Janjgir Champa News: नशे में बारात लेकर पहुंचा दूल्हा, दुल्हन ने शादी से किया इनकार; अब बनी नशा विरोधी अभियान का चेहरा
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा की 22 वर्षीय मुस्कान प्रधान ने अपनी शादी के दिन नशे में आए दूल्हे से शादी करने से इनकार कर दिया. उनके इस फैसले को जिला प्रशासन ने सम्मान दिया और उन्हें एंटी-ड्रग अभियान का यूथ आइकन बनाया. मुस्कान ने कहा कि उन्होंने अपनी मां की जिंदगी में शराब की वजह से आई परेशानियां देखी हैं, इसलिए वह वही हालात दोहराना नहीं चाहती थीं.
मुस्कान ने शादी रोकी, प्रशासन ने किया सम्मानित
Janjgir Champa news: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले की 22 वर्षीय मुस्कान प्रधान की कहानी इन दिनों चर्चा में है. शादी के कुछ मिनट पहले उन्होंने ऐसा फैसला लिया जिसने न सिर्फ उनकी जिंदगी बदल दी, बल्कि समाज में एक बड़ा संदेश भी दिया. 23 जून को कोसमंदा गांव में मुस्कान की शादी होनी थी. घर में शादी की तैयारियां पूरी थीं और बारात पहुंच चुकी थी, लेकिन जब दूल्हा मंडप तक पहुंचा तो मुस्कान ने देखा कि वह नशे में था और ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था.
दूल्हे की हालत देखकर मुस्कान ने शादी रोकने का फैसला किया. उसने अपनी दुल्हन की पोशाक और घूंघट में ही परिवार वालों से कहा कि अगर वह अपनी शादी के दिन खुद को संभाल नहीं सकता तो आगे जिंदगी कैसे संभालेगा. इसके बाद मुस्कान ने शादी करने से साफ इनकार कर दिया और बारात वापस भेजने की बात कही.
आखिरकार बारात बिना दुल्हन के लौट गई
दूल्हे पक्ष की तरफ से विरोध हुआ और मामला तनावपूर्ण हो गया, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा. लेकिन मुस्कान अपने फैसले पर कायम रहीं. आखिरकार बिना दुल्हन के बारात वापस लौट गई.
48 घंटे में बदली मुस्कान की जिंदगी
- शादी टूटने के बाद मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. मुस्कान के फैसले की चर्चा पूरे जिले में होने लगी.
- जांजगीर-चांपा जिला प्रशासन और पुलिस ने मुस्कान को सम्मानित किया.
- मुस्कान को पुलिस के एंटी-ड्रग अभियान का यूथ आइकन बनाया गया और काउंसलर की जिम्मेदारी दी गई.
- मुस्कान को अब हर महीने 5 हजार रुपये का मानदेय भी दिया जाएगा.
- इसके अलावा पुलिस ने उनकी आगे की पढ़ाई में मदद करने का भी ऐलान किया है.
मुस्कान ने क्यों लिया इतना बड़ा फैसला?
- मुस्कान ने बताया कि उन्होंने अपने परिवार में शराब की वजह से होने वाली परेशानियां करीब से देखी हैं. उनके पिता शराब के आदी थे और उनकी मृत्यु के बाद उनकी मां ने काफी संघर्ष करके परिवार संभाला.
- आर्थिक मुश्किलों के कारण मुस्कान को पढ़ाई छोड़कर सिलाई का काम भी करना पड़ा.
- मुस्कान ने कहा कि वह अपनी मां जैसी जिंदगी नहीं जीना चाहती थीं और शादी से पहले ही उन्हें खतरे के संकेत दिखाई दे गए थे.
पुलिस और प्रशासन ने क्या कहा?
- जांजगीर-चांपा के एसपी विजय पांडे ने मुस्कान के फैसले को साहसिक बताया. उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपनी जिंदगी से जुड़े फैसले लेने का अधिकार है और उन्हें गलत परिस्थितियों में समझौता नहीं करना चाहिए.
- कलेक्टर जनमेजय महोबे ने भी मुस्कान के फैसले को आत्मसम्मान का उदाहरण बताया और शिक्षा व रोजगार के लिए मदद का भरोसा दिया.
समाज में चर्चा क्यों?
भारत में कई बार सामाजिक दबाव और बदनामी के डर से लोग गलत रिश्तों को भी निभाते रहते हैं. मुस्कान के फैसले ने इसी सोच को चुनौती दी है. उनकी कहानी अब नशे के खिलाफ जागरूकता और महिलाओं के आत्मसम्मान की मिसाल के तौर पर पेश की जा रही है.




