'तेल की बोतल पूछ रही है?' विधानसभा में महंगाई पर शायरी से छिड़ी बहस, SP विधायक के तंज पर स्पीकर महाना ने पूछा - कौन सी?
यूपी विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन महंगाई पर चर्चा के दौरान सपा की शायरी और बीजेपी के तंज से सदन में हलचल मच गई. ‘कौन सी बोतल?’ सवाल पर ठहाके भी लगे और सियासी वार-पलटवार भी तेज हुआ.
उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के अंतिम दिन महंगाई पर चर्चा चल रही थी. बीच में 'बोतल' को लेकर अचानक सदन का मूड ऐसा बदला कि बजट सत्र कुछ देर के लिए ‘बोतल सत्र’ बन गया. समाजवादी पार्टी के विधायक ने जब शायरी में कहा - “तेल की बोतल पूछ रही है…” तो लगा जैसे महंगाई खुद सदन में खड़ी होकर सरकार से हिसाब मांग रही हो. विपक्ष ने इसे आम आदमी की जेब का दर्द बताया, तो सत्ता पक्ष ने इसे सियासी तंज में बदल दिया. वहीं, स्पीकर सतीश महाना ने ऐसा सवाल दाग दिया कि सभी सदन में ठकाके लगाकर हंसने लगे.
फिर क्या था, सत्ता पक्ष की ओर से जवाब आया और बात सीधे ‘बोतल’ पर जाकर अटक गई. तभी स्पीकर सतीश महाना ने मुस्कुराते हुए सवाल दाग दिया - “कौन सी बोतल?” बस, इतना सुनना था कि सदन में ठहाके गूंज उठे कुछ देर के लिए महंगाई, बेरोजगारी और आंकड़े सब पीछे छूट गए, और ‘बोतल’ सबसे बड़ा मुद्दा बन गई. इतना ही नहीं, बीजेपी और सपा के विधायक आमने-सामने आ गए.
दरअसल, सियासत की यही तो खासियत है. कभी गंभीर बहस भी शायरी में ढल जाती है, और कभी एक शब्द पूरे सदन को हंसी से भर देता है. लेकिन ठहाकों के पीछे छिपा सपा विधायक का संदेश साफ था. महंगाई पर वार जारी है, बस अंदाज थोड़ा मसखरे वाला हो गया.
क्या है पूरा मामला, क्यों बीजेपी-सपा विधायक आपस में भिड़ गए?
उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 के अंतिम दिन महंगाई के मुद्दे पर चर्चा हो रही थी. इसी दौरान समाजवादी पार्टी के विधायकों ने सरकार को घेरने के लिए शायरी का सहारा लिया. माहौल शुरुआत में हल्का-फुल्का रहा, लेकिन देखते ही देखते सियासी तकरार में बदल गया.
स्पीकर महाना ने विधायक आशु मलिक को क्यों टोका?
सपा विधायक आशु मलिक ने महंगाई और कालाबाजारी को लेकर कविता पढ़नी शुरू की. इस पर स्पीकर सतीश महाना ने उन्हें टोका और कहा कि सीधे प्रश्न पूछिए. इस पर विधायक ने कहा कि अभी केवल एक मिनट हुआ है, लेकिन स्पीकर ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि कुछ भी बोल सकते हैं. इसके बावजूद सपा की ओर से सरकार पर तंज जारी रहा.
‘तेल की बोतल’ वाली शायरी ने क्यों बढ़ा दिया सियासी तापमान?
इस बीच, यूपी विधानसभा में बहस के दौरान सपा विधायक आर.के. वर्मा ने महंगाई पर शायरी पढ़नी शुरू कर दी. सपा विधायक ने शायराना अंदाज में कहा - "तेल की बोतल पूछ रही है, क्यों तुम इतना देख रहे हो यूं, पहले तुम्हीं खरीदते थे मुझे, अब इतना क्यों सोच रहे हो तुम."
सपा विधायक वर्मा ने इस शायरी के जरिए महंगाई के मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की. विपक्ष का कहना था कि बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की जेब पर सीधा असर डाला है. सभी परेशान हैं और सरकार बेपरवाह है. ये सब नहीं चलेगा. महंगाई के सवाल पहले जवाब दो.
मंत्री के तंज और स्पीकर के सवाल से क्यों गूंज उठा सदन?
सपा की शायरी पर सत्ता पक्ष की ओर से गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने तंज कसते हुए कहा कि इन्हें बोतल बहुत अखर रही है, शायद उसके दाम बढ़ गए हैं. उनके इस बयान के बीच ही स्पीकर सतीश महाना ने मुस्कुराते हुए पूछा - “कौन सी बोतल?”
स्पीकर महाना के इस सवाल पर पूरे सदन में ठहाके लग गए. कुछ पल के लिए माहौल हल्का हो गया, लेकिन राजनीतिक संदेश साफ था कि दोनों पक्ष अपने-अपने तरीके से ‘बोतल’ का अर्थ निकाल रहे थे.
क्या बेरोजगारी भत्ता का मुद्दा भी गरमाया?
मौके का फायदा उठाते हुए महंगाई की बहस के बीच समाजवादी पार्टी ने बेरोजगारी भत्ता का मुद्दा भी उठा दिया. सपा विधायकों ने सवाल किया कि जब सरकार युवाओं को रोजगार नहीं दे पा रही, तो क्या सपा सरकार की तरह बेरोजगारी भत्ता देगी?
इसके जवबा में मंत्री अनिल राजभर ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार किसी भी प्रकार का बेरोजगारी भत्ता देने की योजना नहीं बना रही है. मंत्री के इस जवाब से असंतुष्ट सपा विधायकों ने विरोध जताया.
वाकआउट की नौबत क्यों आई और फिर क्या हुआ?
रोजगार और बेरोजगार के मुद्दे पर तीखी बहस के बाद सपा विधायक माता प्रसाद ने वाकआउट का आह्वान किया. विधायक अपनी सीटों से उठकर जाने लगे. तभी स्पीकर सतीश महाना ने हल्के अंदाज में कहा - “अरे, मन नहीं है जाने का… बैठ जाइए आप लोग, आज अंतिम दिन है, मैं चाहता हूं सब रहें.”
स्पीकर की इस टिप्पणी के कुछ ही सेकंड बाद सपा विधायक वापस लौट आए और अपनी सीटों पर बैठ गए. सदन में एक बार फिर हल्की हंसी के बीच कार्यवाही आगे बढ़ी.
क्या महंगाई की बहस सियासी नोकझोंक में बदल गई?
असल सच्चाई यह है कि महंगाई से शुरू हुई चर्चा ‘बोतल’ वाले तंज और ठहाकों के बीच राजनीतिक नोकझोंक में बदल गई. विपक्ष जहां महंगाई और बेरोजगारी को लेकर सरकार को घेरता नजर आया, वहीं सत्ता पक्ष ने भी व्यंग्य और जवाबी तंज के जरिए पलटवार किया.
यूपी विधानसभ्ज्ञा बजट सत्र 2026 के अंतिम दिन का यह घटनाक्रम यह दिखाता है कि विधानसभा में गंभीर मुद्दों पर भी कभी-कभी सियासी अंदाज और हल्के-फुल्के तंज माहौल को अलग रंग दे देते हैं.




