कार्टून, क्लासरूम और कट्टर सोच: कैसे बच्चों को निशाना बनाने की तैयारी में कुख्यात इस्लामिक उपदेशक Wissam Haddad?
ऑस्ट्रेलिया में कुख्यात इस्लामी प्रचारक Wissam Haddad उर्फ Abu Ousayd एक बार फिर विवादों में है. The Daily Mail की रिपोर्ट के मुताबिक, हद्दाद बच्चों को निशाना बनाने के लिए कार्टून और एनिमेटेड वीडियो के ज़रिये कट्टरपंथी विचार फैलाने की योजना बना रहा है. उसका नाम Bondi Beach हमले के आरोपी से जुड़ चुका है. इससे पहले वह यहूदी विरोधी और हिंसक बयानों को लेकर अदालत से फटकार खा चुका है.
ऑस्ट्रेलिया में कट्टरपंथ को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच एक ऐसा खुलासा सामने आया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों, प्रशासन और समाज - तीनों को झकझोर दिया है. कुख्यात इस्लामिक प्रचारक विस्साम हद्दाद, जिसे अबू ओसैद के नाम से भी जाना जाता है, अब अपने कट्टर धार्मिक विचारों को बच्चों तक पहुंचाने की नई रणनीति पर काम कर रहा है - और इसके लिए उसने चुना है कार्टून और एनिमेशन का रास्ता.
द डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, हद्दाद ने हाल ही में एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप Telegram पर एक एनिमेटेड वीडियो जारी किया है, जिसमें वह खुद को एक कार्टून अवतार के रूप में दिखाता है - क्लासरूम में खड़ा, सामने छोटे-छोटे बच्चे और बोर्ड पर पढ़ाने का अंदाज.
बच्चों के लिए नया प्रोपेगेंडा
महज 47 सेकेंड के इस वीडियो में हद्दाद बच्चों को ‘तौहीद’ (ईश्वर की एकता) का पाठ पढ़ाता दिखाई देता है. वीडियो में वह कहता है - “आज हम तौहीद के बारे में सीखेंगे. तौहीद का मतलब है यह मानना कि अल्लाह एक है, उसका कोई साझेदार नहीं है… हम किसी इंसान, मूर्ति या इंसानों द्वारा बनाई गई व्यवस्था की पूजा नहीं करते.” यहीं नहीं, हद्दाद आगे यह भी जोड़ता है - “अगर किसी की बात मानने से अल्लाह की अवज्ञा होती है, तो हम किसी की बात नहीं मानते. सच्ची आज़ादी सिर्फ अल्लाह है.”
विशेषज्ञों के मुताबिक, यही वह लाइन है जो धार्मिक शिक्षा की आड़ में लोकतांत्रिक व्यवस्था, कानून और समाज के खिलाफ सोच को जन्म देती है, खासकर तब जब इसे बच्चों के दिमाग में डाला जाए. हद्दाद ने इस वीडियो के जरिए साफ संकेत दिए हैं कि आगे और भी ऐसे कार्टून वीडियो आने वाले हैं, यानी यह कोई एक-बार का प्रयोग नहीं, बल्कि सोची-समझी योजना है.
Al Madina Dawah Centre: बंद होने के आदेश के बावजूद चलता रहा अड्डा
यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बैंकस्टाउन स्थित Al Madina Dawah Centre - जहां हद्दाद पहले नियमित तौर पर लेक्चर देता था - को लेकर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है. City of Canterbury Bankstown Council ने इस सेंटर पर $3,000 का जुर्माना लगाया है. कारण - दिसंबर में इसे बंद करने के आदेश दिए गए थे क्योंकि यह बिना जरूरी मंजूरी के प्रार्थना स्थल (Prayer Hall) के रूप में संचालित हो रहा था.
काउंसिल की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ. सामने के गेट बंद थे लेकिन पीछे के दरवाजे से लोगों की लगातार आवाजाही जारी थी. यानी आदेशों को खुलेआम नजरअंदाज किया गया. हालांकि, दबाव बढ़ने के बाद Al Madina Dawah Centre ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर कहा कि वह अपने दरवाजे बंद कर रहा है.
