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हमें बचाया नहीं, पीटा गया... छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण का मामला पलटा, आदिवासी लड़कियां बोलीं- घसीटकर थाने ले गए और...

छत्तीसगढ़ में कथित धर्मांतरण केस ने नया मोड़ ले लिया है. जिन आदिवासी लड़कियों को 'बचाने' का दावा किया गया था, अब उन्होंने बजरंग दल और कार्यकर्ताओं पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है. लड़कियों ने कहा कि उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया और जबरन थाने ले जाया गया. अदालत ने दो ननों और एक युवक को ज़मानत दे दी है.

हमें बचाया नहीं, पीटा गया... छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण का मामला पलटा, आदिवासी लड़कियां बोलीं- घसीटकर थाने ले गए और...
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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में धर्मांतरण के आरोपों से जुड़ा मामला अब उलटी दिशा में मोड़ ले चुका है. जिन आदिवासी लड़कियों को कथित रूप से 'बचाया' गया था, अब वही लड़कियां सामने आकर कह रही हैं कि उनके साथ जबरदस्ती की गई. शनिवार को तीनों लड़कियां अपने परिजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचीं और वहां उन्होंने लिखित शिकायत दर्ज कराई.

लड़कियों ने खुलकर मीडिया के सामने अपनी आपबीती रखी. एक लड़की ने कहा, "हम अपनी मर्ज़ी से यात्रा कर रहे थे. उन्होंने हमें रोका, पीटा और गालियां दीं." एक अन्य युवती, कमलेश्वरी प्रधान, भावुक होते हुए बोलीं, "हम पहली बार ऐसे बाहर जा रहे थे, वे हमें घसीटकर थाने ले गए, ज्योति शर्मा ने हमें मारा. बहुत बुरा अनुभव था." यह वही घटना है जिसे बजरंग दल ने कथित धर्मांतरण और मानव तस्करी करार दिया था.

झूठे मामले में फंसाई गईं बेटियां

इन आदिवासी युवतियों के माता-पिता ने भी आरोप लगाया कि बजरंग दल और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उनकी बेटियों को साजिश के तहत फंसाया. एक पिता ने कहा, "हमारे परिवार की इज्जत को तार-तार किया गया है. हम चाहते हैं कि ज्योति शर्मा और उसके साथियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो."

ननों को ज़मानत, मामला हुआ कमजोर

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब बिलासपुर की एनआईए अदालत ने केरल की दो कैथोलिक ननों और एक स्थानीय युवक सुकमन मंडावी को सशर्त ज़मानत दे दी. इन तीनों को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर 25 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था. कोर्ट ने माना कि तीनों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उन्हें जेल में रखने का कोई स्पष्ट कारण नहीं है. उन्हें ₹50,000 के मुचलके पर छोड़ा गया है और पासपोर्ट जमा कराना होगा.

धर्मांतरण का कोई सवाल ही नहीं था: सुकमन मंडावी

सुकमन मंडावी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "हम काम के सिलसिले में आगरा जा रहे थे. बचपन से प्रार्थना सभाओं में हिस्सा लेते रहे हैं. ज्योति शर्मा ने हमें झूठे आरोपों में फंसाया." इसी मामले से जुड़ी कुमारी ललिता उसेंडी ने कहा कि अब न्याय मिलने की शुरुआत हुई है. उन्होंने कहा, "हमारे भैया-बहनों को सबूत के बिना जेल भेजा गया. अब राहत मिली है."

पुलिस जांच के दायरे में अब शिकायतकर्ता

नारायणपुर पुलिस ने पुष्टि की है कि उन्हें आदिवासी लड़कियों की लिखित शिकायत मिल गई है. पुलिस ने जांच का भरोसा दिलाया है. इस घटनाक्रम से धर्मांतरण के मूल दावे की साख पर सवाल उठने लगे हैं. अब यह देखना बाकी है कि पुलिस सिर्फ आरोपियों की जांच करती है या उन पर भी कार्रवाई करती है, जिन पर लड़कियों ने उत्पीड़न और गलत कहानी गढ़ने का आरोप लगाया है.

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