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बिहार में समुद्र में मिला खेत! डिजिटल क्रॉप सर्वे की रिपोर्ट से अधिकारी भी हैरान; जानें क्या है मामला

बिहार में डिजिटल क्रॉप सर्वे से छोटे लेवल पर अलग-अलग मौसमों में बोई जाने वाली फसलों की प्रकृति के बारे में पता लगाया जाता है, लेकिन इस सर्वे के दौरान इस मोबाइल ऐप से कुछ खेत समुद्र में मिले, जिसके बाद सभी अधिकारी हैरान हो गए.

बिहार में समुद्र में मिला खेत! डिजिटल क्रॉप सर्वे की रिपोर्ट से अधिकारी भी हैरान; जानें क्या है मामला
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( Image Source:  Create By AI )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत2 Mins Read

Updated on: 4 Nov 2025 2:29 PM IST

खेत जमीन में होते हैं, लेकिन क्या हो जब समुद्र में होने लगे? ऐसा ही एक मामला बिहार के भोजपुर जिले से सामने आया है. जहां फसल सर्वेक्षण से जुड़ी जानकारी वाले मोबाइल ऐप में कुछ खेत हिंद महासागर में दिखे. हालांकि, इस मामले में कृषि अधिकारी ने साफ किया कि यह परेशानी स्टेट-वाइड डिजीटल क्रॉप सर्वे में शामिल कुछ लोगों के स्मार्टफोन में हुई. इस मामले में भोजपुर जिले के कृषि अधिकारी शत्रुघ्न साहू ने बताया कि जिले के जगदीशपुर प्रखंड के जंगल महल पंचायत में हाल ही में सर्वेक्षण किया गया था.

क्या है मामला?

डीसीएस ऐप में कृषि भूमि के आंकड़ों से पता चला कि इस क्षेत्र के कुछ भूखंड हिंद महासागर में लगभग 6,500 किलोमीटर दूर हैं. जब बाद में इस मामले की छानबीन की गई, तो पता चला कि यह मोबाइल फोन की सेटिंग में गड़बड़ी के कारण हुआ है. इसके बाद फोन की सेटिंग अपडेट की गई, जिससे यह ठीक हो गया.

क्या है स्टेट-वाइड डिजीटल क्रॉप सर्वे?

स्टेट-वाइड डिजीटल क्रॉप सर्वे में राज्य के सभी जिलों को शामिल किया गया. इसमें अलग-अलग मौसम के दौरान बोई गई फसलों की तस्वीर स्थापित करने के लिए यह सर्वे किया गया था. इस पर शत्रुघ्न साहू ने बताया कि 1.15 लाख खेती वाली जगहों के फसल विवरण का सर्वेक्षण किया जा चुका है. इस काम के लिए 300 से अधिक अधिकारी जुटे हैं.

कैसे मिलेगा फायदा

इस स्टेट-वाइड डिजीटल क्रॉप सर्वे के जरिए डेटाबेस से राज्य कृषि विभाग को छोटे लेवल पर अलग-अलग मौसमों में बोई जाने वाली फसलों की प्रकृति के बारे व्यापक जानकारी मिलेगी. विभाग के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि डेटा से कृषि उपज की मार्केटिंह के साथ-साथ बाढ़ या सूखे जैसी किसी भी आपदा के मामले में किसानों को फसल बीमा प्रदान करने में भी मदद मिलेगी. इसके अलावा, यह नई नीतियों को लागू करने और तैयार करने में भी सहायता करेगा.

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