यूपी में ‘जिम जिहाद’ विवाद क्या है? मिर्जापुर केस में धर्मांतरण, ब्लैकमेल की पूरी इनसाइड स्टोरी
यूपी के मिर्जापुर में जिम की आड़ में कथित धर्मांतरण और ब्लैकमेल रैकेट का खुलासा होने के बाद से बड़े पैमाने पर इसकी जांच जारी है. पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार कर जिम सेंटर संचालकों को सकते में डाल दिया है.
'जिम जिहाद' मीडिया और सामाजिक स्तर पर बहस की वजह से चर्चित मसला बन गया है. दरअसल, कुछ मामलों में महिलाओं की ओर से आरोप लगाया गया है कि जिम (fitness centre) की आड़ में युवतियों को फंसाकर धर्मांतरण, ब्लैकमेलिंग (आश्लील वीडियो/फोटो के द्वारा दबाव) और यौन शोषण जैसे गैरकानूनी कृत्यों को अंजाम देने दिया जा रहा है. उसके बाद से इसस तरह की घटनाओं को 'जिम जिहाद' जोड़कर देखा जा रहा है. इसको लेकर पुलिस और न्यायिक जांच चल रही है.
यानी 'जिम जिहाद' कोई आधिकारिक यानी कानूनी शब्द नहीं है, बल्कि यह एक अश्लील और अनैतिक घटनाओं पर आधारित गंभीर मसला है. खासकर, हाल के वर्षों में संगठित रूप से कुछ लोगों पर लगे ऐसे संगीन आरोप की वजह से यह चर्चा के केंद्र में है.
मिर्जापुर पूरा मामला क्या है?
हाल ही में यूपी के लखनऊ/मिर्जापुर में पुलिस ने एक बड़े धर्मांतरण और ब्लैकमेलिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया, जो कथित तौर पर जिमों के नेटवर्क के जरिए संचालित हो रहा था. इस मामले में पुलिस को 50 से अधिक युवतियों के साथ अश्लील वीडियो और चैट के सबूत मिले हैं, जिनका इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग और दबाव बनाने में किया गया था.
इससे जुड़े आरोपी जिमों के संचालक और प्रशिक्षकों पर आरोप है कि उन्होंने इंस्टाग्राम आदि प्लेटफॉर्म पर युवतियों से दोस्ती बढ़ाई और फिर उन्हें ‘धर्म परिवर्तन’ या अन्य दबाव देने वाले खेल में फंसाया. चूंकि, यह नेटवर्क कई जिमों में फैला हुआ था, जिनमें से कुछ पुलिस ने सील कर दिए.
यूपी पुलिस ने अब तक इस मामले में 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें जिम संचालक और एक पुलिस हेड कॉन्स्टेबल भी शामिल है. मुख्य आरोपी इमरान खान को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया, जहां वह अपने परिवार के साथ विदेश भागने की कोशिश कर रहा था. उसे देश से फरार होने से पहले पुलिस ने दबोच लिया. यूपी के मिर्जापुर का मामला महाराष्ट्र/मध्य प्रदेश जैसी अन्य जगहों वाले विवादों से अलग माना जा रहा है.
पीड़िता के आरोप गंभीर, मिर्जापुर के मामले में अब तक क्या?
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में जिम की आड़ में गैर-कानूनी धर्म बदलने के रैकेट के कई मामले सामने आए हैं. टीआईआई की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने अब तक दो मामलों में कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया है और जिले भर में कम से कम पांच फिटनेस सेंटर सील किए हैं. गिरफ्तार आरोपियों में एक पुलिस कांस्टेबल भी शामिल है.
मिर्जापुर 'जिम जिहाद' में धर्म बदलने और ब्लैकमेल रैकेट के कथित मास्टरमाइंड इमरान खान (38) को दुबई भागने की कोशिश करते हुए नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन डिपार्टमेंट ने गिरफ्तार कर लिया. आरोपी पर 25,000 रुपये का इनाम था, उसे पुलिस ने पहले ही लुकआउट नोटिस जारी कर पकड़ा था. इमिग्रेशन अफसरों से जानकारी मिलने के बाद मिर्जापुर पुलिस की टीम दिल्ली पहुंची और आरोपी को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया.
ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद, इमरान को आगे की पूछताछ के लिए मिर्जापुर वापस लाया गया. पुलिस ने रैकेट से कथित तौर पर जुड़े पांच जिम को भी सील कर दिया. पहले गिरफ्तार किए गए लोगों में GRP हेड कांस्टेबल इरशाद खान (40), मोहम्मद शेख अली आलम (31), फैजल खान (34), ज़हीर (32), शादाब (36) और फरीद अहमद (28) शामिल है.
मिर्जापुर के पुलिस सुपरिटेंडेंट/DIG, सोमेन बर्मा ने कहा कि आरोपी इमरान खान पूरे नेटवर्क का मुख्य ऑपरेटर था और उसने एक ही ब्रांड के तहत कई जिम फ्रेंचाइजी शुरू की थीं. बर्मा ने कहा, "जबकि वह बैकग्राउंड में रहता था, रोजाना के काम कथित तौर पर उसके भाई और साथी संभालते थे, जो जिम आने वाली लड़कियों को टारगेट करते थे.
जिम जिहाद का UP में कैसे फैला नेटवर्क?
इमरान पर वाराणसी, गाजीपुर और मिर्जापुर जिलों में धोखाधड़ी और भरोसा तोड़ने के तीन केस चार्जशीट में थे; इसलिए, उसने अपने भाइयों के नाम पर जिम खुलवाए. अभी लकी नाम का एक और आरोपी फरार है. पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाले को 25,000 रुपये का इनाम देने की घोषणा की है. उसके नाम पर एक लुकआउट सर्कुलर भी जारी है.
'जिम जिहाद' मामला 20 जनवरी 2026 को उस समय सामने आया जब दो महिलाओं की इसकी लिखित में शिकायत की. शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की. जनवरी 21 को पुलिस ने सबसे पहले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया. जबकि अगले दिन एक एनकाउंटर के बाद एक और को पकड़ा गया. गैंग से कथित तौर पर जुड़े एक GRP हेड कांस्टेबल को भी उसी शाम गिरफ्तार किया गया.
पुलिस का दावा है कि आरोपियों के पास से 30 से ज्यादा फोटो, वीडियो और चैट रिकॉर्ड मिले हैं, जिनमें कथित तौर पर दिखाया गया है कि कैसे महिलाओं से दोस्ती की गई, उन्हें मॉर्फ्ड और AI से बने अश्लील कंटेंट का इस्तेमाल करके ब्लैकमेल किया गया और धर्म बदलने के लिए दबाव डाला गया.
जिम जिहाद का सरगना निकला इमरान
मुख्य आरोपी इमरान खान को दिल्ली हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया. इस मामले में आगे की जांच जारी है. पुलिस मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड और अन्य सबूतों की विस्तृत जांच कर रही है. ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह नेटवर्क और कितने इलाकों/लोगों तक फैला था.
कहीं साजिश तो नहीं! लालच, धमकी, ब्लैकमेल और धर्मांतरण की कहानी
पुलिस मामले में मिर्जापुर पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया. दो महिलाओं ने शिकायत दर्ज कराई थी कि जिम ट्रेनिंग की आड़ में उन्हें लालच दिया गया, उनका यौन शोषण किया गया, ब्लैकमेल किया गया और उन पर धर्म बदलने का दबाव डाला गया. गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान मोहम्मद शेख अली आलम, फैजल खान, जहीर और सादाब के रूप में हुई है. चारों को कोर्ट में पेश किया गया और जेल भेज दिया गया. पुलिस ने कहा कि नेटवर्क से जुड़े दूसरे संदिग्धों की तलाश जारी है.
पुलिस FIR के मुताबिक, एक महिला ने आरोप लगाया कि जिम ट्रेनर शेख अली ने पहले वर्कआउट के दौरान उससे दोस्ती की और फिर उसे रिश्ते में फंसा लिया. उसने दावा किया कि उसने उसके साथ छेड़छाड़ की, चुपके से आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए और उनका इस्तेमाल पैसे ऐंठने के लिए किया.
पीड़िता के नाम बैंक लोन भी
आरोपी पीड़िता को ब्लैकमेल कर उसके नाम पर लोन भी ले लिया. महिला का आरोप है कि उस पर बार-बार धर्म बदलने का दबाव डाला गया. बुर्का पहनने को कहा गया. दिन में पांच बार नमाज पढ़ने को कहा गया. दरगाह ले जाया गया और धर्म बदलने के लिए कलमा पढ़ने के लिए मजबूर किया गया. जब उसने विरोध किया, तो आरोपियों ने कथित तौर पर उसके साथ गाली-गलौज की और उसे जान से मारने या वीडियो ऑनलाइन लीक करने की धमकी दी. जिम की आड़ में ट्रेनर गैंग ने इसी तरह कई दूसरी मासूम लड़कियों को भी निशाना बनाया. मिर्जापुर पुलिस ने इस मामले में KGN जिम और B-Fit जिम समेत पांच जिम को सील कर दिया, जिन पर कथित तौर पर ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप है.
