जलती होली के बीच आग की लपटों से सुरक्षित निकला युवक, सोशल पर वीडियो वायरल; क्या है ये परंपरा?
मथुरा से होलिका दहन के मौके पर एक हैरान कर देने वाला वीडियो सामने आया है, वीडियो में एक युवक प्रह्लाद का रूप धारण कर जलती हुई होलिका की लपटों के बीच से गुजरता दिखाई दे रहा है.
Mathura
उत्तर प्रदेश के मथुरा से होलिका दहन के मौके पर एक हैरान कर देने वाला वीडियो सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर तेजी से लोगों का ध्यान खींचा है. वीडियो में एक युवक प्रह्लाद का रूप धारण कर जलती हुई होलिका की लपटों के बीच से गुजरता दिखाई दे रहा है. चौंकाने वाली बात यह है कि वह पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकल आता है.
हालांकि पहली नजर में यह दृश्य खतरनाक और अविश्वसनीय लगता है, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई स्टंट नहीं, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है. यह अनोखी परंपरा मथुरा के फालेन गांव में निभाई जाती है, जहां हर साल होलिका दहन पर यह अद्भुत अनुष्ठान आयोजित होता है.
कौन है जलती हुई होली के बीच से निकला युवक?
फालेन गांव में होलिका दहन के अवसर पर एक व्यक्ति प्रह्लाद का प्रतीक बनकर जलती अग्नि के बीच से निकलता है. यह परंपरा आस्था और कठोर तपस्या से जुड़ी हुई है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह अनुष्ठान भक्ति, संयम और विश्वास की शक्ति का प्रतीक है. इस साल यह भूमिका संजू पांडा ने निभाई, जिनका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
क्या बोले संजू पांडा?
संजू पांडा ने बताया "इस परंपरा के लिए सवा महीने का प्रण लेना होता है, जो बसंत पंचमी से होलिका दहन तक चलता है. इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है, घर-परिवार से मोह खत्म हो जाता है. सीमा से बाहर नहीं जाते हैं. सवा महीने तक अन्न भी ग्रहण नहीं करते हैं."
क्या है कठोर नियम?
इस परंपरा को निभाने के लिए साधक को लगभग सवा महीने तक कठोर व्रत और संयम का पालन करना पड़ता है. वह गांव की सीमाओं से बाहर नहीं जाता, ब्रह्मचर्य का पालन करता है और अन्न का त्याग करता है. माना जाता है कि इस आध्यात्मिक अनुशासन और तपस्या के कारण ही वह अग्नि के बीच से सुरक्षित निकल पाता है.




