कुछ मामलों में पुलिस कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया के चलते पूरे परिवार बर्बाद हो जाते हैं, और कई बार निर्दोष लोगों को भी मानसिक और सामाजिक दबाव झेलना पड़ता है. जिसको लेकर अब बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि क्या भारत में पुरुषों के लिए भी अलग आयोग (Purush Aayog) की जरूरत है? इसको लेकर स्टेट मिरर हिंदी के इन्वेस्टिगेशन एडीटर संजीव चौहान ने सुप्रीम कोर्ट के वकील डॉ. एपी सिंह से बातचीत की.