आंधी-तूफान भी फेल! 9 साल की मेहनत से तैयार सीकर के किसान का ‘इंसानी’ गेहूं, कमाई तीन गुना ज्यादा
राजस्थान के सीकर के किसान विकास कुमार सैनी ने 9 साल में ‘अजय राज’ गेहूं विकसित किया. यह किस्म आंधी-तूफान में भी सुरक्षित रहती है और 3 गुना तक मुनाफा देने का दावा करती है.
राजस्थान के सीकर से एक ऐसी खेती की कहानी सामने आई है, जो किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकती है. यहां के किसान विकास कुमार सैनी ने 9 साल की कड़ी मेहनत से ‘अजय राज’ नाम की ऐसी गेहूं की किस्म तैयार की है, जो आंधी-तूफान में भी नहीं गिरती और उत्पादन के साथ मुनाफा भी कई गुना बढ़ा सकती है. पोषण, मजबूती और मौसम प्रतिरोध जैसी खूबियों से भरपूर यह गेहूं अब खेती में बदलाव की बड़ी कहानी लिखने की ओर बढ़ता नजर आ रहा है.
क्या है ‘अजय राज’ गेहूं की नई किस्म?
राजस्थान के सीकर के किसान विकास कुमार सैनी ने 9 साल की कड़ी मेहनत के बाद ‘अजय राज’ नाम की गेहूं की नई किस्म विकसित की है. यह गेहूं अपनी मजबूती, उत्पादन क्षमता और पोषण गुणों के कारण तेजी से चर्चा में है. जब किसान इस फसल को लेकर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पहुंचे, तो इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई.
आंधी-तूफान में भी क्यों नहीं गिरता यह गेहूं?
इस गेहूं की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूत बनावट है. आमतौर पर तेज हवा, बारिश या तूफान में गेहूं की फसल गिर जाती है, जिससे भारी नुकसान होता है. लेकिन ‘अजय राज’ किस्म की डंठल इतनी मजबूत है कि खराब मौसम में भी यह सीधा खड़ा रहता है, जिससे फसल सुरक्षित रहती है और किसानों का जोखिम कम हो जाता है.
कितनी पैदावार और कितना मुनाफा देता है?
किसान विकास सैनी के अनुसार, इस गेहूं की पैदावार प्रति यूनिट 40 से 45 क्विंटल तक हो सकती है. खास बात यह है कि यह पारंपरिक गेहूं की तुलना में 2 से 3 गुना ज्यादा मुनाफा देने की क्षमता रखता है. सीकर में 40 बीघा जमीन पर इसकी खेती कर वे पहले ही ज्यादा लाभ कमा रहे हैं.
क्या छोटे और बड़े किसान दोनों के लिए फायदेमंद है?
यह गेहूं छोटी और बड़ी दोनों तरह की जमीन पर आसानी से उगाया जा सकता है. यही वजह है कि यह किस्म हर वर्ग के किसानों के लिए उपयोगी मानी जा रही है. खासकर उन इलाकों में जहां मौसम अनिश्चित रहता है, वहां यह किस्म ज्यादा भरोसेमंद साबित हो सकती है.
चारे और बीमारी की समस्या कैसे करता है दूर?
राजस्थान जैसे राज्यों में चारे की समस्या आम है, लेकिन यह गेहूं उस समस्या को भी कम करता है. इसकी फसल से पर्याप्त चारा मिलता है और इसमें बीमारियों का खतरा भी कम बताया गया है, जिससे खेती का खर्च घटता है और लाभ बढ़ता है.
पोषण के मामले में कितना खास है ‘अजय राज’?
यह गेहूं सिर्फ उत्पादन ही नहीं बल्कि पोषण में भी काफी समृद्ध है. इसमें लगभग 11.06 ग्राम प्रोटीन, 3.92 फाइबर, आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए, पोटैशियम और अन्य पोषक तत्व मौजूद हैं. यही वजह है कि इसे “सुपर फूड गेहूं” भी कहा जा रहा है.
क्या हर राज्य और जलवायु में उग सकता है यह गेहूं?
किसान का दावा है कि यह किस्म देश के किसी भी राज्य और हर तरह की जलवायु में उगाई जा सकती है. चाहे मैदानी इलाका हो या अर्ध-शुष्क क्षेत्र, यह गेहूं मजबूती से खड़ा रहता है और अच्छा उत्पादन देता है.
क्या इस किस्म पर किसान का अधिकार सुरक्षित है?
Protection of Plant Varieties and Farmers' Rights Authority में इस गेहूं के लिए आवेदन किया गया है, जिससे इस किस्म पर किसान का अधिकार सुरक्षित रहेगा और कोई अन्य व्यक्ति इसका दावा नहीं कर पाएगा.
क्यों कहा जा रहा है ‘गेहूं का बाप’?
उच्च उत्पादन, मजबूत संरचना, पोषण और ज्यादा मुनाफे के कारण ‘अजय राज’ गेहूं को पारंपरिक किस्मों से बेहतर माना जा रहा है. यही वजह है कि किसान इसे आम भाषा में “गेहूं का बाप” कह रहे हैं.
कितनी है इस गेहूं की ऊंचाई और खासियत?
इस गेहूं की लंबाई करीब 6.5 से 7 फीट तक पहुंच जाती है, जो इसे अन्य किस्मों से अलग बनाती है. लंबी और मजबूत डंठल इसकी पहचान है, जो इसे मौसम के असर से बचाती है. ‘अजय राज’ गेहूं सिर्फ एक नई फसल नहीं, बल्कि खेती में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. 9 साल की मेहनत से तैयार यह किस्म किसानों के लिए ज्यादा उत्पादन, कम जोखिम और बेहतर मुनाफे का रास्ता खोल सकती है. आने वाले समय में यह देशभर के किसानों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है.




