शादी के तीन दिन बाद बिकरू कांड में जेल, अब इंटर की पास…फर्स्ट डिवीजन पानी वाली खुशी दुबे बोलीं- बनना है वकील
शादी के कुछ ही दिनों बाद जेल पहुंचीं खुशी दुबे ने मुश्किल हालात के बीच हार नहीं मानी और 30 महीने की सजा के बाद पढ़ाई फिर से शुरू की और पहली डिविजन हासिल की.
UP Board Result 2026: शादी के हाथों की मेहंदी अभी ठीक से सूखी भी नहीं थी कि जिंदगी ने खुशी दुबे को ऐसे दौर में धकेल दिया, जहां सपनों की जगह जेल की सलाखें और अदालतों के चक्कर थे. जिस उम्र में आमतौर पर भविष्य की योजनाएं बनाई जाती हैं, उस समय खुशी खुद को एक ऐसे मामले के बीच पाईं जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी. 30 महीने जेल में बिताने के बाद भी उनका हौसला कमजोर नहीं पड़ा.
यूपी बोर्ड का रिजल्ट आने पर खुशी की आंखों में आंसू थे, लेकिन ये आंसू किसी हार के नहीं, बल्कि संघर्ष के बाद मिली सफलता के थे. उन्होंने 61 प्रतिशत अंक हासिल कर फर्स्ट डिवीजन से इंटरमीडिएट पास किया. यह उपलब्धि उन्होंने तब हासिल की, जब एक ओर उनकी मां की तबीयत खराब थी और दूसरी ओर उन्हें कानूनी लड़ाई का सामना करना पड़ रहा था. इन परिस्थितियों के बीच उनकी यह सफलता एक नई शुरुआत का संकेत देती है.
खुशी के कितने आए नंबर?
सब्जेक्ट वाइज नंबरों की बात करें तो खुशी को हिंदी में 66, अंग्रेजी में 49, इतिहास में 41, सिविक्स में 73 और समाजशास्त्र में 75 अंक मिले हैं. उन्होंने अपने रिजल्ट पर संतोष जताया है और आगे भी पढ़ाई जारी रखने की इच्छा व्यक्त की है.
क्या है खुशी दूबे का पूरा मामला?
जेल से बाहर आने के बाद खुशी ने अपनी पढ़ाई को दोबारा शुरू की थी. साल 2020 में हुए बिकरू कांड के बाद उनका नाम भी आरोपियों में शामिल हुआ था. घटना से महज तीन दिन पहले उनकी शादी अमर दुबे से हुई थी, जो विकास दुबे का करीबी था और बाद में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया. इस मामले के बाद पुलिस ने खुशी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. करीब ढाई साल जेल में बिताने के बाद उन्हें अदालत से जमानत मिली, जिसके बाद उन्होंने इंटरमीडिएट में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई फिर से शुरू की और अब परीक्षा पास कर ली है.
पढ़ाई में क्या आई समस्या?
खुशी के अनुसार, उन्होंने बेहद चुनौतीपूर्ण हालात में पढ़ाई की. अदालत में पेशियां, वकीलों के साथ बातचीत और मां के इलाज के बीच उन्होंने समय निकालकर तैयारी की. इन सबके बावजूद उन्होंने सफलता हासिल की.
क्या है खुशी का टारगेट?
अब उनका लक्ष्य कानून की पढ़ाई करना है और वे आगे चलकर वकील बनना चाहती हैं, ताकि न्याय के क्षेत्र में अपना करियर बना सकें.
क्या है बिकरू कांड?
बिकरू कांड 2 जुलाई 2020 की रात कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में हुआ था. इस घटना का मुख्य आरोपी कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे था, जिस पर कई गंभीर मामले दर्ज थे. पुलिस की टीम उसे पकड़ने के लिए उसके घर पहुंची थी, लेकिन वहां मौजूद विकास दुबे और उसके साथियों ने छतों से पुलिस पर गोलियां चला दीं.
इस हमले में एक सीओ समेत 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे. घटना के कुछ दिनों बाद विकास दुबे को उज्जैन से गिरफ्तार किया गया, लेकिन कानपुर लाते समय वह कथित तौर पर भागने की कोशिश में मारा गया. इस पूरे मामले में उसके कई साथी भी मारे गए और कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जिनमें खुशी दुबे भी शामिल थीं.
खुशी की गिरफ्तारी की क्या थी वजह?
खुशी दुबे, अमर दुबे की पत्नी थीं, जो इस मामले में आरोपी था और विकास दुबे का करीबी माना जाता था. अमर दुबे भी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था. खुशी की गिरफ्तारी इस आधार पर हुई थी कि वह घटना के समय घर में मौजूद थीं और उन पर साजिश में शामिल होने का संदेह जताया गया था. हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई, जिसके बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई और भविष्य पर दोबारा ध्यान केंद्रित किया.




