कैसे होता है डायलिसिस? प्रेमानंद महाराज ने खुद बताया, बोले- बड़ा कष्टप्रद है
Premanand Ji Maharaj पिछले 15-20 सालों से गंभीर किडनी बीमारी से जूझ रहे हैं और नियमित डायलिसिस पर हैं. इसके बावजूद वे सत्संग, पदयात्रा और भक्तों का मार्गदर्शन लगातार जारी रखे हुए हैं.
प्रेमानंद जी महाराज
Pramanand Maharaj News: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज किडनी की समस्या से जूझ रहे हैं. इस वजह से उन्हें समय-समय पर डायलिसिस (Dialysis) करानी पड़ती है. डायलिसिस एक मेडिकल प्रक्रिया है, जिसमें मशीन के जरिए शरीर से विषैले पदार्थ और अतिरिक्त पानी को बाहर निकाला जाता है. यह तब किया जाता है, जब किडनी सही से काम नहीं करती.
प्रेमानंद जी महाराज पिछले लगभग 15-20 वर्षों से किडनी की गंभीर बीमारी और नियमित डायलिसिस पर हैं. चिकित्सीय दृष्टि से उनका इतने लंबे समय तक बिना किडनियों के सामान्य कार्य किए सक्रिय रहना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता है.
प्रेमानंद जी महाराज ने क्या कहा?
प्रेमानंद जी महाराज का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे कहते हुए दिखाई दे रहे हैं- देखो, ये जो है न... ये छाती में ऑपरेशन कर.... पहले यहां ऑपरेशन हुआ था. फेल हो गया.. फिर छाती में ऑपरेशन करके दिल की खून की नली, उसमें डाल कर इससे ऑपरेशन...ये डायलिसिस है... देखो ये नली जा रही हैं न... ये छाती को चीर कर बनाई गई है.. ऑपरेशन... बड़ा कष्टप्रद है.
बीमारी का मुख्य कारण
पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (PKD): महाराज जी को 'ऑटोसोमल डोमिनेंट पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज' नामक जेनेटिक (आनुवांशिक) बीमारी है. इसमें किडनियों में पानी से भरी छोटी-छोटी थैलियां (सिस्ट) बन जाती हैं, जो धीरे-धीरे आकार में बढ़कर किडनी के स्वस्थ ऊतकों को नष्ट कर देती हैं.
प्रेमानंद महाराज पिछले लगभग 19 वर्षों से पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (PKD) से जूझ रहे हैं, जिसके कारण उनकी दोनों किडनियां खराब हैं. वे नियमित रूप से डायलिसिस पर हैं, और वर्तमान में उनका डायलिसिस ऑस्ट्रेलिया के डॉक्टरों की टीम द्वारा उनके आवास पर ही किया जा रहा है. उनकी किडनी की स्थिति को देखते हुए, उन्हें अब हफ्ते में पांच दिन डायलिसिस की आवश्यकता होती है.
किडनी डोनेशन से इनकार
देश-विदेश से उनके लाखों भक्तों ने (जिनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों शामिल हैं) प्रेमानंद महाराज को अपनी किडनी दान करने की भावुक इच्छा जताई है. हालांकि, हाराज जी ने विनम्रतापूर्वक सभी प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया है. उनका आध्यात्मिक दृष्टिकोण है कि यह शरीर कर्मों का फल भोग रहा है. वे कहते हैं कि जब तक श्री राधा रानी चाहेंगी, यह शरीर सांसें लेता रहेगा और वे इसके लिए किसी अन्य व्यक्ति के शरीर को कष्ट में नहीं डालना चाहते. कठिन शारीरिक पीड़ा और निरंतर डायलिसिस के बावजूद महाराज जी रोजाना पदयात्रा करते हैं, सत्संग करते हैं और भक्तों का मार्गदर्शन करते हैं.




