बेअदबी कानून में अकाल तख्त क्यों चाहता है संशोधन, एक महीने का दिया समय, AAP विधायकों ने क्या मानी गलती?
श्री अकाल तख्त साहिब ने बेअदबी कानून में बदलाव की जरूरत बताते हुए सिख विधायकों को एक महीने के भीतर आपत्तियां दूर कराने का निर्देश दिया है. वहीं, AAP के कुछ विधायकों ने माना कि उन्होंने विधेयक को पूरी तरह पढ़े बिना ही उस पर हस्ताक्षर कर दिए थे.
पंजाब के बेअदबी विरोधी कानून को लेकर नया विवाद सामने आया है. श्री अकाल तख्त साहिब ने इस कानून में उठी आपत्तियों को दूर करने के लिए सभी सिख विधायकों को एक महीने के भीतर जरूरी संशोधन कराने का निर्देश दिया है. साथ ही कहा गया है कि जब तक इन आपत्तियों पर विचार नहीं हो जाता, तब तक कानून को आगे नहीं बढ़ाया जाए.
इस बीच बैठक में आम आदमी पार्टी (AAP) के कुछ विधायकों ने यह भी माना कि उन्होंने विधेयक को पूरी तरह पढ़े बिना ही उस पर हस्ताक्षर कर दिए थे. इस बयान के बाद विपक्ष ने सरकार पर जल्दबाजी में कानून पारित कराने का आरोप लगाया है.
अकाल तख्त ने क्या निर्देश दिए?
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने विभिन्न राजनीतिक दलों के सिख विधायकों के साथ बैठक कर बेअदबी कानून पर चर्चा की. उन्होंने साफ कहा कि जब तक इस कानून से जुड़ी सभी आपत्तियों पर विचार कर जरूरी बदलाव नहीं किए जाते, तब तक इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़नी चाहिए. साथ ही निर्देश दिया गया कि सभी आपत्तियां लिखित रूप में जुटाई जाएं और एक महीने के भीतर आवश्यक संशोधन कराने की दिशा में काम किया जाए.
AAP विधायकों ने क्या मंजूर किया?
बैठक के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) के कुछ विधायकों ने माना कि उन्होंने इस कानून पर विस्तार से पढ़े बिना ही साइन कर दिए थे. उनके इस बयान के बाद विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का एक और मौका मिल गया है. विपक्ष पहले से ही आरोप लगा रहा है कि सरकार ने इस विधेयक को जल्दबाजी में विधानसभा से पास कराया.
कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस के विधायकों ने कहा कि सरकार को कानून बनाने से पहले सभी पक्षों से राय लेनी चाहिए थी. उनका कहना है कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) से भी इस मुद्दे पर सलाह ली जानी चाहिए थी. साथ ही विधानसभा में इस कानून पर ज्यादा समय तक चर्चा होनी चाहिए थी, ताकि सभी पहलुओं पर विचार किया जा सके.
क्यों अहम है अकाल तख्त की राय?
अकाल तख्त सिख धर्म की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था है. भले ही उसे कानून बनाने का अधिकार नहीं है, लेकिन सिख धर्म और उससे जुड़े मुद्दों पर उसकी राय को काफी सम्मान दिया जाता है. पंजाब में जब भी सिख आस्था या धार्मिक भावनाओं से जुड़ा कोई मामला सामने आता है, तब सरकार और राजनीतिक दल भी अकाल तख्त की बात को गंभीरता से लेते हैं. इसलिए बेअदबी कानून को लेकर दिया गया उसका यह निर्देश धार्मिक और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर अहम माना जा रहा है.




