पुलिस पर पिस्तौल तानते हुए थे कई वीडियो वायरल, अब एनकाउंटर में हुआ ढेर, आखिर कौन था भोजपुर का भरत भूषण तिवारी?
भोजपुर के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद विवाद गहरा गया है. परिवार जहां इसे सुनियोजित हत्या बता रहा है, वहीं पुलिस का कहना है कि युवक की फायरिंग के जवाब में आत्मरक्षा में कार्रवाई की गई.
भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हुए एक कथित पुलिस एनकाउंटर ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. एक तरफ जहां पुलिस इस पूरी घटना को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बता रही है, वहीं दूसरी तरफ मृतक भरत भूषण तिवारी के परिजनों ने इसे सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या करार दिया है. इस घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है.
मां का आरोप
भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी ने पुलिस और एसटीएफ (STF) की कार्यशैली पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि बुधवार सुबह करीब आठ बजे पुलिस और एसटीएफ की टीम अचानक उनके घर धमक पड़ी. आशा देवी के अनुसार, सुरक्षाकर्मियों ने जबरन उनके घर का दरवाजा खुलवाया और अंदर दाखिल हो गए. घर में घुसते ही जवानों ने परिवार के सभी सदस्यों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए ताकि कोई बाहर संपर्क न कर सके. मां का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें डराया-धमकाया और कहा कि यदि भरत सामने नहीं आया, तो पूरे परिवार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. आशा देवी का स्पष्ट रूप से मानना है कि उनके बेटे को जानबूझकर निशाना बनाया गया, उसकी हत्या की गई और अब उसकी छवि को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब भरत को गोली लग चुकी थी, उसके बाद भी पुलिस और एसटीएफ के जवानों ने उसके साथ मारपीट की.
समाजसेवा और पढ़ाई से जुड़ा था भरत
परिवार का कहना है कि भरत कोई अपराधी नहीं, बल्कि एक होनहार छात्र और जागरूक नागरिक था. मां के मुताबिक, भरत अपने गांव में बाढ़ और मिट्टी के कटाव की गंभीर समस्या को लेकर लगातार आवाज उठा रहा था. गांव के पास बने एक 'फैन' (जल निकासी मार्ग) की वजह से लगातार मिट्टी बह रही थी, जिससे ग्रामीणों के घर और जमीनें खतरे में थी. भरत पिछले एक महीने से प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट रहा था ताकि वहां मिट्टी भराई का काम हो सके, लेकिन प्रशासन ने उसकी नहीं सुनी. भरत बीएससी (B.Sc) फाइनल ईयर का छात्र था और आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था. पुलिस के उस दावे को परिवार ने सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें भरत को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया गया था। मां का कहना है कि उनका बेटा मानसिक रूप से पूरी तरह ठीक था.
आत्मरक्षा में चलानी पड़ी गोली
इस पूरे मामले पर पुलिस का पक्ष परिजनों के दावों से बिल्कुल अलग है. पुलिस के अनुसार, यह कोई सोची-समझी हत्या नहीं, बल्कि आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई थी. मामले की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया पर भरत की एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें वह कथित तौर पर एक अवैध पिस्टल के साथ दिख रहा था. एक ग्रामीण ने इसकी शिकायत भोजपुर के एसपी (SP) से की, जिसके बाद शाहपुर थाना पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए गए. पुलिस का कहना है कि मंगलवार को शाहपुर थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ भरत के घर पहुंचे थे. पुलिस ने उसे समझाने और हथियार सरेंडर करने को कहा, लेकिन उसने सहयोग नहीं किया. आरोप है कि भरत हथियार ताने खड़ा रहा और उसने अधिकारियों को धमकी भी दी. उस समय पुलिस बिना बल प्रयोग किए लौट आई.
बुधवार को मामला तब और बिगड़ गया जब भरत फेसबुक लाइव पर आया. पुलिस का आरोप है कि उसने लाइव वीडियो में प्रशासन के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कीं और पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी. इसके बाद वह खेतों की तरफ भाग गया. पुलिस के अनुसार, भरत को बार-बार सरेंडर करने को कहा गया, लेकिन उसने फायरिंग जारी रखी. इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में गोलियां चलाईं, जो भरत के दोनों पैरों की जांघों में लगी. उसे इलाज के लिए पहले आरा सदर अस्पताल और फिर पटना के PMCH ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया.




