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शादी से एक दिन पहले SIR सुपरवाइजर ने की आत्महत्या, संघर्ष के बाद मिली थी नौकरी; अधिकारी किस बात का बना रहे थे दबाव?

बुधवार को सैकड़ों लेखपालों ने थाने के बाहर प्रदर्शन किया और पोस्टमार्टम होने तक शव नहीं उठाने दिया. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो गुरुवार से पूरे जिले में एसआईआर का काम पूरी तरह बंद कर देंगे. प्रदेश अध्यक्ष ने कहा है कि जरूरत पड़ी तो पूरे उत्तर प्रदेश में लेखपाल काम बंद कर देंगे.

शादी से एक दिन पहले SIR सुपरवाइजर ने की आत्महत्या, संघर्ष के बाद मिली थी नौकरी; अधिकारी किस बात का बना रहे थे दबाव?
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( Image Source:  X : @Mithileshdhar )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय5 Mins Read

Updated on: 27 Nov 2025 8:02 AM IST

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में बिंदकी कस्बे के एक गांव में एक बहुत दुखद घटना हुई है. 35 साल के सुधीर कुमार, जो अभी-अभी राजस्व विभाग में लेखपाल बने थे, ने मंगलवार सुबह अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. सबसे दर्दनाक बात यह है कि उनकी शादी ठीक अगले दिन यानी 26 नवंबर को होने वाली थी. पूरा घर शादी की तैयारियों में डूबा हुआ था, लेकिन सुधीर के मन पर बहुत भारी दबाव था.

सुधीर दलित परिवार से थे उन्होंने बहुत गरीबी और संघर्ष देखी थी. पहले सड़क किनारे अंडे और पानी की बोतलें बेचते थे, मनरेगा में मजदूरी करते थे, साथ-साथ पढ़ाई भी की और आखिरकार साल 2024 में कड़ी मेहनत से उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की परीक्षा पास करके लेखपाल की नौकरी पाई. नौकरी मिलने के बाद भी वे परिवीक्षा (प्रोबेशन) पर थे. घर में सिर्फ मां और बहन थे, पिता पहले ही गुजर चुके थे. सुधीर ही परिवार की पूरी जिम्मेदारी उठाते थे.

किस बात का था दबाव?

परिवार और लेखपाल संघ का आरोप है कि सुधीर की मौत की वजह चुनाव आयोग का 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) का काम था. यह वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने का बहुत बड़ा अभियान चल रहा है और लेखपालों पर भारी दबाव डाला जा रहा है. सुधीर की शादी की तारीख कई महीने पहले तय हो चुकी थी. उन्होंने तहसीलदार साहब से शादी का हवाला देकर छुट्टी के लिए आवेदन भी दिया था, लेकिन उन्हें पता ही नहीं चला कि छुट्टी मंजूर हुई या नहीं.

मीटिंग में नहीं जा पाए थे सुधीर

रविवार को उप-जिलाधिकारी स्तर के अधिकारी (निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी-ईआरओ) ने सभी कर्मचारियों की मीटिंग बुलाई. शादी की तैयारियों में व्यस्त सुधीर उस मीटिंग में नहीं जा पाए. इससे अधिकारी नाराज हो गए और उन्होंने सुधीर को निलंबित करने की सिफारिश करने की बात कही. इसके बाद मंगलवार सुबह कानूनगो शिवराम सुधीर के घर पहुंचे और फोन पर धमकाने लगे कि 'अगर आज ही बाकी एसआईआर का काम पूरा नहीं किया तो नौकरी से निकाल देंगे.' सुधीर ने कहा कि शादी की रस्में चल रही हैं, रस्में पूरी होते ही काम कर लूंगा, लेकिन शिवराम नहीं माने और बार-बार धमकी देते रहे.

आत्महत्या के लिए उकसाया है

परिवार का कहना है कि इसी मानसिक तनाव और अपमान से परेशान होकर सुधीर अंदर कमरे में गए और फांसी लगा ली. उस समय शिवराम बाहर ही खड़े थे. शादी की चहल-पहल में किसी को एक घंटे तक पता नहीं चला कि सुधीर कहां हैं. जब पता चला तो बहुत देर हो चुकी थी सुधीर की बहन अमृता ने पुलिस में शिकायत दी. शुरू में शिकायत में ईआरओ और कानूनगो दोनों का नाम था, लेकिन लेखपाल संघ का आरोप है कि प्रशासन ने दबाव डालकर सिर्फ कानूनगो शिवराम और कुछ अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कराई. पुलिस ने धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है.

लेखपाल काम बंद कर देंगे

बुधवार को सैकड़ों लेखपालों ने थाने के बाहर प्रदर्शन किया और पोस्टमार्टम होने तक शव नहीं उठाने दिया. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो गुरुवार से पूरे जिले में एसआईआर का काम पूरी तरह बंद कर देंगे. प्रदेश अध्यक्ष ने कहा है कि जरूरत पड़ी तो पूरे उत्तर प्रदेश में लेखपाल काम बंद कर देंगे. लेखपालों का कहना है कि इन दिनों उन पर बहुत ज्यादा दबाव डाला जा रहा है. देर रात मीटिंग बुलाई जाती है, छुट्टी नहीं मिलती, और कई बार तो उनका नाम आधिकारिक ड्यूटी लिस्ट में भी नहीं होता, फिर भी काम के लिए धमकाया जाता है. सुधीर की मां और बहन अब पूरी तरह अकेले रह गए हैं. जो लड़का सालों संघर्ष करके परिवार का सहारा बना था, वह एक दिन में सब खत्म हो गया. लेखपाल साथी न्याय और दोषियों को सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी और के साथ ऐसा न हो.

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