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कौन हैं दीपेंद्र हुड्डा जो कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बीच लूट ले गए महफिल, अब तक ऐसा रहा सियासी सफर

दीपेंद्र हुड्डा कौन हैं? जानिए उनका राजनीतिक सफर, रोहतक से संसद तक का सफर, हालिया प्रदर्शन में चर्चा और क्या वे हरियाणा के CM चेहरा बन सकते हैं.

Deependra Hooda Haryana politics Congress leader Rohtak MP
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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं को हाल ही में कॉकरोच कहा था. हालांकि, उनका मंतव्य अलग था, उन्होंने अपने बयान को लेकर सफाई भी दी थी, लेकिन इसको लेकर अब 'कॉकरोच जनता पार्टी' का गठन हो चुका है. वो भी ऐसी पार्टी जिसके फॉलोअर्स 48 घंटे के अंदर 2 करोड़ से ज्यादा हो गए. इस घटना ने कॉकरोच के मसले पर दुनिया भर में जेन जैड आंदोलन को नया मोड़ दे दिया. शनिवार को दिल्ली उसी कॉकरोच जनता पार्टी पहला प्रदर्शन किया.

हालांकि, सीजेपी का प्रदर्शन ज्यादा असरकारी नहीं रहा, लेकिन इसने सुर्खियां खूब बटोरी. लेकिन इस दौरान सबसे ज्यादा कोई हिट हुआ तो वो है, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और हरियाणा के सबसे चर्चित सियासी चेहरा दीपेंद्र हुड्डा, जो अपने जुझारू प्रदर्शन के दम पर कए बार फिर सुर्खियों में हैं.

दीपेंद्र सिंह हुड्डा शनिवार को कुरुक्षेत्र में सीजेपी के एक विरोध प्रदर्शन के दौरानअपनी सधी हुई राजनीतिक मौजूदगी और भाषण शैली से माहौल को अपने पक्ष में मोड़ लिया. यही वजह है कि राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है. क्या यह नेता भविष्य में हरियाणा का मुख्यमंत्री चेहरा बन सकता है या केंद्र में मंत्री पद तक पहुंचेगा?

दरअसल, अब इसकी चर्चा इसलिए है कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष निशित कटारिया की अगुवाई में आज कुरुक्षेत्र में यूथ कांग्रेस के द्वारा मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए सैकड़ो की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता पहुंचे हैं. इस प्रदर्शन में विशेष तौर पर यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदयभान चिब, कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा, थानेसर विधायक अशोक अरोड़ा, शाहाबाद से कांग्रेस के विधायक सहित कांग्रेस के कई बड़े नेता इसमें शामिल होने के लिए पहुंचे, जो केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.

कुरुक्षेत्र में प्रदर्शन के दौरान कुरुक्षेत्र पुलिस के द्वारा मुख्यमंत्री आवास से पहले बैरिकेडिंग कर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोका गया, जब वे बैरिकेडिंग को क्रॉस करने निकले तो उनके ऊपर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया.

क्या बोले दीपेंद्र हुड्डा?

हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के बेटे व सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि हमारा प्रदर्शन तभी खत्म होगा जब हम सबकी सामूहिक रूप से गिरफ्तारी होगी. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार में लगातार पेपर लीक के मामले सामने आ रहे हैं जिसको लेकर युवाओं में रोष है. इसी के चलते बड़ी संख्या में आज यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता यहां पर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए पहुंचे हैं ताकि हरियाणा के युवाओं की आवाज मुख्यमंत्री तक पहुंच सके और देश के प्रधानमंत्री तक पहुंच सके. वहीं कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट के ऊपर उन्होंने कहा कि अच्छी बात है कि वो भी प्रोटेस्ट कर रहे हैं, उनको जंतर-मंतर की अनुमति मिल गई है, हमें नहीं मिलती.

राजनीतिक विरासत से निकले नेता

दीपेंद्र हुड्डा का राजनीतिक सफर किसी आम नेता जैसा नहीं रहा. वह हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के बेटे हैं. लेकिन उन्होंने अपनी पहचान सिर्फ “राजनीतिक परिवार” तक सीमित नहीं रखी. शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने अमेरिका से उच्च शिक्षा हासिल की और राजनीति में एक प्रोफेशनल और मॉडर्न अप्रोच के साथ एंट्री की.

चुनावी राजनीति में तेज शुरुआत

दीपेंद्र हुड्डा ने मात्र 29 वर्ष की उम्र में 2005 में रोहतक लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया था. वह उस समय 14वीं लोकसभा के सबसे युवा सांसदों में से एक बने. इसके बाद उन्होंने लगातार रोहतक क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की.

2009 और 2014 में भी उन्होंने लोकसभा में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई. हालांकि 2019 का चुनाव उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा और उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद हरियाणा की राजनीति में उनकी प्रासंगिकता कम नहीं हुई.

राज्यसभा और राष्ट्रीय राजनीति में वापसी

2019 के बाद कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेजकर राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रखा. राज्यसभा में उन्होंने बेरोजगारी, किसानों की समस्या, और युवाओं के मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया. उनकी स्पीच शैली को अक्सर “डेटा-ड्रिवन और शांत लेकिन प्रभावी” माना जाता है.

2024 लोकसभा चुनाव में वे फिर से रोहतक से मैदान में उतरे और एक बार फिर संसद पहुंचे, जिससे यह साबित हुआ कि उनका जनाधार अभी भी मजबूत है.

संगठन और जमीनी पकड़

दीपेंद्र हुड्डा को हरियाणा कांग्रेस के उन नेताओं में गिना जाता है जिनकी संगठनात्मक पकड़ मजबूत है. वह युवा मतदाताओं, जाट बेल्ट और शहरी-ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में संतुलित अपील रखते हैं. पार्टी के भीतर उन्हें एक “न्यू जेनरेशन लीडर” के रूप में देखा जाता है.

हालिया चर्चा और राजनीतिक इमेज

हालिया प्रदर्शन और विपक्षी एकता के मंचों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें फिर से राष्ट्रीय मीडिया में प्रमुखता दिलाई है. वे अक्सर सरकार की नीतियों पर तीखे लेकिन तथ्यात्मक हमले करते हैं. उनकी यही शैली उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है.

क्या भविष्य में CM या मंत्री?

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या दीपेंद्र हुड्डा भविष्य में हरियाणा के मुख्यमंत्री बन सकते हैं या केंद्र में मंत्री पद तक पहुंचेंगे? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके पास युवा नेतृत्व की छवि है, जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ है और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बढ़ी है. लेकिन उनके सामने चुनौतियां भी हैं कम नहीं हैं. हरियाणा कांग्रेस में नेतृत्व की प्रतिस्पर्धा, राज्य में जातीय और राजनीतिक समीकरण व बीजेपी का मजबूत संगठनात्मक ढांचा है. फिर भी यह तय है कि कांग्रेस में उन्हें “लंबी रेस का घोड़ा” माना जाता है.

दीपेंद्र हुड्डा आज उस मोड़ पर हैं, जहां उनकी राजनीति सिर्फ रोहतक या हरियाणा तक सीमित नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर आकार ले रही है. आने वाले वर्षों में वे कांग्रेस के बड़े चेहरों में शामिल होंगे या नहीं. यह चुनावी नतीजे और पार्टी रणनीति तय करेगी. लेकिन इतना तय है कि वे अब भारतीय राजनीति के उन नेताओं में हैं जिन पर हर बड़ी बहस के दौरान नजर जरूर जाती है.

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