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कौन थे पायलट स्वराजदीप सिंह? आखिरी कॉल से अंतिम संस्कार तक पूरी कहानी

Jharkhand Air Ambulance Crash : झारखंड एयर एंबुलेंस हादसे में पायलट स्वराजदीप सिंह की मौत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया. आखिरी कॉल से लेकर अंतिम संस्कार तक, यह कहानी एक अधूरे सपने और इंतजार की है.

Jharkhand Air Ambulance Crash  swarajdeep singh
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झारखंड में हुए दुखद एयर एम्बुलेंस क्रैश के बाद कैप्टन स्वराज सिंह की मौत के बाद आज उनका अंतिम संस्कार गृह नगर अमृतसर में किया गया. स्वराज सिंह के अंतिम संस्कार के समय परिवार और स्थानीय लोग काफी संख्या में शामिल हुए. उनके पिता ने डबडबाई आंखों से कहा, “हमारी कोई मांग नहीं है; हमारा बेटा चला गया.”

झारखंड में हुए दर्दनाक एयर एंबुलेंस हादसे ने एक पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी. अमृतसर के रहने वाले 31 वर्षीय पायलट स्वराजदीप सिंह उन 7 लोगों में शामिल थे, जिनकी इस हादसे में मौत हो गई. आइए जानते हैं उनकी जिंदगी, परिवार और उस आखिरी पल की पूरी कहानी.

कौन थे स्वराजदीप सिंह?

स्वराजदीप सिंह पंजाब के अमृतसर के सुल्तानविंड रोड स्थित गोबिंद नगर इलाके के रहने वाले थे. वे एक एयर एंबुलेंस कंपनी में पायलट (को-पायलट) के तौर पर काम कर रहे थे और करीब ७-8 महीने पहले ही इस नौकरी से जुड़े थे.

बचपन से ही उनका सपना पायलट बनने का था. लाइसेंस मिलने के बाद शुरुआती दौर में उन्हें संघर्ष करना पड़ा. यहां तक कि उन्होंने ट्यूशन पढ़ाकर भी समय बिताया, लेकिन मेहनत रंग लाई और आखिरकार उन्हें मेडिकल एविएशन सेक्टर में नौकरी मिल गई.

हादसा कब और कैसे हुआ?

यह हादसा सोमवार, 23 फरवरी 2026 की शाम को हुआ. एयर एंबुलेंस रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भर रही थी. टेकऑफ के कुछ देर बाद ही विमान से संपर्क टूट गया. शाम करीब 7:20 बजे क्रैश की खबर सामने आई कि हादसा झारखंड के चतरा इलाके के पास हुआ.

उड़ान से पहले आखिरी कॉल में क्या कहा?

हादसे से ठीक पहले स्वराजदीप सिंह ने अपनी मां को फोन किया था.

उन्होंने बताया कि वह रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भर रहे हैं और लैंडिंग के बाद फिर कॉल करेंगे. यह उनकी रोज की आदत थी. हर उड़ान से पहले और बाद में परिवार को कॉल करना, लेकिन इस बार वह कॉल कभी नहीं आया. जब फोन बंद मिला और टीवी पर क्रैश की खबर चली, तब परिवार को सच्चाई का पता चला.

स्वराजदीप सिंह की शादी कब हुई थी?

स्वराजदीप सिंह की शादी करीब 2 साल पहले हुई थी. कुछ रिपोर्ट्स में यह अवधि 2–3 साल के बीच बताई गई है, लेकिन औसतन माना जाता है कि उनकी शादी हाल के वर्षों में ही हुई थी. उनकी पत्नी गृहिणी हैं. उनका एक करीब 4 महीने का बेटा है. हादसे से कुछ दिन पहले ही स्वराजदीप छुट्टी पर घर आए थे और परिवार के साथ समय बिताया था.

परिवार में कौन-कौन हैं?

स्वराजदीप सिंह अपने पीछे एक बड़ा परिवार छोड़ गए हैं. माता-पिता, पत्नी और 4 महीने का बेटा है. उनके पिता अमरीक सिंह इस सदमे में बार-बार सिर्फ एक ही बात दोहरा रहे हैं कि, “उसने कहा था, लैंडिंग के बाद कॉल करूंगा...”

कितना था उड़ान का अनुभव?

स्वराजदीप के पास 300 घंटे से ज्यादा फ्लाइंग अनुभव था. वे एक जिम्मेदार और होनहार पायलट माने जाते थे. हाल ही में उन्होंने मेडिकल एविएशन में करियर शुरू किया था.

परिवार और इलाके में क्या माहौल है?

  • हादसे की खबर मिलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. रिश्तेदार, दोस्त और पड़ोसी परिवार के घर पर जुटे हुए हैं. उनका पार्थिव शरीर अमृतसर लाया गया, जहां पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया.
  • स्वराजदीप सिंह की कहानी सिर्फ एक हादसे की खबर नहीं, बल्कि एक ऐसे युवा की अधूरी उड़ान है जिसने संघर्ष करके अपना सपना पूरा किया था.
  • एक नियमित फोन कॉल का इंतजार अब हमेशा के लिए खत्म हो गयाऔर पीछे रह गया है एक परिवार, जो उस आखिरी “लैंडिंग के बाद कॉल करूंगा” को कभी नहीं भूल पाएगा.
पंजाब न्‍यूज
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