Al Aqsa पर इजराइल-अमेरिका का बड़ा गेम प्लान तैयार! जॉर्डन को साइड कर ऐसे आएगा मस्जिद का पूरा कंट्रोल
यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. दावा किया जा रहा है कि अमेरिका और इजराइल कथित तौर पर जॉर्डन से अल-अक्सा मस्जिद की ऐतिहासिक संरक्षक भूमिका खत्म करने की योजना पर काम कर रहे हैं.
Al Aqsa Mosque: यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद को लेकर एक नया विवाद सामने आया है. Middle East Eye की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल कथित तौर पर एक ऐसे नए प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत जॉर्डन से अल-अक्सा मस्जिद परिसर की ऐतिहासिक संरक्षक की भूमिका छीन ली जाएगी.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस नई व्यवस्था के जरिए मस्जिद परिसर के मैनेजमेंट को इजरायली हितों के ज्यादा करीब लाने की कोशिश की जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के दामाद Jared Kushner और इजरायल में अमेरिकी राजदूत Mike Huckabee का समर्थन प्राप्त है.
क्या है इज़राइल का प्लान?
बताया गया है कि प्रस्ताव के तहत जॉर्डन समर्थित Islamic Waqf की मौजूदा मैनेजमेंट को खत्म कर एक नया निकाय बनाया जा सकता है, जो अल-अक्सा मस्जिद को “मल्टी-फेथ सेंटर” यानी बहुधार्मिक स्थल घोषित करेगा.
अल अक्सा में क्या बदलेगा?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस नई व्यवस्था के तहत यहूदियों को अल-अक्सा परिसर में “समान पहुंच” दी जाएगी और बड़े समूहों में यहूदी प्रार्थना की औपचारिक अनुमति मिल सकती है. सीधे तौर पर इस फैसले के बाद यहूदी समुदाय के लोग अल-अक्सा कैंपस में आसानी से आ जा सकेंगे और प्रार्थना कर सकेंगे. फिलहाल इस परिसर में केवल मुसलमानों को ही जाने की इजाजत है.
इजराइल तय करेगा कौन इमाम?
इसके अलावा मस्जिद में इमाम, उपदेशक और वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति में भी इजराइल की भूमिका बढ़ने की उम्मीद है. यानी इजराइली सरकार यह तय करेगी कि कौन मस्जिद में नमाज पढ़ाएगा और और कौन-कौन मस्जिद की कमेटी में टॉप पॉजीशन पर होगा.
मुस्लिम पहचान कम, और टूरिस्ट प्लेस ज्यादा?
Middle East Eye ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कुछ अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वॉशिंगटन ने अल-अक्सा मस्जिद के भविष्य को लेकर एक ड्राफ्ट पेपर भी तैयार किया है. इसमें कथित तौर पर अल-अक्सा की मुस्लिम पहचान को कम करके उसे एक बड़े पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की बात कही गई है, जहां तीनों इब्राहीमी धर्मों- इस्लाम, ईसाई और यहूदी की मौजूदगी हो.
कैसे होगी अल अक्सा की निगरानी?
रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव में कुछ अरब देशों को “रोटेशनल ओवरसाइट” यानी बारी-बारी से निगरानी की भूमिका देने की बात भी कही गई है. बताया गया है कि बहरीन, मिस्र, मोरक्को और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को इस अमेरिकी प्रस्ताव की जानकारी दी गई थी.
सऊदी अरब क्यों हैं इस प्रस्ताव के खिलाफ?
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सऊदी अरब इस प्रस्ताव के खिलाफ है. खाड़ी देशों के सूत्रों के मुताबिक, रियाद मानता है कि अगर जॉर्डन की संरक्षक भूमिका खत्म की गई, तो इससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है.
क्यों अहम है जॉर्डन की भूमिका?
अल-अक्सा मस्जिद पर जॉर्डन की संरक्षक भूमिका हाशमी राजशाही के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. जॉर्डन का शाही परिवार 1924 से यरुशलम के मुस्लिम और ईसाई धार्मिक स्थलों का संरक्षक माना जाता है. बाद में 1994 में इजराइल और जॉर्डन के बीच हुए शांति समझौते में भी इस विशेष भूमिका को मान्यता दी गई थी.
1967 के युद्ध के बाद बनी व्यवस्था के तहत अल-अक्सा मस्जिद के अंदरूनी मामलों का प्रबंधन Islamic Waqf करता है, जबकि बाहरी सुरक्षा का नियंत्रण इजराइल के पास है. गैर-मुस्लिमों को सीमित समय में परिसर में आने की अनुमति है, लेकिन वहां प्रार्थना की अनुमति नहीं है.
इजरायल पर क्या आरोप लगते रहे हैं?
जॉर्डन और फिलिस्तीनी अधिकारियों का लंबे समय से आरोप रहा है कि इजराइल धीरे-धीरे इस पुराने “स्टेटस क्वो” को बदलने की कोशिश कर रहा है. मस्जिद परिसर में इजराइली पुलिस की कार्रवाई, यहूदी राष्ट्रवादी समूहों की बढ़ती यात्राएं और वहां यहूदी प्रार्थना की मांग को लेकर लगातार विवाद होता रहा है. Waqf अधिकारियों ने भी आरोप लगाया है कि इजरायल ने सिर्फ फिलिस्तीनी नमाजियों पर पाबंदियां नहीं लगाईं, बल्कि मस्जिद के रखरखाव और मरम्मत कार्यों में भी दिक्कतें पैदा कीं.
जॉर्डन की देख रेख क्या बोला वक्फ?
Waqf काउंसिल के उप प्रमुख Mustafa Abu Sway ने कहा कि हाशमी संरक्षक व्यवस्था क्षेत्रीय स्थिरता की आधारशिला है. उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनी लोग इसे “जीवनरेखा” की तरह देखते हैं और जॉर्डन ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऐतिहासिक व्यवस्था का समर्थन किया है.
फिलिस्तीनी अथॉरिटी ने क्यों किया विरोध?
फिलिस्तीनी अथॉरिटी के यरुशलम गवर्नरेट ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया है. उसने कहा कि यह योजना अल-अक्सा मस्जिद पर इजरायली संप्रभुता थोपने और दशकों पुरानी धार्मिक व्यवस्था को बदलने की कोशिश है.
गवर्नरेट ने बयान में कहा कि जॉर्डन की संरक्षक भूमिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ऐतिहासिक, कानूनी और राजनीतिक व्यवस्था है, जो अल-अक्सा मस्जिद की अरब और इस्लामी पहचान की रक्षा करती है.
अमेरिका ने क्या कहा?
Middle East Eye की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद एक अमेरिकी अधिकारी ने इस खबर को “पूरी तरह गलत” बताया. अधिकारी ने कहा कि व्हाइट House सक्रिय रूप से जॉर्डन से उसकी संरक्षक भूमिका छीनने पर काम नहीं कर रहा है.