इससे मिलते-जुलते एक अलग ऑपरेशन में पुलिस ने मिर्जापुर में जिम से जुड़े एक और कथित धर्मांतरण और ब्लैकमेल रैकेट का भंडाफोड़ किया और बरकछा इलाके में एक एनकाउंटर के बाद जिम मालिक फरीद को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक फरीद, जो एक फायरआर्म्स ट्रेनर के तौर पर भी काम करता था, जवान लड़कियों को टारगेट करने के लिए कवर के तौर पर एक जिम चला रहा था. पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने की कोशिश की तो आरोपी ने गोली चला दी, जिसके बाद उसे काबू कर हिरासत में ले लिया.
2025 में अलीगढ़ में सामने आया था ऐसा मामला
मीडिया रिपोर्टिंग के अनुसार अप्रैल 2025 में अलीगढ़ में एक जिम संचालक पर आरोप लगा कि उसने हिंदू युवती को पहले रिलेशनशिप में फंसाया और फिर उसके खिलाफ ब्लैकमेल व धर्म परिवर्तन से जुड़ा मामला दर्ज हुआ. हालांकि, यह अलग प्रकरण था. यहां पर ध्यान देने की बात यह है 'जिम जिहाद' जैसा नाम 2025 में कहीं व्यापक रूप से सरकारी रिपोर्ट के रूप में दर्ज नहीं है, पर कुछ स्थानीय विवाद/आरोप सामने आए थे.
'जिम जिहाद' के खिलाफ नियम क्या?
- सरकारी स्तर पर हकीकत में, 'जिम जिहाद' को लेकर अलग से कानून' नहीं है. भारत में धर्मांतरण, ब्लैकमेल, यौन उत्पीड़न और अश्लीलता से जुड़ी कानूनी धाराएं पहले से मौजूद हैं. उसी के तहत इस मामले में भी बीएनएस या फिर आईपीसी की धाराओं व अन्य निमयों में तहत मामले दर्ज कर पुलिस कार्रवाई करती है.
- जिन धाराओं को 'जिम जिहाद' के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पुलिस इस्तेमाल करती है, उनमें जिहाद IPC की धारा 292-294 (अश्लीलता), धारा 375 (बलात्कार), श्रम नियम जैसे जिम/वर्कप्लेस से जुड़ी धाराएं शामिल हैं.
- भारतीय संविधान की धाराएं व्यक्तियों की स्वतंत्रता व धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करती हैं. जब समूह या व्यक्ति इसका दुरुपयोग करता है, तो संबंधित IPC के तहत मुकदमा दर्ज होता है.
- पुलिस किसी भी धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर जबरन धर्म परिवर्तन या ब्लैकमेलिंग/क्लाइंट को मानसिक दबाव में लाने वाले कृत्यों को अन्य संगीन धाराओं (जैसे विस्फोटक, ब्लैकमेल) के तहत भी अदालत में मुकदमा दर्ज करती है.
- देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट की व्याख्याएं और केंद्र सरकार द्वारा सामाजिक समूहों पर आधारित नए कानून की संभावना पर समय-समय पर चर्चा होती रही है, लेकिन वर्तमान में विशेष जिम-जिहाद नियम लागू नहीं हैं.
जिम जिहाद गंभीर मसला कैसे?
- देश के अलग-अलग क्षेत्रों में 'जिम जिहाद' शब्द अक्सर राजनीतिक व सामाजिक बहस में अभी तक इस्तेमाल हुआ है. कुछ मामलों में जिम जिहाद मानकर पुलिस ने मुकदमे दर्ज किए हैं. खासकर जब कुछ संगठनों या नेताओं ने इसे लव जिहाद की एक नई श्रेणी के रूप में पेश किया है.
- ऐसे मामलों की जांच सबूत-आधारित पुलिस प्रक्रिया और न्यायालय द्वारा निर्णय के बाद ही तय होती है कि क्या ऐसा कोई संगठनात्मक जाल रहा है या नहीं. एक-एक मामले को व्यक्तिगत आरोपों के आधार पर देखना ज्यादा अहम माना जा रहा है.
