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वर्क फ्रॉम होम जॉब का झांसा, नौकरी के नाम पर ऐसे होती थी ठगी, नोएडा से लेकर बिहार-झारखंड तक कनेक्शन

वर्क फ्रॉम होम जॉब का झांसा देकर लोगों से जिस्ट्रेशन फीस के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के एक सदस्य को नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार किया है. आरोपी के मोबाइल से नौकरी से जुड़े फर्जी ऑफर लेटर, अभ्यर्थियों का डाटा, व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और ई-मेल के स्क्रीनशॉट मिले.

Noida work from home job scam
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Noida work from home job scam

नोएडा के साइबर क्राइम थाना पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले एक गिरोह के सदस्य को गिरफ्तार किया है. आरोपी वर्क फ्रॉम होम और निजी कंपनियों में नौकरी का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से पैसे ऐंठने वाले साइबर ठग नेटवर्क का हिस्सा था. पुलिस ने उसके पास से दो मोबाइल फोन और दो बैंक एटीएम कार्ड बरामद किए हैं.

डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि नौकरी के नाम पर ठगी करने वाला एक संदिग्ध सेक्टर-23 के पास एलिवेटेड रोड के नीचे अपनी कार में मौजूद है. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उसे पकड़ लिया. आरोपी की पहचान बिहार के पटना निवासी 36 वर्षीय प्रशांत कुमार श्रीवास्तव के रूप में हुई है, जो फिलहाल ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सुपरटेक ईको विलेज-1 सोसाइटी में रह रहा था.

जांच में क्या-क्या मिला?

जांच के दौरान आरोपी के मोबाइल से नौकरी से जुड़े फर्जी ऑफर लेटर, अभ्यर्थियों का डाटा, व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और ई-मेल के स्क्रीनशॉट मिले. रिकॉर्डिंग में नौकरी दिलाने और रजिस्ट्रेशन फीस जमा कराने की बातचीत भी सामने आई है. पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया है, जबकि उसके अन्य साथियों की तलाश जारी है.

पुलिस के पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने साथी अमन अग्रवाल के साथ मिलकर अलग-अलग डोमेन पर फर्जी जॉब वेबसाइट तैयार करता था. इन वेबसाइटों पर वर्क फ्रॉम होम और निजी कंपनियों में नौकरी के आकर्षक विज्ञापन डाले जाते थे. कॉल सेंटर के जरिए नौकरी तलाश रहे लोगों से संपर्क किया जाता और फिर उनसे रजिस्ट्रेशन व प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे जमा कराए जाते थे.

झारखंड से क्या कनेक्शन?

पुलिस के अनुसार गिरोह को झारखंड की एक महिला बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड उपलब्ध कराती थी. इन खातों में ठगी की रकम जमा कराई जाती थी. पैसे आते ही आरोपी एटीएम से नकदी निकालता और उसका बड़ा हिस्सा अपने साथी तक पहुंचा देता था. शिकायतों से बचने के लिए कुछ समय बाद बैंक खाते, सिम कार्ड और मोबाइल भी बदल दिए जाते थे.

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी नोएडा के सेक्टर-18, सेक्टर-23 समेत कई मेट्रो स्टेशनों और बस स्टॉप के आसपास युवाओं से संपर्क करता था. वह पंपलेट बांटकर बातचीत शुरू करता और बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाने का भरोसा देता था. फीस लेने के बाद पीड़ितों का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया जाता था. पुलिस के मुताबिक आरोपी नौकरी उपलब्ध कराने से जुड़ा कोई वैध दस्तावेज या अधिकृत रजिस्ट्रेशन भी नहीं दिखा सका.

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