मांझी–मुंडा–पाहन को मान्यता, ग्रामसभा बनेगी असली सत्ता केंद्र... झारखंड में लागू हुआ PESA Act 2025, जानें खास बातें
झारखंड सरकार ने 2 जनवरी 2026 को पेसा नियमावली 2025 अधिसूचित कर दी है. इसके तहत अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभाओं को जल, जंगल, जमीन, खनन, बाजार, विकास योजनाओं और विवाद निपटारे पर निर्णायक अधिकार मिले हैं. परंपरागत आदिवासी नेतृत्व को मान्यता दी गई है और पुलिस को भी ग्रामसभा के प्रति जवाबदेह बनाया गया है.
PESA Act 2025 notification has been issued : आदिवासी स्वशासन को मजबूत करने की दिशा में झारखंड की सरकार ने बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है. पंचायती राज विभाग ने 2 जनवरी 2026 को पेसा नियमावली 2025 से जुड़ी अधिसूचना जारी कर दी है. इसके लागू होते ही अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभाओं को जल, जंगल और जमीन से जुड़े निर्णायक अधिकार मिल गए हैं.
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इस अधिसूचना के बाद अब न केवल विकास योजनाओं की मंजूरी बल्कि भू-अर्जन, खनन, वन उपज, बाजार प्रबंधन और सामाजिक विवादों पर भी ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य हो गई है. साथ ही 15वें वित्त आयोग की अनुशंसित राशि अब सामान्य प्रक्रिया के तहत सीधे अनुसूचित क्षेत्रों को मिल सकेगी.
17 अध्यायों में बंटी पेसा नियमावली: क्या है पूरा ढांचा?
अधिसूचित पेसा नियमावली 2025 को कुल 17 अध्यायों में विभाजित किया गया है. पहला अध्याय नियमावली में प्रयुक्त शब्दों की परिभाषा तय करता है. दूसरा अध्याय पारंपरिक ग्रामसभा और उनकी सीमाओं के प्रकाशन की प्रक्रिया बताता है. तीसरा अध्याय ग्रामसभा की बैठक, कोरम और निर्णय प्रक्रिया से जुड़े नियमों को स्पष्ट करता है.
परंपरागत नेतृत्व को मान्यता: मांझी–मुंडा–पाहन होंगे ग्रामसभा अध्यक्ष
चौथे अध्याय में ग्रामसभा अध्यक्ष और सहायक सचिव के दायित्व तय किए गए हैं. इसमें प्रावधान है कि मांझी, मुंडा, पाहन जैसे पारंपरिक पदाधिकारियों को ग्रामसभा अध्यक्ष चुना या मनोनीत किया जा सकता है. पांचवें अध्याय में बैठकों के संचालन और फैसले लेने के नियम हैं, जबकि छठे अध्याय में ग्रामसभा कोष के गठन, संचालन और उपयोग का पूरा ढांचा तय किया गया है.
पुलिस भी होगी जवाबदेह, गिरफ्तारी की सूचना ग्रामसभा को देनी होगी
सातवें अध्याय में सामुदायिक संसाधनों के प्रबंधन, आठवें अध्याय में परंपराओं के संरक्षण और विवाद निपटारे की व्यवस्था दी गई है. यदि कोई नियम ग्रामसभा की परंपराओं से मेल नहीं खाता, तो ग्रामसभा प्रस्ताव पारित कर उपायुक्त को भेजेगी. उपायुक्त इसे राज्य सरकार तक पहुंचाएंगे. सरकार 30 दिनों में उच्च स्तरीय समिति बनाएगी, जो 90 दिनों में निर्णय देगी. इसी अध्याय में बड़ा प्रावधान यह भी है कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के सात दिनों के भीतर पुलिस को ग्रामसभा को सूचना देना अनिवार्य होगा.
विकास, जमीन और खनन पर अंतिम मुहर ग्रामसभा की
नौवें अध्याय में विकास योजनाओं की स्वीकृति, लाभुकों की पहचान और सामाजिक संस्थाओं पर नियंत्रण का अधिकार ग्रामसभा को मिला है. दसवें अध्याय में स्पष्ट किया गया है कि भू-अर्जन ग्रामसभा की सहमति के बिना नहीं हो सकेगा. शराब, खनिज, वन उपज और बाजार भी ग्रामसभा के अधीन होगा.
अन्य अध्याय
- 11वां अध्याय: लघु जल निकाय
- 12वां अध्याय: लघु खनिज
- 13वां अध्याय: मादक द्रव्यों का नियंत्रण (पारंपरिक रूप से हड़िया, महुआ, इली, बोडें और डियंग जैसी पेय सामग्री के निर्माण और उपयोग को सशर्त अनुमति दी गई है)
- 14वां अध्याय: लघु वन उपज
- 15वां अध्याय: अवैध रूप से हस्तांतरित जमीन की वापसी
- 16वां अध्याय: बाजार प्रबंधन
- 17वां अध्याय: अपराध नियंत्रण
क्या बदलेगा ज़मीनी हकीकत में?
पेसा नियमावली लागू होने के बाद अब अनुसूचित क्षेत्रों में निर्णय की असली ताकत ग्रामसभा के हाथों में होगी. इससे जल–जंगल–जमीन पर आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार और मजबूत होंगे और बाहरी हस्तक्षेप पर लगाम लगेगी.