Bondi Beach हमलावर से कनेक्शन ने बढ़ाई चिंता
इस पूरे मामले को और ज्यादा संवेदनशील बनाता है Bondi Beach हमले से जुड़ा कनेक्शन. आरोपी नवीद अकरम को हद्दाद का फॉलोअर बताया गया है. अकरम न सिर्फ इस सेंटर में आता था, बल्कि Dawah Van नाम के उस स्ट्रीट ग्रुप से भी जुड़ा था जिसे हद्दाद से जोड़ा जाता है. ABC News द्वारा हासिल किए गए 2019 के वीडियो फुटेज में, तब 17 साल का अकरम सड़क पर धर्म प्रचार करता दिखता है. स्कूली बच्चों से कहता है कि “अल्लाह का कानून हर चीज़ से ऊपर है - स्कूल, काम, सब कुछ.” हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि Bondi हमले में हद्दाद की प्रत्यक्ष भूमिका का कोई सबूत नहीं है, लेकिन वैचारिक प्रभाव को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता.
यहूदी विरोधी नफरत और अदालत की फटकार
हद्दाद का नाम पहली बार विवादों में नहीं आया है. पिछले साल ऑस्ट्रेलिया की फेडरल कोर्ट ने उसे Racial Discrimination Act के उल्लंघन का दोषी ठहराया था. कोर्ट ने पाया कि उसने अपने लेक्चर्स में यहूदियों के खिलाफ खुले तौर पर नफरत भरे बयान दिए. उसके कुछ बयानों में कहा गया था कि
यहूदी मुसलमानों को आपस में लड़ाने की साजिश करते हैं, फिलिस्तीन में मुसलमान “सूअरों और बंदरों की औलादों” से परेशान हैं और “अल्लाह को न मानने वालों से निपटने का एक ही तरीका है - तलवार.” कोर्ट ने उसे ऐसे वीडियो हटाने और भविष्य में इस तरह के बयान न देने का आदेश दिया था. लेकिन The Daily Mail और Sky News की रिपोर्ट्स बताती हैं कि हद्दाद ने नफरत फैलाना बंद नहीं किया.
राजनीति पर हमला, ‘जायोनिस्ट लॉबी’ का आरोप
हाल ही में हद्दाद ने NSW Premier Chris Minns को लेकर भी विवादित बयान दिया. उसने आरोप लगाया कि सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव में काम कर रही है, खासकर “इज़राइल और जायोनिस्ट लॉबी” के डर से. और यह कि कानून लागू करने में “दोहरा मापदंड” अपनाया जा रहा है. उसने दावा किया कि “अगर आपके पीछे अरबों डॉलर की लॉबी है, तो आपको फाइव-स्टार ट्रीटमेंट मिलेगा.”
‘कयामत का जिक्र’ और हिंसा की खुली बातें
हद्दाद के पुराने उपदेशों में ऐसे अंश भी सामने आए हैं जिनमें वह कयामत के समय यहूदियों के खिलाफ हिंसा का जिक्र करता है. एक वीडियो में वह कहता है, “पेड़ भी मुसलमानों से कहेंगे - मेरे पीछे एक यहूदी छिपा है, आओ और उसे मारो.” विशेषज्ञ इसे सीधा-सीधा नरसंहार की भाषा मानते हैं.
ASIO को चेतावनी, लेकिन सवाल अब भी बाकी
हालांकि हद्दाद पर अब तक आतंकवाद का कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है, लेकिन ABC की जांच के मुताबिक उसे ऑस्ट्रेलिया के प्रो-ISIS नेटवर्क में एक आध्यात्मिक नेता माना जाता है. एक पूर्व ASIO अंडरकवर एजेंट ने बार-बार चेतावनी दी थी कि “हद्दाद युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहा है, खासकर बच्चों का.” अब जब वह कार्टून और बच्चों के कंटेंट के जरिए अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहा है, तो सवाल और भी गंभीर हो गया है - क्या कट्टरपंथ अब बच्चों के कमरे तक पहुंचने की तैयारी में है?





