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कैसे लश्कर-ए-तैयबा का 'खरगोश' आतंकी हुआ बेनकाब? फर्जी वोटर आईडी और आधार कार्ड बनाकर छुपा था जयपुर में

जयपुर में लश्कर के आतंकी नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है, जहां पाकिस्तानी आतंकी ‘खरगोश’ सालभर फर्जी पहचान से रहा. फर्जी दस्तावेजों के जरिए पासपोर्ट बनवाकर वह खाड़ी देशों में फरार हो गया, अब ATS जांच तेज है.

कैसे लश्कर-ए-तैयबा का खरगोश आतंकी हुआ बेनकाब? फर्जी वोटर आईडी और आधार कार्ड बनाकर छुपा था जयपुर में
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( Image Source:  X: @ocjain4 )

हाल ही में सुरक्षा एजेंसियों ने श्रीनगर में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक बहुत ही खतरनाक आतंकी नेटवर्क उजागर किया है. इस नेटवर्क की जड़ें राजस्थान की राजधानी जयपुर से काफी मजबूती से जुड़ी हुई पाई गई हैं. इस पूरे मामले में सबसे चर्चित नाम है उमर हासिम उर्फ 'खरगोश'. यह व्यक्ति पाकिस्तान का आतंकी है और लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद तथा अबु हुरैरा का करीबी माना जाता है. चौंकाने वाली बात यह है कि उमर हासिम जयपुर में लगभग एक साल तक (2023 से 2025 तक) अपनी असली पहचान छिपाकर रहता रहा. इस दौरान उसने न सिर्फ फर्जी सरकारी दस्तावेज बनवाए, बल्कि जयपुर के पते पर पासपोर्ट भी बनवा लिया. बाद में वह इंडोनेशिया के रास्ते खाड़ी देशों में भाग निकलने में सफल हो गया.

पाकिस्तान से तीन राज्यों तक का सफर

जांच के अनुसार, उमर हासिम 2012 में पाकिस्तान से घुसपैठ करके जम्मू-कश्मीर पहुंचा था. वहां उसने लश्कर-ए-तैयबा का संगठन मजबूत किया. इसके बाद वह हरियाणा के नूह इलाके गया और फिर वहीं से राजस्थान की राजधानी जयपुर पहुंचा. जयपुर में वह जय सिंह पूरा खोर इलाके में रहता था. इस पूरे समय में उसने स्थानीय लोगों की मदद से शहर की रेकी (जासूसी) की और फर्जी दस्तावेजों का एक बड़ा जाल भी बुन लिया.

फर्जी नाम से मतदाता बना

जांच में पता चला कि आतंकी ने सज्जाद अहमद नाम से फर्जी वोटर आईडी और आधार कार्ड बनवा लिया था. इसमें उसकी जन्म तिथि 1995 बताई गई थी. पिता का नाम मोहम्मद अब्दुल्ला लिखवाया गया था. यह दस्तावेज जयपुर के राशिद विहार कॉलोनी, सड़वा मानपुर, आमेर, जय सिंह पुरा खोर के पते पर बनाया गया था. इस इलाके का आना-जाना हवामहल विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है। इस तरह वह जयपुर में हवामहल का मतदाता भी बन गया.

फर्जी किरायानामा और शादी के दस्तावेजों का इस्तेमाल

जयपुर में रहने के लिए उसने फर्जी किरायानामा (रेंट एग्रीमेंट) भी तैयार करवाया था. सूत्रों के मुताबिक, उसने श्रीनगर में एक युवती से निकाह कर लिया था. उसी शादी के दस्तावेजों का इस्तेमाल करके उसने राजस्थान में अपनी पहचान मजबूत की और पासपोर्ट बनवाया. इन सभी फर्जी कागजातों के आधार पर वह सफलतापूर्वक पासपोर्ट हासिल करने में कामयाब रहा और फिर खाड़ी देश भाग गया.

अब छानबीन तेज

'खरगोश' के फरार होने के बाद राजस्थान पुलिस और ATS (एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) की टीमें उसके जयपुर के हर संभावित ठिकाने को अच्छी तरह से खंगाल रही हैं. एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि एक पाकिस्तानी आतंकी राजधानी के संवेदनशील इलाके में पूरे एक साल तक कैसे रह गया और स्थानीय खुफिया तंत्र (Local Intelligence) को इसकी भनक तक नहीं लगी। सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि स्थानीय लोगों ने उसे फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट बनवाने में मदद की थी. अब एजेंसियां उन सभी लोगों की तलाश कर रही हैं जिन्होंने इस आतंकी को सहयोग दिया.

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