आलीशान घर, फार्महाउस और महंगी गाड़ी... राम मंदिर चंदा चोरी के मुख्य आरोपी अनुकल्प-लवकुश की अचानक कैसे बदल गई लाइफस्टाइल?
अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले में अब मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा और उनके बहनोई लवकुश मिश्रा की संपत्ति और बैंक अकाउंट की जांच होगी. बीते कुछ सालों में दोनों का लाइफस्टाइल आम से लग्जरी हो गया.
Ram Mandir Donation Scam
Ayodhya Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले में पुलिस जांच तेजी से आगे बढ़ रही है. इस केस में एक ही परिवार के दो सदस्य अनुकल्प मिश्रा और उनके बहनोई लवकुश मिश्रा मुख्य आरोपियों के तौर पर सामने आए हैं. दोनों उन आठ लोगों में शामिल हैं जिन्हें दान चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. जांच एजेंसियां अब आरोपियों के वित्तीय लेन-देन, संपत्ति और अचानक बदली जीवनशैली की पड़ताल कर रही हैं.
पुलिस को शक है कि मंदिर की दान राशि की गिनती से जुड़ी व्यवस्था में शामिल कुछ लोगों ने इसका फायदा उठाया. वहीं, अनुकल्प मिश्रा की संपत्ति और बीते कुछ सालों में हुए आर्थिक बदलाव जांच का अहम हिस्सा बन गए हैं.
कैसे एक ही परिवार के 2 लोग हुए शामिल?
पुलिस जांच के अनुसार, अनुकल्प मिश्रा उस टीम का हिस्सा था जिसे श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए नकदी और अन्य चीजों की गिनती के लिए नियुक्त किया गया था. जांच में सामने आया है कि अनुकल्प ने अपने बहनोई लवकुश मिश्रा को भी इसी टीम में शामिल करवा दिया था. अब दोनों पर आरोप है कि वे उस कथित नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसके जरिए मंदिर की दान राशि में हेराफेरी की गई.
कैसे बदल गया लाइफस्टाइल?
रिपोर्ट के मुताबिक दोनों की मासिक सैलरी करीब 18 से 20 हजार रुपये थी, लेकिन अचानक बदले उनके लाइफस्टाइल को लेकर कई सवाल उठने लगे. अयोध्या स्थित उनके गांव में पहुंचकर की गई पड़ताल में अनुकल्प मिश्रा की जीवनशैली को लेकर कई बातें सामने आईं. स्थानीय लोगों के मुताबिक, उनका घर गांव के अन्य मकानों की तुलना में काफी अलग और भव्य दिखाई देता है. ग्रामीणों ने दावा किया कि कुछ समय पहले तक परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी, लेकिन बीते कुछ सालों में इसमें बड़ा बदलाव देखने को मिला है.
क्या बोले अनुकल्प के दादा?
अनुकल्प मिश्रा के दादा राजेंद्र प्रसाद मिश्रा ने पुलिस को बताया कि अनुकल्प के पिता संपत्ति कारोबार से जुड़े हैं और वह अलग स्थान पर रहते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि उनके पोते ने 30 अप्रैल को गांव में सात दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें एक कथावाचक भी शामिल हुए थे. दादा ने दावा किया कि उस आयोजन के दौरान उनकी मुलाकात अनुकल्प से हुई थी, लेकिन उन्हें मंदिर चोरी मामले की कोई जानकारी नहीं थी.
अनुकल्प मिश्रा द्वारा आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में कई प्रमुख लोगों की मौजूदगी भी चर्चा में है. कार्यक्रम की तस्वीरों में राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के साथ अनुकल्प मिश्रा नजर आए. इसके अलावा अयोध्या के महापौर और जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हुए थे. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इतने बड़े आयोजन के लिए धन का स्रोत क्या था.
फार्महाउस और 65 लाख रुपये के घर की जांच
स्थानीय लोगों के अनुसार, अनुकल्प मिश्रा ने हाल ही में गांव के बाहरी इलाके में एक फार्महाउस भी बनवाया था. जांच में यह भी सामने आया है कि उसने पिछले साल अयोध्या में एक मकान खरीदा था, जिसकी मौजूदा कीमत करीब 65 लाख रुपये बताई जा रही है. इसके अलावा पड़ोसियों ने बताया कि उसके पास पहले से एक वाहन था और वह एक स्कॉर्पियो एसयूवी खरीदने की तैयारी कर रहा था.
लवकुश मिश्रा अयोध्या के रुदौली क्षेत्र के एक गांव का रहने वाला बताया जा रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार, वह किराए के मकान में रहता है और उसने हाल ही में एक लाख रुपये से अधिक कीमत की मोटरसाइकिल खरीदी है. पुलिस अब दोनों आरोपियों समेत सभी आठ आरोपियों की संपत्ति, बैंक खातों और आर्थिक गतिविधियों की जांच कर रही है ताकि पैसे के लेन-देन की पूरी जानकारी जुटाई जा सके.




