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तीन बार MLA, कई बार मंत्री- कौन हैं बैद्यनाथ राम, जिन्हें JMM ने बनाया राज्यसभा उम्मीदवार? 7 Points में जानिए

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने राज्यसभा की खाली हुई सीट के लिए बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है. तीन बार विधायक और पूर्व मंत्री रह चुके बैद्यनाथ राम को मैदान में उतारकर हेमंत सोरेन ने दलित प्रतिनिधित्व और पलामू क्षेत्र को बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है.

JMM Rajya Sabha candidate Baidyanath Ram
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JMM के राज्यसभा उम्मीदवार Baidyanath Ram

( Image Source:  @Journo_vivek )

Baidyanath Ram Profile: झारखंड की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने राज्यसभा की उस सीट के लिए अपने वरिष्ठ नेता बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जो पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई थी. इस फैसले को सिर्फ एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैद्यनाथ राम के नाम का ऐलान करते हुए कहा कि वह लंबे समय से पार्टी और जनता के बीच सक्रिय रहे हैं तथा राज्यसभा में झारखंड के मुद्दों को मजबूती से उठाने की क्षमता रखते हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले के जरिए JMM ने दलित समाज और पलामू प्रमंडल को बड़ा संदेश देने की कोशिश की है.

कौन हैं बैद्यनाथ राम? 7 पॉइंट्स में जानिए

1- बैद्यनाथ राम झारखंड की राजनीति का एक जाना-पहचाना नाम है. वह लंबे समय से झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े हुए हैं और फिलहाल पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. संगठन और जमीन दोनों स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है.

2- बैद्यनाथ राम लातेहार विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं. उन्होंने क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर लगातार काम किया है. यही वजह है कि उन्हें जमीनी नेता के तौर पर पहचान मिली.

3- विधायक रहने के अलावा बैद्यनाथ राम राज्य सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं. प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए पार्टी नेतृत्व उन पर लगातार भरोसा जताता रहा है.

4- बैद्यनाथ राम अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं और झारखंड की राजनीति में दलित समाज के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं. राज्यसभा के लिए उनकी उम्मीदवारी को सामाजिक प्रतिनिधित्व के नजरिए से भी अहम माना जा रहा है.

5- शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन और JMM की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा रहे हैं. उनकी खाली हुई सीट पर किसी नेता को भेजना पार्टी के लिए आसान फैसला नहीं था. ऐसे में बैद्यनाथ राम का चयन यह संकेत देता है कि पार्टी अनुभवी और संगठन के प्रति समर्पित नेताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है.

6- राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले के जरिए हेमंत सोरेन ने एक साथ कई राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की है. दलित वोट बैंक, पलामू क्षेत्र और संगठन के पुराने नेताओं को महत्व देने का संदेश इस फैसले में साफ दिखाई देता है.

7- यदि बैद्यनाथ राम राज्यसभा पहुंचते हैं तो उनसे झारखंड से जुड़े आदिवासी, दलित, ग्रामीण विकास, रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की उम्मीद की जा रही है. पार्टी नेतृत्व भी मानता है कि उनका अनुभव संसद में झारखंड की आवाज को मजबूत करेगा.



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