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‘पहले टोको, फिर ठोको’- कैसी होगी Shankaracharya Avimukteshwaranand की चतुरंगिणी सेना, पर ‘ठोको’ का मतलब क्या?

Swami Avimukteshwaranand Saraswati ने सनातन धर्म और गौ-रक्षा के उद्देश्य से ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना’ के गठन का ऐलान किया है. चार अंगों और 20 विभागों वाली यह संरचित व्यवस्था ‘टोको, रोको और ठोको’ के सिद्धांत पर काम करते हुए कानून के दायरे में अपनी भूमिका निभाने का दावा करती है.

‘पहले टोको, फिर ठोको’- कैसी होगी Shankaracharya Avimukteshwaranand की चतुरंगिणी सेना, पर ‘ठोको’ का मतलब क्या?
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( Image Source:  X-@ANI )
समी सिद्दीकी
Edited By: समी सिद्दीकी4 Mins Read

Updated on: 24 March 2026 8:38 AM IST

Swami Avimukteshwaranand Saraswati Sena: ज्योतिष्पीठाधीश्वर Swami Avimukteshwaranand Saraswati ने ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना’ के गठन का ऐलान किया है. इस सेना का उद्देश्य सनातन धर्म की मान्यताओं के विरुद्ध कार्य करने वालों पर अंकुश लगाना और गौ-रक्षा के संकल्प को संगठित रूप से आगे बढ़ाना बताया गया है.

इसके संचालन के लिए ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सभा’ का भी औपचारिक गठन किया गया है. काशी के Shankaracharya Ghat स्थित श्रीविद्यामठ में शंकराचार्य ने इस पहल की विस्तार में जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि आगामी माघ माह में अमावस्या के दिन चतुरंगिणी सेना के एक अक्षौहिणी दल के साथ संगम स्नान किया जाएगा, जिसके बाद सेना औपचारिक रूप से अपने कार्य की शुरुआत करेगी.

कैसे काम करेगी ये सेना?

ये सेना कैसे काम करेगी इसको साफ करते हुए शंकराचार्य ने ‘टोको, रोको और फिर ठोको’ का सिद्धांत बताया. उनके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति या समूह धर्म के विरुद्ध कार्य करता है, तो सबसे पहले उसे टोककर चेतावनी दी जाएगी. इसके बाद भी स्थिति न सुधरने पर उसे रोका जाएगा, यानी प्रतिरोध किया जाएगा. यदि इन दोनों चरणों के बाद भी समाधान नहीं निकलता, तो ‘ठोकने’ की प्रक्रिया अपनाई जाएगी.

क्या है ठोकने का मतलब?

हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि ‘ठोकने’ का अर्थ किसी प्रकार की शारीरिक हिंसा नहीं है. इसके बजाय, यह एक संवैधानिक और प्रशासनिक कार्रवाई होगी, जिसके तहत संबंधित व्यक्ति या समूह के खिलाफ अधिकारियों और पुलिस प्रशासन को लिखित शिकायत दी जाएगी और उसके निस्तारण के लिए जवाबदेही तय की जाएगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर ही की जाएगी.

चतुरंगिणी सेना में कितने मेंबर्स होंगे?

चतुरंगिणी सेना में कुल 2 लाख 18 हजार 700 सदस्यों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है और इसमें देशभर से लोग जुड़ सकेंगे. इसके साथ ही 27 सदस्यीय पदाधिकारियों की घोषणा भी की जा चुकी है. इस सेना का मुख्य फोकस गौ-रक्षा, धर्म-रक्षा, शास्त्र-रक्षा और मंदिर-रक्षा पर रहेगा.

शंकराचार्य के अनुसार, सेना के सदस्यों के कपड़े पीले रंग के होंगे और उनके हाथ में परशु (फरसा) रहेगा. इस संगठन के अध्यक्ष स्वयं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज होंगे.

इस सेना के कितने अंग होंगे?

इस सेना को एक व्यवस्थित ढांचे में तैयार किया गया है, जिसमें चार प्रमुख अंग और कुल 20 विभाग बनाए गए हैं.

  • पहला अंग ‘मनबलांग’ है, जिसे बौद्धिक शक्ति का केंद्र माना गया है. इसमें संत, विद्वान, पुरोहित, अधिवक्ता और मीडिया से जुड़े लोग शामिल होंगे, जिनका काम वैचारिक और कानूनी स्तर पर सनातन धर्म का पक्ष मजबूत करना होगा.
  • दूसरा अंग ‘तनबलांग’ है, जिसमें शारीरिक रूप से सक्षम युवाओं को शामिल किया जाएगा. ये सदस्य मल्ल युद्ध, लाठी, परशु और खड्ग जैसी विधाओं के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से धर्म की रक्षा के लिए तैयार रहेंगे.
  • तीसरा अंग ‘जनबलांग’ है, जिसमें स्वयंसेवकों को अलग-अलग कैटेगरी यानी सार्वकालिक, वार्षिक, मासिक, साप्ताहिक और दैनिक में विभाजित किया गया है. ये स्वयंसेवक अलग-अलग स्तरों पर धर्म सेवा के कार्यों में योगदान देंगे.
  • चौथा अंग ‘धनबलांग’ है, जो इस पूरी व्यवस्था का आर्थिक आधार होगा. इसमें दानदाताओं के साथ-साथ भूमि, भवन और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने वाले लोग शामिल होंगे, ताकि संगठन की गतिविधियों को आर्थिक सहयोग मिल सके.

शंकराचार्य के इस कदम को सनातन धर्म को संगठित करने और विशेष रूप से गौ-रक्षा के मुद्दे पर समाज में नई चेतना लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है.

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