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अनुकंपा नियुक्ति सिर्फ योग्यता के आधार पर नहीं रोकी जा सकती, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को ऐसा क्यों कहना पड़ा? 5 Points में समझिए
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति मामले में बड़ा फैसला देते हुए कहा कि शिक्षक पद की योग्यता नहीं होने के आधार पर मृतक कर्मचारी के आश्रित की अर्जी खारिज करना सही नहीं है. कोर्ट ने प्रशासन को योग्यता के अनुसार अन्य खाली पद पर नियुक्ति पर विचार करने का आदेश दिया.
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
( Image Source:
File Photo )
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि अगर किसी मृतक कर्मचारी का आश्रित शिक्षक पद की जरूरी योग्यता पूरी नहीं करता है, तो सिर्फ इसी वजह से उसकी अनुकंपा नियुक्ति की मांग को खारिज नहीं किया जा सकता.
जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने दुर्ग जिला पंचायत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आश्रित की नियुक्ति की मांग को शैक्षणिक योग्यता का हवाला देकर खारिज किया गया था. कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता की योग्यता के अनुसार किसी स्वीकृत और खाली चतुर्थ श्रेणी पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने पर विचार किया जाए.
क्या है पूरा मामला?
- मामला दुर्ग जिले के रहने वाले राकेश कुमार वर्मा से जुड़ा है. राकेश के पिता चमन लाल वर्मा पंचायत विभाग में सहायक शिक्षक पंचायत के पद पर कार्यरत थे. 15 अक्टूबर 2015 को उनके निधन के बाद परिवार आर्थिक संकट में आ गया.
- राकेश ने 23 सितंबर 2016 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था. हालांकि, 30 जुलाई 2018 को जिला पंचायत ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि राकेश के पास शिक्षक पद के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यता नहीं है. प्रशासन का तर्क था कि वह शिक्षक के पद पर नियुक्ति के योग्य नहीं हैं.
- मामले की सुनवाई के दौरान राकेश के वकील ने कोर्ट को बताया कि अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े नियमों में समय-समय पर बदलाव हुए हैं. साल 2014 की नीति के अनुसार मृतक शिक्षक के आश्रित को सीधे सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति का प्रावधान था, जबकि बाद में नियम बदलकर ग्राम पंचायत सचिव जैसे अन्य पदों पर नियुक्ति की व्यवस्था की गई.
- हाईकोर्ट ने माना कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य किसी परिवार को आर्थिक संकट से बाहर निकालना होता है, न कि केवल किसी एक पद तक सीमित रखना. अदालत ने कहा कि प्रशासन को आश्रित की योग्यता और उपलब्ध पदों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना चाहिए.
- कोर्ट ने जिला पंचायत के पुराने आदेश को गलत बताते हुए उसे रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि चार महीने के अंदर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने पर विचार किया जाए.




