लगातार फ्लॉप, पुरानी कॉमेडी और नॉस्टेल्जिया का सहारा… आखिर क्यों नहीं कर पा रहे Akshay Kumar दमदार कमबैक?
एक समय बॉक्स ऑफिस पर राज करने वाले Akshay Kumar इन दिनों लगातार स्ट्रगल करते नजर आ रहे हैं. पुरानी कॉमेडी फिल्मों का अंदाज, सीक्वल्स और नॉस्टेल्जिया का सहारा लेने के बावजूद उनकी फिल्में वैसा जादू नहीं दिखा पा रहीं, जैसा कभी दर्शकों के दिलों पर चलता था.
एक दौर था जब अक्षय कुमार का नाम ही फिल्म हिट कराने के लिए काफी माना जाता था. सिनेमाघरों में उनकी एंट्री पर सीटियां बजती थीं, डायलॉग्स पर लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो जाते थे और एक्शन सीन पर तालियां गूंजती थीं. लेकिन वक्त बदला और अब वही अक्षय कुमार लगातार ऐसी फिल्मों का हिस्सा बन रहे हैं, जो उम्मीद के मुताबिक कमाल नहीं दिखा पा रहीं.
सबसे दिलचस्प बात यह है कि अक्षय कुमार लगातार अपनी पुरानी सुपरहिट फिल्मों की याद दिलाने वाली फिल्मों पर दांव लगा रहे हैं. पुराने डायलॉग्स, वही कॉमेडी स्टाइल, पुराने स्टार्स और पुराना माहौल… लेकिन फिर भी दर्शकों को पहले जैसा मजा नहीं मिल रहा. आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? यही सवाल आज बॉलीवुड गलियारों में सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है.
बैंकॉक के शेफ से बॉलीवुड के ‘खिलाड़ी’ तक
अक्षय कुमार का असली नाम राजीव भाटिया है. बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले उन्होंने बैंकॉक में वेटर और शेफ तक का काम किया था. मार्शल आर्ट्स सीखने के बाद उनकी जिंदगी बदली और मॉडलिंग से होते हुए बॉलीवुड तक पहुंच गए. 90 के दशक में फिल्म 'खिलाड़ी' ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया. इसके बाद एक्शन फिल्मों की लाइन लग गई और अक्षय कुमार “खिलाड़ी कुमार” बन गए. उस समय उनका स्टाइल, फिटनेस और स्क्रीन प्रेजेंस यंगस्टर्स के बीच जबरदस्त क्रेज बन चुका था.
जब कॉमेडी के बादशाह बन गए अक्षय कुमार
असल गेम तब बदला जब अक्षय कुमार ने कॉमेडी फिल्मों में कदम रखा. प्रियदर्शन के साथ उनकी जोड़ी ने बॉलीवुड को ऐसी फिल्में दीं, जिन्हें आज भी लोग बार-बार देखते हैं. हेरा फेरी, भूल भुलैया, भागम भाग, गरम मसाला इन फिल्मों की खासियत सिर्फ मजेदार कहानी नहीं थी. इनका ह्यूमर एकदम नेचुरल लगता था. ऐसा नहीं लगता था कि कोई जबरदस्ती लोगों को हंसाने की कोशिश कर रहा है.
पुरानी फिल्मों का असली जादू क्या था?
बहुत लोग मानते हैं कि उन फिल्मों का असली जादू राइटर नीरज वोरा की शानदार राइटिंग थी. उनके डायलॉग्स इतने दमदार होते थे कि आज भी सोशल मीडिया पर मीम्स बनते हैं. प्रियदर्शन का सिचुएशनल कॉमेडी वाला अंदाज और नीरज वोरा की तेज राइटिंग इन दोनों ने मिलकर अक्षय कुमार की कॉमेडी को आइकॉनिक बना दिया था. यही वजह है कि पुराने जोक्स आज भी लोगों को हंसा देते हैं.
फ्लॉप फिल्मों की लंबी फेहरिस्त
- अक्षय कुमार के लिए पिछले कुछ साल बॉक्स ऑफिस पर बेहद मुश्किल साबित हुए हैं. साल 2021 में आई Sooryavanshi उनकी आखिरी बड़ी हिट मानी जाती है. इसके बाद बतौर लीड एक्टर उनकी कई फिल्में रिलीज हुईं, लेकिन ज्यादातर दर्शकों को थिएटर तक खींचने में नाकाम रहीं. हालांकि OMG 2 सफल रही, लेकिन उसमें अक्षय कुमार का रोल छोटा था.
- ‘सूर्यवंशी’ के बाद सबसे पहले Bachchhan Paandey रिलीज हुई. इस फिल्म से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन इंडिया में यह करीब 50 करोड़ रुपये तक ही सिमट गई. इसके बाद ऐतिहासिक फिल्म Samrat Prithviraj आई, जिसे बड़े लेवल पर बनाया गया था. भारी बजट और बड़े प्रमोशन के बावजूद फिल्म लगभग 68 करोड़ रुपये ही कमा सकी.
