सच बताना बन गया जुर्म! कांती देवी की आपबीती ने अंश-अंशिका की वापसी पर उठाए सवाल
रांची के अंश-अंशिका के सही सलामत मिलने की खबर से जहां बस्ती में जश्न का माहौल है, वहीं उसी मोहल्ले में रहने वाली दुकानदार कांती देवी की आंखें आज भी नम हैं. बच्चों के मिलने की खुशी के बीच कांती देवी अपने साथ बीते 13 दिनों की बेइज्जती और कथित प्रताड़ना को याद कर टूटती नजर आती हैं. कांती देवी का कहना है कि उन्होंने सिर्फ अपना फर्ज निभाया था बच्चे को देखा और प्रशासन को सूचना दी, लेकिन इसके बदले उन्हें ऐसी सजा मिली, जिसे वे जीवन भर नहीं भूल पाएंगी.
रांची के अंश-अंशिका के सही सलामत मिलने की खबर से जहां बस्ती में जश्न का माहौल है, वहीं उसी मोहल्ले में रहने वाली दुकानदार कांती देवी की आंखें आज भी नम हैं. बच्चों के मिलने की खुशी के बीच कांती देवी अपने साथ बीते 13 दिनों की बेइज्जती और कथित प्रताड़ना को याद कर टूटती नजर आती हैं.
कांती देवी का कहना है कि उन्होंने सिर्फ अपना फर्ज निभाया था बच्चे को देखा और प्रशासन को सूचना दी, लेकिन इसके बदले उन्हें ऐसी सजा मिली, जिसे वे जीवन भर नहीं भूल पाएंगी. उनका एक ही सवाल है “हमारी क्या गलती थी?”
'फर्ज निभाया, बदले में मिली सजा'
कांती देवी बताती हैं कि उन्होंने बच्चे को देखकर तुरंत जानकारी दी थी कि बच्चे यहां आए थे. उनका दावा है कि इसी सच का साथ देने की कीमत उन्हें भारी पड़ी. पुलिस कार्रवाई शुरू हुई और उनका परिवार जांच के घेरे में आ गया, जबकि उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी.
कांती देवी की दर्दनाक आपबीती
बीती घटना को याद करते हुए कांती देवी कहती हैं कि पुलिस ने उनकी बहू को महिला थाने ले जाकर बैठा दिया, जबकि उनके बेटे के साथ कथित तौर पर बेरहमी से मारपीट की गई. घर की तलाशी ली गई और कुत्ता तक घुमाया गया. उनके मुताबिक 12 दिनों तक दिन-रात पुलिस दरवाजा खटखटाती रही, जिससे पूरा परिवार दहशत में रहा और नींद तक नसीब नहीं हुई.
'बस्ती में निकलना मुश्किल'
कांती देवी का दर्द छलक पड़ता है जब वह बताती हैं कि उनके साथ जो हुआ, वह किसी के साथ नहीं होना चाहिए. उनका कहना है कि उनकी बहू ने बच्चे को सिर्फ चॉकलेट दी थी, पैसे लौटा दिए थे और उसे वापस भेज दिया था. इसके बावजूद उन्हें थाने बुलाकर पूछताछ और कथित प्रताड़ना झेलनी पड़ी. बच्चे के गायब होने के बाद लोग दुकान के बाहर खड़े होकर उसके जल्द मिलने की प्रार्थना कर रहे थे और सभी उसकी सलामती को लेकर चिंतित थे.
कांती देवी कहती हैं कि वे अंश-अंशिका की मां की पीड़ा को समझती हैं, लेकिन वे खुद भी एक मां हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि उनका बेटा बिना किसी गुनाह के अंदर गया “क्या हमें तकलीफ नहीं होती?” उनका कहना है कि सच का साथ देने की कीमत उन्हें बहुत महंगी पड़ी.





