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गांव में धर्म परिवर्तन पर हुक्‍का-पानी बंद, पुलिस को देना पड़ा दखल; क्रिश्‍चन बने 4 परिवारों को पीने का पानी मिलना भी हो गया था मुश्किल

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के एक गांव में धर्म परिवर्तन को लेकर चार परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया. पीने के पानी तक पर रोक के बाद पुलिस और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा.

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( Image Source:  Sora AI )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह

Published on: 2 Feb 2026 8:46 AM

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर प्रखंड स्थित हल्दी पोखर गांव में धर्म परिवर्तन को लेकर गंभीर सामाजिक तनाव देखने को मिला है. गांव में ईसाई धर्म अपनाने वाले चार परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया. इन परिवारों को न सिर्फ गांव के तालाब, कुएं और हैंडपंप से पानी लेने से रोका गया, बल्कि जंगल से लकड़ी और पत्ते बीनने तक पर पाबंदी लगा दी गई.

इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मामला सामने आने के बाद पुलिस और राजस्व अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा. अधिकारियों के अनुसार, शनिवार को सूचना मिलने के बाद पुलिस प्रशासन ने गांव में पहुंचकर दोनों पक्षों के साथ बैठक की और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी.

पानी, दुकान और जंगल तक पर रोक

प्रभावित परिवारों का आरोप है कि गांव के लोगों ने उन्हें तालाब, कुएं और हैंडपंप का इस्तेमाल करने से रोका. इसके अलावा गांव की दुकानों से सामान लेने पर रोक लगा दी गई. यही नहीं, जंगल से ईंधन लकड़ी और पत्ते इकट्ठा करने भी नहीं दिया. इन प्रतिबंधों के चलते परिवारों के सामने पीने के पानी और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हो गया.

सरना धर्म के ग्रामीणों का तर्क

गांव के सरना धर्म को मानने वाले लोगों का कहना है कि यह फैसला उन्होंने अपने धर्म, संस्कृति और पारंपरिक विश्वासों की रक्षा के लिए लिया. उनका दावा है कि लगातार हो रहे धर्म परिवर्तन से उनके वन देवता की मान्यता पर असर पड़ेगा, सामाजिक ढांचा कमजोर होगा और पारंपरिक जीवनशैली टूट जाएगी. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पहले तीन परिवारों ने ईसाई धर्म अपनाया था, लेकिन विवाद तब बढ़ा जब हाल ही में एक चौथे परिवार के अन्य सदस्यों ने भी धर्म परिवर्तन कर लिया.

पुलिस की सख्त चेतावनी

कुमारडुंगी थाना प्रभारी रंजीत उरांव ने बताया कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी खुद गांव पहुंचे और बैठक की. उन्होंने कहा, “पूरे गांव को बुलाया गया, जिसमें गांव का मुंडा (मुखिया) भी मौजूद था. सर्किल ऑफिसर भी आए थे. सभी को साफ बताया गया कि सामाजिक बहिष्कार एक दंडनीय अपराध है.”

उन्होंने आगे कहा कि दोबारा ऐसा होने पर एफआईआर दर्ज की जाएगी. “मुंडा पूरे गांव का प्रतिनिधि होता है, किसी एक समुदाय का नहीं. हम संविधान के अनुसार काम करते हैं, किसी समूह के दबाव में नहीं.”

दूर-दराज का इलाका, नेटवर्क भी नहीं

थाना प्रभारी के अनुसार यह इलाका बेहद दूरस्थ है, जहां मोबाइल नेटवर्क भी ठीक से काम नहीं करता. इसी वजह से पुलिस ने दोनों पक्षों को चेताया कि वे किसी भी विवाद को खुद सुलझाने की कोशिश न करें और तुरंत प्रशासन को सूचना दें. सर्किल ऑफिसर मुक्ता सोरेन ने कहा कि “धर्म के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव गैरकानूनी और असंवैधानिक है.” उन्होंने बताया कि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है.

अलग कुएं से पानी लेने की अनुमति

हालांकि गांववालों का दावा है कि बैठक के बाद यह तय हुआ कि धर्म परिवर्तन करने वाले परिवार गांव की मुख्य सार्वजनिक सुविधाओं का उपयोग नहीं करेंगे. उन्हें अपने घरों के सामने स्थित एक अलग कुएं से पानी लेने की अनुमति दी गई है.

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