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बदायूं में क्रूरता! गर्भवती के सीने पर बैठकर दबाया पेट, नवजात की मौत; अस्पताल की घिनौनी शर्त से मचा हड़कंप

बदायूं में डिलीवरी के दौरान कथित अमानवीय तरीके से पेट दबाने के कारण नवजात की मौत हो गई. परिजनों के हंगामे के बाद प्रशासन ने जांच समिति गठित कर कार्रवाई शुरू कर दी है.

यूपी के अस्पताल में क्रूरता
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यूपी के अस्पताल में क्रूरता
( Image Source:  AI Created )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय3 Mins Read

Updated on: 27 April 2026 11:31 AM IST

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में एक बेहद दुखद और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है. स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और कुछ लोगों की अमानवीय हरकतों ने एक गरीब परिवार की खुशियों को पल भर में मातम में बदल दिया. कादरचौक इलाके में स्थित राधिका नर्सिंग होम में प्रसव के समय हुई क्रूरता के कारण एक नवजात शिशु की मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि डिलीवरी के दौरान एक महिला कर्मचारी ने प्रेग्नेंट महिला के सीने पर बैठकर जोर-जोर से उसका पेट दबाया, जिसकी वजह से बच्चा जन्म लेते ही दम तोड़ गया.

घटना कैसे हुई?

ललसी नगला गांव के रहने वाले छोटेलाल की पत्नी कृष्णा को रविवार सुबह प्रसव की पीड़ा शुरू हुई. उन्होंने तुरंत 108 एम्बुलेंस बुलाकर अपनी पत्नी को कादरचौक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया. वहां तैनात एएनएम शशिलता और दाई बबीता ने सरकारी अस्पताल में ही प्रसव कराने की बजाय, एमओआईसी डॉ. अवधेश राठौर से मिलीभगत करके कृष्णा को कादरचौक के राधिका नर्सिंग होम में रेफर कर दिया. यह निजी नर्सिंग होम एमओआईसी डॉ. अवधेश राठौर की बहन मोनिका राठौर द्वारा चलाया जाता है. नर्सिंग होम पहुंचने के बाद परिजनों से 15 हजार रुपये तुरंत जमा कराए गए. दोपहर के समय जब प्रसव की प्रक्रिया शुरू हुई, तब वहां के स्टाफ ने बेहद क्रूर और गलत तरीका अपनाया. परिजनों का कहना है कि एक महिला कर्मचारी प्रेग्नेंट महिला के सीने पर बैठ गई और बहुत जोर से उसका पेट दबाने लगी. इस खतरनाक और गलत तरीके से दबाव डालने की वजह से नवजात शिशु जन्म लेते ही सांस नहीं ले पाया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई.

मौत के बाद भी अमानवीय व्यवहार

जब परिवार वालों को पता चला कि उनका नवजात बच्चा मर चुका है, तो उन्होंने रो-रोकर विरोध किया. इस पर नर्सिंग होम के स्टाफ ने न सिर्फ उन्हें धमकियां दीं, बल्कि बेहद संवेदनहीन शर्त भी रख दी. उन्होंने कहा कि जब तक बाकी सारे पैसे नहीं जमा कर दिए जाते, तब तक न तो मां को घर जाने देंगे और न ही मृत बच्चे का शव सौंपेंगे. यह सुनकर परिवार वाले गुस्से से भड़क उठे और नर्सिंग होम के बाहर जमकर हंगामा करने लगे.

प्रशासन की कार्रवाई

मामले की गंभीरता देखते हुए स्थानीय प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया. एसडीएम और सीओ भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. बदायूं के जिलाधिकारी अवनीश राय ने तुरंत एक तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी, जिसमें एसडीएम सदर, सीओ उझानी और एक अन्य अधिकारी शामिल हैं. मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहन झा ने बताया कि राधिका नर्सिंग होम रजिस्टर्ड तो था, लेकिन वहां कोई योग्य डॉक्टर मौजूद नहीं था और न ही स्वास्थ्य विभाग के नियमों का पालन किया जा रहा था.

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