क्या 'श्रापित' है कर्नाटक CM आवास अनुग्रह? इसी डर से डीके शिवकुमार ने चुना नया ठिकाना, 'कुमारा कृपा' को लेकर क्यों मचा बवाल?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का सरकारी आवास बदलने का फैसला चर्चा का विषय बन गया है. आधिकारिक सीएम आवास 'अनुग्रह' में रहने के बजाय उन्होंने 'कुमारा कृपा' को चुना है.
किस डर से डीके शिवकुमार ने 'कुमारा कृपा' को चुना नया ठिकाना
कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शपथ लेने के बाद अपने सरकारी आवास को लेकर ऐसा फैसला लिया है, जिसकी राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा हो रही है. राज्य के आधिकारिक मुख्यमंत्री आवास 'अनुग्रह' में रहने के बजाय उन्होंने 'कुमार कृपा' को अपना नया सरकारी ठिकाना बनाने का फैसला किया है.
इस फैसले के पीछे को लेकर बवाल मचा हुआ है. इस पर JD(S) का कहना है कि रेनोवेशन से ऐतिहासिक महत्व वाली इमारत को नुकसान पहुंच सकता है.
अनुग्रह छोड़ने का फैसला क्यों चर्चा में है?
आमतौर पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद 'अनुग्रह' में ही रहते हैं. यह राजधानी बेंगलुरु में कुमारकृपा रोड पर स्थित है और मुख्यमंत्री के होम ऑफिस से सटे 60 स्क्वेयर इलाके में फैला हुआ है. पद संभालते ही डीके शिवकुमार ने अपने पता बदलने का फैसला किया और अब कुमार कृपा गेस्ट हाउस को अपने लिए तैयार कराया जा रहा है.
क्यों है 'अनुग्रह' मनहूस?
कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से यह धारणा रही है कि 'अनुग्रह' मुख्यमंत्री के लिए शुभ नहीं माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि यहां रहने वाले कई मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए. कहा जाता है कि इन नेताओं ने वास्तु के अनुसार बदलाव भी करवाए, लेकिन इसके बावजूद वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके.
कुमार कृपा पर बवाल क्यों?
डीके शिवकुमार के कुमार कृपा को चुनने पर बवाल मच गया है. दरअसल इस फैसले पर जेडी(एस) का आरोप है कि कुमारा कृपा में बड़े पैमाने पर हो रहे रेनोवेशन से इस ऐतिहासिक इमारत की मूल पहचान और विरासत को नुकसान पहुंच सकता है. हालांकि सरकार का कहना है कि कुमार कृपा की ऐतिहासिक पहचान को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा. मरम्मत और आधुनिकीकरण के दौरान बिल्डिंगी की मूल विरासत से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी.
160 साल पुराना है कुमार कृपा
करीब 160 साल पुराना कुमार कृपा गेस्ट हाउस कर्नाटक की महत्वपूर्ण धरोहरों में गिना जाता है. इसका संबंध महात्मा गांधी और तत्कालीन मैसूर रियासत के दीवान के. शेषाद्रि अय्यर से भी जोड़ा जाता है. सालों से इस परिसर में कई बार मरम्मत और विस्तार का काम हुआ है, लेकिन इसकी ऐतिहासिक पहचान को बरकरार रखा गया है.
किन किन नेताओं ने बदला बंगला?
इस लिस्ट में पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा, एस. एम. कृष्णा, धरम सिंह और डी. वी. सदानंद गौड़ा और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जैसे कई नेताओं के नाम इस चर्चा में अक्सर लिए जाते हैं. सिद्धारमैया ने 'कावेरी' बंगले में रहते हुए अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया. हालांकि, एक समय 'कावेरी' बंगले को भी अशुभ माना जाता था.




