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कश्मीर में पहली बार किसी मदरसे पर UAPA के तहत कार्रवाई, प्रशासन के गंभीर आरोप; जांच में हुए बड़े खुलासे

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शोपियां के सिराज-उल-उलूम संस्थान को UAPA के तहत अवैध घोषित कर दिया है. प्रशासन ने इस पर जमात-ए-इस्लामी से संबंध, फंडिंग गड़बड़ी और कट्टरपंथ फैलाने के आरोप लगाए हैं.

कश्मीर में पहली बार किसी मदरसे पर UAPA के तहत कार्रवाई, प्रशासन के गंभीर आरोप; जांच में हुए बड़े खुलासे
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( Image Source:  X: @ocjain4 )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय4 Mins Read

Published on: 28 April 2026 4:34 PM

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में स्थित एक बड़े और धार्मिक शैक्षणिक संस्थान दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम को अवैध संस्था घोषित कर दिया है. यह पहला मौका है जब जम्मू-कश्मीर में किसी मदरसे या सेमिनरी को UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत अवैध इकाई घोषित किया गया है. इस कानून की धारा 8(1) के तहत प्रशासन ने यह कार्रवाई की है.

प्रशासन का आरोप क्या है?

प्रशासन का कहना है कि इस संस्थान के प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (JeI) से गुप्त और लगातार संबंध रहे हैं. साथ ही, संस्थान में गंभीर कानूनी, प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं. प्रशासन का आरोप है कि संस्थान ने धीरे-धीरे ऐसा माहौल तैयार किया है जो कट्टरपंथ को बढ़ावा दे सकता है. कुछ पूर्व छात्रों पर उग्रवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप भी लगे हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ है.

जांच में क्या-क्या सामने आया?

शोपियां के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) की रिपोर्ट के आधार पर डिविजनल कमिश्नर कश्मीर अंशुल गर्ग (IAS) ने यह आदेश जारी किया. रिपोर्ट में कहा गया है कि संस्थान ने जमीन अधिग्रहण में संदिग्ध तरीके अपनाए. जरूरी रजिस्ट्रेशन और कानूनी औपचारिकताएं पूरी नहीं की गईं. निगरानी से बचने की कोशिश की गई और संस्थान के फंड में पारदर्शिता नहीं थी और वित्तीय नियंत्रण की व्यवस्था कमजोर थी, जिससे फंड का दुरुपयोग होने की आशंका है. संस्था के कुछ पुराने छात्र कथित रूप से आतंकवादी गतिविधियों में शामिल पाए गए. इन सभी कारणों से प्रशासन को लगा कि यह संस्थान सिर्फ धार्मिक शिक्षा नहीं दे रहा, बल्कि अवैध गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रहा है.

संस्था को अपना पक्ष रखने का मौका मिला?

हां, प्रशासन का कहना है कि संस्थान को अपना बचाव पेश करने का पूरा मौका दिया गया था. लेकिन संस्थान की आपत्तियों को प्रशासन ने गलत, तथ्यहीन और कानूनी रूप से कमजोर बताया. शोपियां पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई एहतियाती (Preventive) है, यानी भविष्य में होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए की गई है. इसमें आपराधिक मामलों जितने सख्त सबूतों की जरूरत नहीं होती.

सिराज-उल-उलूम के बारे में

यह संस्थान 1998 में स्थानीय धार्मिक नेता पीर गुल मोहम्मद सोफी द्वारा स्थापित किया गया था. उन्होंने लगभग 6 हेक्टेयर जमीन दान में दी थी. यहां सिर्फ मदरसा नहीं चलता, बल्कि एक स्कूल भी है जिसमें धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक विषय भी पढ़ाए जाते हैं. यह स्कूल जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन से मान्यता प्राप्त है और कक्षा 12 तक की पढ़ाई होती है. स्कूल का संचालन सिराज-उल-उलूम एजुकेशनल ट्रस्ट नामक अलग निकाय के जरिए किया जाता है.

पहले भी थी विवादों में

2019 में इस संस्थान का एक पूर्व छात्र लेथपोरा आत्मघाती हमले (जिसमें 40 CRPF जवान शहीद हुए थे) से जुड़ा पाया गया था. इसके बाद पुलिस जांच शुरू हुई.

2020 में तत्कालीन आईजीपी विजय कुमार ने बताया था कि संस्थान के तीन शिक्षकों पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) लगाया गया था और कुछ अन्य शिक्षकों पर निगरानी रखी जा रही थी.

हालांकि संस्थान के कुछ सदस्य पहले जमात-ए-इस्लामी से जुड़े रहे हैं, लेकिन प्रशासन अब पूरे संस्थान को ही अवैध मानते हुए सख्त कार्रवाई कर रहा है.

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