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अमिताभ कांत रिपोर्ट भी नहीं दिला सकी राहत, अब बिल्डरों से बकाया वसूली के लिए आएगी OTS स्कीम

नोएडा प्राधिकरण ने बिल्डरों से बकाया वसूली तेज करने और 21 हजार से अधिक फ्लैट खरीदारों की अटकी रजिस्ट्रियों को पूरा करने के लिए वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना का प्रस्ताव शासन को भेजा है.

अमिताभ कांत रिपोर्ट भी नहीं दिला सकी राहत, अब बिल्डरों से बकाया वसूली के लिए आएगी OTS स्कीम
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( Image Source:  X-@ANI )
मोहम्मद रज़ा
By: मोहम्मद रज़ा3 Mins Read

Published on: 4 Jun 2026 2:37 PM

नोएडा प्राधिकरण को बिल्डरों से बकाया रकम की वसूली में अब तक अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है. अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों के आधार पर राहत पैकेज लागू होने के बावजूद कई बिल्डरों ने उसका लाभ तो उठाया, लेकिन प्राधिकरण का बकाया जमा नहीं किया. इसके चलते बड़ी संख्या में फ्लैट खरीदार आज भी अपने घरों की रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे हैं.

अब प्राधिकरण ने बकाया वसूली तेज करने और फ्लैट खरीदारों को राहत देने के लिए वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है. इस योजना के तहत बिल्डरों को एकमुश्त भुगतान कर बकाया निपटाने का अवसर मिलेगा. इसके बाद हजारों फ्लैट खरीदारों के नाम रजिस्ट्री का रास्ता साफ हो सकेगा.

नोएडा अथॉरिटी ने क्या कहा?

नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है और अगले सप्ताह होने वाली कैबिनेट बैठक में इस पर विचार किया जा सकता है. शासन की मंजूरी मिलते ही योजना लागू कर दी जाएगी.

गौरतलब है कि 21 दिसंबर 2023 को अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों पर आधारित शासनादेश लागू किया गया था. इसका उद्देश्य बिल्डरों और फ्लैट खरीदारों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाना और रजिस्ट्री प्रक्रिया को गति देना था.

कितने बिल्डर्स को दी गई थी राहत?

इस योजना के तहत 57 बिल्डरों को राहत दी गई थी. प्रावधान था कि यदि कोई बिल्डर कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत जमा करता है तो उसे सेक्टर-95 स्थित ओखला पक्षी विहार के 10 किलोमीटर दायरे में निर्माण प्रतिबंध अवधि का ‘जीरो पीरियड’ लाभ मिलेगा. यह प्रतिबंध 2013 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के बाद लागू किया गया था. इसके अलावा बिल्डरों को कोरोना काल का लाभ भी दिया गया.

प्राधिकरण के अनुसार, 27 बिल्डरों ने 25 प्रतिशत राशि जमा कर कोरोना अवधि का लाभ लिया, जबकि 13 बिल्डरों ने एनजीटी के जीरो पीरियड का फायदा भी उठाया. इसके बावजूद बकाया वसूली संतोषजनक स्तर तक नहीं पहुंच सकी.

नई गणना के अनुसार 57 बिल्डरों से प्राधिकरण को लगभग 5,500 करोड़ रुपये मिलने थे और 21 हजार से अधिक फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री होनी थी. हालांकि 12 बिल्डरों ने नोटिस का जवाब तक नहीं दिया, जबकि 14 बिल्डरों ने आंशिक भुगतान कर सहमति जताई. पिछले दो वर्षों में प्राधिकरण को केवल 1,200 करोड़ रुपये की वसूली हो सकी है. इसके कारण अब तक सिर्फ 4,364 फ्लैट खरीदारों के पक्ष में ही रजिस्ट्री हो पाई है.

ऐसे में प्रस्तावित ओटीएस योजना को बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि इसके लागू होने के बाद वर्षों से अटकी रजिस्ट्रियां पूरी हो सकेंगी, फ्लैट खरीदारों को मालिकाना हक मिलेगा और प्राधिकरण की बकाया वसूली में भी तेजी आएगी.

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