यूपी, एमपी-महाराष्ट्र में जिम जिहाद अलग कैसे?
यहां, पर इस बात का जिक्र कर दें कि पुलिस के लिए मामला 'जिम' नहीं, बल्कि पीड़ित द्वारा लगाए जा रहे आरोपों अहम हैं. अगर जांच में ये बातें सामने आती हैं तो मामला गंभीर हो जाता है. इसके कई कारण हैं.
ऑर्गनाइज्ड क्राइम : अगर एक से ज्यादा जिम, कई आरोपी और एक तय पैटर्न सामने आता है जैसे सोशल मीडिया के जरिए संपर्क, रिश्ता बनाना, फिर वीडियो बनाकर ब्लैकमेल तो पुलिस इसे ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंगल से देखती है.
जबरन धर्मांतरण के आरोप : उत्तर प्रदेश में गैरकानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 लागू है. अगर किसी पर दबाव, धोखे या लालच देकर धर्म बदलवाने का आरोप साबित होता है, तो सख्त धाराएं लगती हैं.
साइबर और सेक्सटॉर्शन एंगल : अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करना आईटी एक्ट और IPC की गंभीर धाराओं में आता है. यह महिला सुरक्षा से जुड़ा सीधा मुद्दा है.
पुलिस या सरकारी कर्मी की संलिप्तता : अगर किसी मामले में वर्दीधारी या प्रभावशाली व्यक्ति शामिल मिले, तो मामला और संवेदनशील हो जाता है. ऐसे आरोप सामने आने पर पुलिस इसे 'लॉ एंड ऑर्डर + महिला सुरक्षा + संगठित अपराध' के मिश्रित खतरे के रूप में देखती है.
'जिम जिहाद' यूपी, एमपी और महाराष्ट्र में फर्क क्या?
तीनों राज्यों में 'जिम जिहाद' शब्द का इस्तेमाल अलग राजनीतिक और कानूनी संदर्भ में हुआ है.
उत्तर प्रदेश (UP) : यहां एंटी कन्वर्जन कानून पहले से लागू है. इसलिए, अगर मामला धर्म परिवर्तन से जुड़ा बताया जाता है तो सीधा विशेष कानून के तहत केस दर्ज होता है. हाल के मामलों में जिम सील करना, गैंग एंगल से जांच और गिरफ्तारी तेजी से हुई.
मध्य प्रदेश (MP) : MP में भी 'धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2021' लागू है. यहां भी जबरन/छल से धर्म परिवर्तन पर कड़ी सजा का प्रावधान है. लेकिन एमपी में जिम जिहाद शब्द की बजाय अधिकतर केस व्यक्तिगत अपराध के तौर पर दर्ज होते हैं.
महाराष्ट्र (Maharashtra) : महाराष्ट्र में यूपी/एमपी जैसा विशेष एंटी-कन्वर्जन कानून उसी सख्ती से लागू नहीं है. वहां ऐसे मामले आमतौर पर IPC, POCSO, IT Act या महिला शोषण की धाराओं में दर्ज होते हैं.'जिम जिहाद' शब्द ज्यादा राजनीतिक बयानबाजी में दिखा, कानूनी दस्तावेजों में नहीं.
बड़ा फर्क असल में कानून, नाम नहीं
यूपी/एमपी में धर्मांतरण से जुड़े आरोपों पर स्पेशल एक्ट लागू होता है. महाराष्ट्र में सामान्य आपराधिक कानून लागू होते हैं.
जमीनी हकीकत क्या?
हर जिम या हर इंटरफेथ रिलेशनशिप को ऐसे लेबल से जोड़ना कानूनी तौर पर सही नहीं है. पुलिस केस-टू-केस आधार पर सबूत देखती है. अगर कहीं संगठित अपराध, जबरन धर्मांतरण, ब्लैकमेलिंग या महिला शोषण साबित होता है, तो वह गंभीर अपराध है, चाहे उसे कोई भी नाम दे दिया जाए.
सियासी हलचल
जिम जिहाद का मामला जोर पकड़ने के बाद भाजपा विधायक रत्नाकर मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे 'लव जिहाद' करार दिया. उन्होंने कहा कि मिर्जापुर के BJP MLA रत्नाकर मिश्रा ने कहा कि जिम का 'लव जिहाद' के लिए गलत इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. पुलिस ने कार्रवाई की है और यह खेल जारी नहीं रहने दिया जाएगा."





