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गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक, मंदिर समिति का बड़ा फैसला; मुखबा पर भी लागू होगा बैन

गंगोत्री धाम को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है. श्री गंगोत्री मंदिर समिति ने गंगोत्री धाम और मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है.

Gangotri Dham Non-Hindus Entry Ban
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Gangotri Dham

( Image Source:  ANI )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Published on: 26 Jan 2026 5:57 PM

उत्तराखंड के प्रसिद्ध चारधामों में शामिल गंगोत्री धाम को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है. श्री गंगोत्री मंदिर समिति ने गंगोत्री धाम और मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है. यह फैसला रविवार को हुई समिति की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया.

मंदिर समिति के इस निर्णय के बाद राज्य में धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं और परंपराओं को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है. इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार संत समाज और धार्मिक संगठनों की राय के आधार पर ही आगे का रास्ता तय करेगी.

गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन

श्री गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि समिति ने यह तय किया है कि गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. उन्होंने कहा कि यह नियम केवल धाम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मां गंगा के शीतकालीन निवास मुखबा गांव में भी समान रूप से लागू होगा. समिति का मानना है कि यह फैसला धार्मिक परंपराओं और आस्था की पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है.

अन्य धामों में भी लग सकता है बैन

इस फैसले के बाद अन्य प्रमुख धामों में भी इसी तरह का कदम उठाने की संभावना जताई जा रही है. श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने जानकारी दी कि आगामी समिति बैठक में बद्रीनाथ, केदारनाथ और मंदिर समिति के अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा जाएगा. उन्होंने संकेत दिए कि इस दिशा में जल्द कोई ठोस निर्णय लिया जा सकता है.

क्या बोले सीएम धामी?

इस पूरे मामले पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा “हमारा स्पष्ट मत है कि जितने भी धार्मिक स्थल और देवस्थान हैं, उनके संचालन और व्यवस्थाओं से जुड़े धार्मिक संगठनों, तीर्थयात्रा समितियों और पूज्य संत समाज की राय को प्राथमिकता दी जाएगी. सरकार उन्हीं के सुझावों के आधार पर आगे बढ़ेगी.”

उत्तराखंड न्‍यूज
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