Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में ऐसे करें पूजा, इन आरती और मंत्र का जाप कर बरसेगी कृपा
चैत्र नवरात्रि 2026 के दौरान मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि सही आरती और मंत्रों का जाप करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होने लगती हैं.
आज से शक्ति आराधना का महापर्व चैत्र नवरात्रि शुरू हो रहे हैं.हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि पर चैत्र नवराशि प्रारंभ होते है जो 9 दिनों तक चलते हैं. जिसमें माता के 9 अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान के साथ पूजा होती है. चैत्र नवरात्रि नवमी तिथि तक चलती है जिसमें अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है.
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा करने का विधान होता है. आइए जानते हैं आज से शुरू होने वाले चैत्र नवरात्रि के कलश स्थापना शुभ मुहूर्त, पूजा विधि मंत्र और आरती समेत सबकुछ.
चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना शुभ मुहूर्त 2026
- पहला शुभ मुहूर्त- सुबह 06 बजकर 52 मिनट से लेकर 07 बजकर 43 मिनट तक
- दूसरा मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से लेकर 12 बजकर 53 मिनट तक
चैत्र नवरात्रि शुभ योग 2026
इस वर्ष चैत्र अमावस्या और नवरात्रि चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि का मेल रहेगा. इससे अलावा चैत्र नवरात्रि शुक्ल योग, ब्रह्रायोग और सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण होगा. इसके अलावा शुक्रादित्य, त्रिग्रही और नवपंचम राजयोग के साथ कई तरह के खास योगों का भी निर्माण होगा.
चैत्र नवरात्रि पूजन सामग्री
- शुद्ध मिट्टी
- जौ
- पीतल या तांबे का कलश
- मिट्टी का पात्र
- आम के पत्ते
- जटा नारियल
- चुनरी
- कलवा
- अक्षत
- मौली
- सिक्का
- सुपारी
- पंचमेवा
- बताशा
- धूप
- फल और फूल
- मिठाई
चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना पूजन विधि 2026
- चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है. घट स्थापना के लिए बहुत ही आसान विधि होती है.
- सबसे पहले पूजा के स्थान पर एक साफ लकड़ी की चौकी रखें और उसके ऊपर लाल या पीले रंगे का कपड़ा बिछाएं.
- इसके बाद मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति को स्थापित करें और पूजा का संकल्प लेते हुए सबसे पहले भगवान गणेश की वंदना करते हुए शुरुआत करें
- कलश स्थापना के लिए मिट्टी में जौ मिलाकर माता की मूर्ति के सामने रखें. फिर मिट्टी या पीतल के कलश के मुख पर कलावा बांधें और उसमें गंगाजल की कुछ बूंदे डालकर कर पानी से भर दें. इसमें फिर हल्दी की गांठ, एक सुपारी, एक सिक्का, आम के पत्ते लगाकर कलश को बंद करके और उसके ऊपर चावल भरकर रख दें.
- इसके बाद कलश पर नारियल को स्थापित करें और उसके ऊपर लाल कपड़ा और कलावा बांधें. फिर विधि-विधान के साथ कलश और मां दुर्गा की पूजा करें. पूजा में सभी तरह की पूजन सामग्री को लगाते हुए भोग अर्पित करें.
- फिर घी का दीपक और धूप जलाकर मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा, मंत्र और पाठ करें. अंत में आरती करते हुए पूजा में भूल चूक के लिए क्षमा मांगे.
अंबे जी की आरती
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती.
तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी.
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती.
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता.
पूत-कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता॥
सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती.
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना.
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती.
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली.
वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली॥
माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही सारती.
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
दुर्गाजी की आरती
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी.
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरी
माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को.
उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै.
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
जय अम्बे गौरी
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी.
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरी
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती.
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
जय अम्बे गौरी
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती.
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
जय अम्बे गौरी
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे.
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
जय अम्बे गौरी
ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी.
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥
जय अम्बे गौरी
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ.
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
जय अम्बे गौरी
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता.
भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
जय अम्बे गौरी
भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी.
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
जय अम्बे गौरी
कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती.
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
जय अम्बे गौरी
श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै.
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
जय अम्बे गौरी
मां शैलपुत्री आरती
शैलपुत्री मां बैल सवार. करें देवता जय जयकार.
शिव शंकर की प्रिय भवानी. तेरी महिमा किसी ने ना जानी
पार्वती तू उमा कहलावे. जो तुझे सिमरे सो सुख पावे.
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू. दया करे धनवान करे तू.
सोमवार को शिव संग प्यारी. आरती तेरी जिसने उतारी.
उसकी सगरी आस पुजा दो. सगरे दुख तकलीफ मिला दो.
घी का सुंदर दीप जला के. गोला गरी का भोग लगा के.
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं. प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं.
जय गिरिराज किशोरी अंबे. शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे.
मनोकामना पूर्ण कर दो. भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो.
मां शैलपुत्री पूजा मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:




