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अब 30 मार्च को क्यों नहीं मनाया जाता राजस्थान दिवस? जानिए सरकार ने क्या वजह बताया
अब राजस्थान दिवस हर साल 30 मार्च को नहीं, बल्कि हिंदी पंचांग के अनुसार मनाया जाएगा. 2026 में यह 19 मार्च को मनाया जा रहा है क्योंकि यह दिन हिंदू नववर्ष की शुरुआत है. सरकार का कहना है कि इससे इस दिन का सांस्कृतिक महत्व और बढ़ेगा.
19 मार्च को मनाया जा रहा राजस्थान दिवस
( Image Source:
x.com/my_rajasthan )
Rajasthan Diwas को लेकर इस साल बड़ा बदलाव देखने को मिला है. जहां पहले यह हर साल 30 मार्च को मनाया जाता था. वहीं, अब राज्य सरकार ने इसकी तारीख तय करने का तरीका ही बदल दिया है. नई व्यवस्था के तहत अब राजस्थान दिवस ग्रेगोरियन कैलेंडर के बजाय हिंदी पंचांग के अनुसार मनाया जाएगा. इसी के चलते 2026 में यह दिन 19 मार्च को मनाया जा रहा है.
सरकार के इस फैसले के पीछे सांस्कृतिक और पारंपरिक जुड़ाव को मजबूत करने की सोच बताई जा रही है. दरअसल, अब राजस्थान दिवस Chaitra Shukla Pratipada के दिन मनाया जाएगा, जिसे भारतीय नववर्ष की शुरुआत माना जाता है. यह दिन देशभर में नए साल और Chaitra Navratri के पहले दिन के रूप में भी मनाया जाता है. ऐसे में सरकार का मानना है कि इससे इस दिवस का सांस्कृतिक महत्व और ज्यादा बढ़ेगा.
पिछले साल कब मनाया गया था राजस्थान दिवस?
- पिछले कुछ वर्षों से इस बदलाव के संकेत मिल रहे थे. साल 2025 में भी राजस्थान दिवस 30 मार्च के बजाय 25 मार्च को मनाया गया था. अब इसे स्थायी रूप से पंचांग से जोड़ दिया गया है, जिससे हर साल इसकी तारीख बदलती रहेगी.
- सरकार इसे परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देख रही है. इस बदलाव के साथ राजस्थान दिवस अब सिर्फ औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहेगा, बल्कि लोक संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक भागीदारी का बड़ा उत्सव बनेगा.
- राज्यभर में लोक नृत्य, संगीत, कला और मेलों का आयोजन किया जाएगा, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उत्साह बढ़ेगा.
- इतिहास की बात करें तो पहले 30 मार्च को राजस्थान दिवस इसलिए मनाया जाता था क्योंकि इसी दिन 1949 में कई रियासतों के विलय से वृहत्तर राजस्थान का गठन हुआ था. जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर जैसी रियासतों के एक साथ आने से आधुनिक राजस्थान की नींव पड़ी थी.
- हालांकि राजस्थान का एकीकरण एक दिन में नहीं हुआ था, बल्कि यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी हुई. इसकी शुरुआत 1948 में अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली के विलय से हुई और अंततः 1956 में अजमेर-मेरवाड़ा के शामिल होने के बाद राज्य का वर्तमान स्वरूप बना.




