क्यों ट्रेंड में हैं सुहागरात की वीडियो! लाइक और फॉलोअर्स की भूख में कपल पोस्ट कर रहे हैं अपने पर्सनल मोमेंट्स
सोशल मीडिया पर एक न्यूली मैरिड कपल का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पति-पत्नी शादी के बाद बेडरूम में बैठकर अपने भविष्य के बच्चों के लिए मैसेज रिकॉर्ड करते नजर आ रहे हैं. कपल इसे इमोशनल मेमोरी बता रहा है, लेकिन इंटरनेट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं बेहद तीखी हैं। कई यूजर्स इसे चीप पब्लिसिटी और प्राइवेसी की सीमा तोड़ने वाला कदम बता रहे हैं. समाजशास्त्रियों का मानना है कि अगर निजी पलों को भी कंटेंट बना दिया गया, तो आने वाली पीढ़ी रिश्तों, मर्यादा और निजता का सही अर्थ समझ ही नहीं पाएगी.
आजकल सोशल मीडिया पर आधुनिकता के नाम पर लोग अपनी प्राइवेट लाइफ को इतना खुलकर दिखा रहे हैं कि मर्यादा और प्राइवेसी की सारी सीमाएं धुंधली हो गई हैं. हाल ही में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने लोगों के बीच खूब बहस छेड़ दी है. एक न्यूली मैरिड कपल का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में दोनों पति-पत्नी शादी के ठीक बाद अपने बेडरूम में बैठे हैं और अपने भविष्य में होने वाले बच्चों के लिए एक मैसेज रिकॉर्ड कर रहे हैं.
उनका कहना है कि जब उनके बच्चे बड़े हो जाएंगे, तो वे यह वीडियो देखकर समझ सकेंगे कि उनके मम्मी-पापा ने जीवन की शुरुआत कितनी मेहनत, प्यार और डेडिकेशन के साथ की थी. कपल इसे एक बहुत प्यारा और इमोशनल मेमोरी मान रहा है, जो आने वाली जनरेशन के लिए एक खास तोहफा होगा.
चीप पब्लिसिटी
लेकिन जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर फैला, लोगों की प्रतिक्रियाएं बहुत तेज और तीखी हो गईं. बहुत सारे लोग इसे अच्छा नहीं मान रहे. उनका कहना है कि यह सब चीप पब्लिसिटी कमाने का तरीका है. कुछ लोगों ने तो व्यंग्य करते हुए कहा कि अब क्रिएटिविटी भी सुहागरात के बेड तक पहुंच गई है यानी अब लोग अपने सबसे प्राइवेट और खास पलों को भी कैमरे में कैद करके दुनिया को दिखाने लगे हैं. कई सोसायोलॉजिस्ट और जानकार इस बात से बहुत चिंतित हैं.
कुछ पर्सनल या प्राइवेट नहीं रह जाएगा
उनका कहना है कि अगर हम ऐसे ही हर निजी पल को लाइव स्ट्रीम करते रहेंगे या रिकॉर्ड करके पोस्ट करते रहेंगे, तो जल्द ही इंसान के जीवन में कुछ भी सीक्रेट या पवित्र नहीं बचेगा. सब कुछ सिर्फ कंटेंट बनकर रह जाएगा चाहे वह प्यार हो, रिश्ते हों या भावनाएं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि हम अपनी आने वाली जनरेशन को क्या विरासत देंगे? क्या हम उन्हें संस्कार, परिवार की मर्यादा और इज्जत सिखाएंगे, या सिर्फ डिजिटल रिकॉर्डिंग्स देकर कहेंगे कि 'देखो, हमने कितना अच्छा किया था'? जब बच्चे बड़े होकर अपने माता-पिता के सबसे निजी पलों को सोशल मीडिया पर सबके सामने देखेंगे, तो उनके मन में मम्मी-पापा और परिवार के प्रति कितना सम्मान बचेगा? क्या वे परिवार की गरिमा और प्राइवेसी को समझ पाएंगे?.
लाइक और फॉलोअर्स की भूख
यह सिर्फ एक वीडियो की बात नहीं है. यह उस मानसिकता की ओर इशारा करता है, जहां लोग व्यूज, लाइक और फॉलोअर्स की भूख में अपने बेडरूम की दीवारें भी तोड़ने को तैयार हो जाते हैं. सोशल मीडिया ने हमें अभिव्यक्ति की आजादी जरूर दी है, लेकिन अब यह बहुत जरूरी हो गया है कि हम भावनाओं और निजता के बीच की लक्ष्मण रेखा को समझें और उसका सम्मान करें. अगर हम समय रहते इन सामाजिक मर्यादाओं (सोशल डेकोरम) को नहीं संभालेंगे, तो डिजिटल दुनिया हमारे रिश्तों की सारी गरिमा और पवित्रता को निगल जाएगी.
सोचना पर किया मजबूर
आखिरकार सबसे बड़ा सवाल यही रह जाता है –क्या हर लम्हा, जिसे सिर्फ जीया जाना चाहिए, उसे कैमरे में कैद करके पूरी दुनिया को दिखाना जरूरी है? क्या हमें हर पल को कंटेंट बनाने की बजाय, उसे सिर्फ अपने दिल में महसूस करना और संजोकर रखना चाहिए? यह सोचने का वक्त है कि हम कहां जा रहे हैं और हमें क्या चाहिए असली रिश्ते या सिर्फ वायरल मोमेंट्स?.