- फिर आई पारिवारिक ड्रामा Raksha Bandhan, जो दर्शकों के दिलों को छूने में सफल नहीं रही. फिल्म का कलेक्शन करीब 44 करोड़ रुपये के आसपास रहा. दिवाली पर रिलीज हुई Ram Setu से भी मेकर्स को काफी उम्मीद थी, लेकिन यह फिल्म भी लगभग 72 करोड़ रुपये तक ही पहुंच पाई.
- सबसे बड़ा झटका Selfiee ने दिया. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर लगभग धराशायी हो गई और इंडिया में करीब 17 करोड़ रुपये ही कमा सकी. इतने बड़े स्टार के लिए यह आंकड़ा बेहद कमजोर माना गया.
- इसके बाद Mission Raniganj आई. फिल्म को समीक्षकों से अच्छे रिव्यू मिले, लेकिन इसका फायदा टिकट खिड़की पर नहीं दिखा. फिल्म लगभग 34 करोड़ रुपये का कारोबार ही कर पाई.
- वहीं Bade Miyan Chote Miyan को बड़े पैमाने पर तैयार किया गया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म का बजट करीब 300 से 350 करोड़ रुपये बताया गया. लेकिन इतनी बड़ी लागत के मुकाबले फिल्म इंडिया में सिर्फ करीब 59 करोड़ रुपये ही कमा सकी. रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इस फिल्म से मेकर्स को भारी नुकसान झेलना पड़ा.
- कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अक्षय कुमार की लगातार फ्लॉप फिल्मों की वजह से इंडस्ट्री को करीब 1000 करोड़ रुपये तक का नुकसान होने की बात कही गई. इनमें ‘बड़े मियां छोटे मियां’ और ‘सम्राट पृथ्वीराज’ जैसी फिल्मों का नुकसान सबसे ज्यादा बताया जाता है.
- लगातार असफल फिल्मों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दर्शक अब अक्षय कुमार से कुछ बिल्कुल नया देखना चाहते हैं, या फिर पुराने फॉर्मूले पर बनी फिल्में अब असर खो चुकी हैं.
अब क्यों फीकी पड़ रही हैं फिल्में?
पिछले कुछ सालों में अक्षय कुमार की कई बड़ी फिल्में उम्मीद के मुताबिक परफॉर्म नहीं कर पाईं. हाउसफुल 5,जॉली एलएलबी 3, भूत बांग्ला. इन फिल्मों में पुरानी यादों का सहारा ज्यादा दिखाई देता है. दर्शकों को ऐसा लगने लगा है कि नई कहानी कम और पुरानी फिल्मों का रंग ज्यादा दिखाया जा रहा है. समस्या यह है कि आज का दर्शक सिर्फ नॉस्टेल्जिया पर नहीं चलता. लोग अब नई कहानी, नया ह्यूमर और फ्रेश कंटेंट चाहते हैं.
दर्शकों की पसंद पूरी तरह बदल चुकी है
आज सोशल मीडिया और ओटीटी का दौर है. दर्शक दुनिया भर का कंटेंट देख रहे हैं. अब सिर्फ पुराने डायलॉग दोहराने से काम नहीं चलता. स्त्री जैसी फिल्मों ने दिखाया कि हॉरर और कॉमेडी को नए तरीके से भी पेश किया जा सकता है. यही वजह है कि अब दर्शक ज्यादा स्मार्ट और यूनिक कंटेंट की उम्मीद करते हैं.
क्या बहुत ज्यादा फिल्में करना पड़ रहा भारी?
अक्षय कुमार हर साल कई फिल्में रिलीज करने के लिए जाने जाते हैं. लेकिन कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इतनी ज्यादा फिल्मों के कारण स्क्रिप्ट की क्वालिटी पर असर पड़ा है. जब एक स्टार लगातार स्क्रीन पर दिखता है, तो दर्शकों के बीच उसका एक्साइटमेंट धीरे-धीरे कम होने लगता है. यही वजह है कि बड़े बजट के बावजूद कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर स्ट्रगल करती नजर आती हैं.
क्या खत्म हुआ अक्षय कुमार का स्टारडम?
इतनी आलोचनाओं के बावजूद एक सच यह भी है कि अक्षय कुमार आज भी बॉलीवुड के सबसे बड़े स्टार्स में गिने जाते हैं. उनकी फैन फॉलोइंग अब भी जबरदस्त है. लोग चाहते हैं कि अक्षय कुमार फिर से उसी दमदार अंदाज में वापसी करें, लेकिन इसके लिए शायद उन्हें पुराने फॉर्मूले से बाहर निकलना होगा. नई सोच, नए किरदार और मजबूत कहानी ही उन्हें फिर से टॉप पर पहुंचा सकती है.
अक्षय कुमार का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा. एक साधारण लड़के से सुपरस्टार बनने तक उन्होंने बहुत मेहनत की. लेकिन अब वक्त बदल चुका है और दर्शकों की पसंद भी. सिर्फ पुरानी यादों के भरोसे लंबे समय तक राज करना आसान नहीं होता. अगर अक्षय कुमार नए दौर की पसंद को समझकर अलग तरह का कंटेंट चुनते हैं, तो उनका जोरदार कमबैक आज भी पॉसिबल है.




