनी सहायता दी गई और न ही निष्पक्ष सुनवाई का अवसर मिला. यह मामला ईरान में बढ़ते दमन और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर खतरे को उजागर करता है.

आज़ादी की मांग पर फांसी! कौन है 26 साल का इरफान सोलतानी जिसपर ‘ईश्वर के खिलाफ युद्ध’ का है आरोप?
X
( Image Source:  X/NUFDIran )
नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार

Updated on: 13 Jan 2026 10:38 AM IST

ईरान में जारी सत्ता-विरोधी आंदोलनों के बीच 26 वर्षीय इरफान सोलतानी का नाम अब अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुका है. मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि सरकार एक ऐसे युवक को फांसी देने की तैयारी कर रही है, जिसका ‘अपराध’ केवल विरोध प्रदर्शन में शामिल होना था. यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस दमनकारी तंत्र की तस्वीर पेश करता है, जहां असहमति को देशद्रोह माना जा रहा है. इरफान की कहानी ईरान में मौजूदा हालात की भयावह सच्चाई को उजागर करती है.

कौन है इरफान सोलतानी?

इरफान सोलतानी ईरान के कराज शहर के फर्दिस इलाके का रहने वाला 26 वर्षीय युवक है. वह किसी बड़े राजनीतिक दल या संगठन का नेता नहीं, बल्कि एक सामान्य नागरिक बताया जा रहा है. मानवाधिकार समूहों के मुताबिक, उसने हालिया प्रदर्शनों में हिस्सा लेकर खुलकर आज़ादी और बेहतर भविष्य की मांग की थी. यही मांगें अब उसकी जान पर भारी पड़ती दिख रही हैं.

गिरफ्तारी की रात और अचानक बदली जिंदगी

रिपोर्ट्स के अनुसार, इरफान को 8 जनवरी को कराज में सरकार विरोधी प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया. उस वक्त पूरे देश में संचार ब्लैकआउट था, जिससे उसके परिवार को लंबे समय तक यह भी पता नहीं चल पाया कि वह कहां है. कुछ ही दिनों में उसकी गिरफ्तारी एक सामान्य पुलिस कार्रवाई से बदलकर मौत की सजा में तब्दील हो गई. यह तेजी अपने आप में कई सवाल खड़े करती है.

‘ईश्वर के खिलाफ युद्ध’ का आरोप

ईरानी कानून के तहत इरफान पर ‘ईश्वर के खिलाफ युद्ध छेड़ने’ यानी ‘मोहरबेह’ का आरोप लगाया गया है. यह ऐसा अपराध है, जिसकी सजा सीधे फांसी हो सकती है. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इस कानून का इस्तेमाल अक्सर सरकार विरोधी आवाजों को कुचलने के लिए किया जाता है. इरफान के मामले में भी यही आशंका जताई जा रही है.

कानूनी अधिकारों से वंचित एक कैदी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इरफान को न तो स्वतंत्र वकील से मिलने दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिला. यहां तक कि उसकी बहन, जो खुद एक लाइसेंस प्राप्त वकील है, उसे भी केस फाइल देखने से रोका गया. परिवार का कहना है कि पूरा मुकदमा बंद दरवाजों के पीछे चलाया गया. ऐसी प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया जा रहा है.

परिवार को मिला मौत का संदेश

11 जनवरी को इरफान के परिवार को सूचित किया गया कि उसे मौत की सजा सुनाई जा चुकी है. इसके बाद परिवार को केवल 10 मिनट की संक्षिप्त मुलाकात की अनुमति दी गई. परिवार के अनुसार, उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि किस अदालत ने और किस आधार पर यह फैसला सुनाया. यह पल उनके जीवन का सबसे भयावह क्षण बन गया.

ईरान में क्यों भड़के विरोध प्रदर्शन?

ईरान में जनवरी की शुरुआत में विरोध प्रदर्शन तब भड़के, जब महंगाई चरम पर पहुंच गई और ईरानी रियाल की कीमत तेजी से गिर गई. रोजमर्रा की चीजें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती चली गईं. तेहरान के बाजारों से शुरू हुआ गुस्सा जल्द ही पूरे देश में फैल गया. आर्थिक मांगें धीरे-धीरे राजनीतिक बदलाव की आवाज बन गईं.

सत्ता के खिलाफ उठती आवाज

इन प्रदर्शनों का रुख सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ हो गया. सरकार ने प्रदर्शनकारियों को ‘दंगाई’ करार देते हुए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां शुरू कीं. मानवाधिकार समूहों के अनुसार, दो हफ्तों में सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों को जेल में डाला गया. इरफान इसी दमन की सबसे कड़ी मिसाल बनता दिख रहा है.

फांसी का डर और अंतरराष्ट्रीय चिंता

रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इरफान को 14 जनवरी को फांसी दी जा सकती है. अगर ऐसा होता है, तो यह मौजूदा आंदोलन के दौरान पहली फांसी होगी. मानवाधिकार संगठनों को आशंका है कि यह एक ‘डर पैदा करने वाली रणनीति’ की शुरुआत हो सकती है. इससे आगे और भी तेज़ सज़ाएं दी जा सकती हैं.

एक व्यक्ति नहीं, एक चेतावनी

इरफान सोलतानी का मामला अब सिर्फ एक युवक की किस्मत तक सीमित नहीं रहा. यह ईरान में अभिव्यक्ति की आज़ादी, न्याय प्रणाली और मानवाधिकारों पर बड़ा सवाल बन चुका है. दुनिया भर के संगठन उसकी सजा रोकने की अपील कर रहे हैं. देखना यह है कि क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव एक जान बचा पाएगा, या इरफान सत्ता के डर की एक और बलि बन जाएगा.

वर्ल्‍ड न्‍यूज
अगला लेख