पटना फिर बनेगा पाटलिपुत्र, क्या है इस नाम का इतिहास, कैसे और क्यों हुआ था बदलाव, Explainer
पटना के पास बनने वाली पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप 81,730 एकड़ में विकसित होगी. इसमें फिनटेक सिटी, स्पोर्ट्स सिटी, अस्पताल, स्कूल और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होंगे.
पाटलिपुत्र आज के पटना का पुराना नाम था और यह मगध साम्राज्य की राजधानी थी. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 17 जून को घोषणा की कि पटना में बनने वाले प्रस्तावित टाउनशिप का नाम पाटलिपुत्र रखा जाएगा, जिससे राज्य की राजधानी का पुराना नाम फिर से जीवित हो जाएगा. फुलवारी शरीफ के नदियावां इलाके में एक जनसंपर्क कार्यक्रम में बोलते हुए चौधरी ने कहा कि नए टाउनशिप को पटना की ऐतिहासिक पहचान को दिखाना चाहिए और शहर के भविष्य के विकास का प्रतीक बनना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा, "प्रस्तावित टाउनशिप को अब पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाएगा." उन्होंने कहा कि यह नाम नया नहीं है, बल्कि शहर के समृद्ध इतिहास से जुड़ा है.
टाउनशिप की जरूरत क्यों?
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार का विकास आधुनिक शहरी बुनियादी ढांचे पर निर्भर करता है और निवासियों को भरोसा दिलाया कि टाउनशिप परियोजना के कारण किसी को नुकसान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि नियोजित टाउनशिप बनाना राज्य को बदलने में अहम भूमिका निभाएगा.
टाउन का नाम पाटलिपुत्र रखने का प्रस्ताव किसका?
जनसंपर्क कार्यक्रम में शामिल स्थानीय लोगों को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा, "श्याम रजक, रामकृपाल यादव, कई वरिष्ठ साथी हमसे मिले थे... लोगों ने कहा कि आप बड़ा टाउनशिप बना रहे हैं. पटना की पहचान एक नए शहर पाटलिपुत्र से होनी चाहिए. कई लोग मुद्दा बनाते हैं कि ये मगध की राजधानी थी, इसका नाम पाटलिपुत्र था. इसका नाम बदल देना चाहिए. इसलिए हमारी सरकार ने पटना से भी बड़े टाउनशिप की कल्पना की है. इसलिए, उसका नाम पाटलिपुत्र रखने का काम किया है."
कभी कंकड़बाग था एशिया का सबसे बड़ा टाउनशिप?
कभी एशिया के सबसे बड़े टाउनशिप में से एक माने जाने वाले कंकड़बाग का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस इलाके ने समय के साथ अपनी मूल पहचान खो दी है. उन्होंने कहा कि सरकार अब एक आधुनिक टाउनशिप विकसित करने पर काम कर रही है जो पटना के लिए एक नई पहचान बन सके.
पाटलिपुत्र का सबसे पुराना नाम क्या?
पाटलिपुत्र आज के पटना का पुराना नाम था और यह मगध साम्राज्य की राजधानी थी. इतिहासकारों का मानना है कि पाटलिपुत्र बनने से पहले इस शहर को मूल रूप से पाटलिग्राम के नाम से जाना जाता था. बाद में सदियों के दौरान यह पटना बन गया.
इतिहास कितना पुराना?
पटना यानी पाटलिपुत्र का इतिहास लगभग 3,000 साल पुराना है, कभी राजनीति, व्यापार और शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था. यह चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक जैसे शक्तिशाली शासकों की राजधानी रहा है.
पटना के निकट विकसित की जाने वाली पाटलिपुत्र टाउनशिप को राज्य की सबसे बड़ी सैटेलाइट सिटी के रूप में तैयार किया जाएगा. यहां आधुनिक आवासीय क्षेत्रों के साथ-साथ व्यावसायिक और संस्थागत ढांचा भी विकसित किया जाएगा, जिससे राजधानी क्षेत्र के विस्तार को व्यवस्थित स्वरूप मिल सके.
सम्राट चौधरी द्वारा घोषित पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप बिहार की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड सैटेलाइट सिटी परियोजना मानी जा रही है. सरकार की प्रारंभिक योजना के अनुसार यह टाउनशिप पटना के पूर्वी हिस्से (फतुहा-दनियावां क्षेत्र) में विकसित होगी.
कितने एकड़ में विकसित करने की योजना?
पाटलिपुत्र टाउनशिप का "स्पेशल जोन" लगभग 81,730 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित है. इसमें शुरुआती विकास के लिए करीब 1,010 एकड़ का कोर एरिया चिन्हित किया गया है. परियोजना के दायरे में लगभग 275 गांव शामिल किए गए हैं.
कितने करोड़ का प्रोजेक्ट?
राज्य सरकार ने अभी तक पूरी पाटलिपुत्र टाउनशिप की अंतिम परियोजना लागत सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं की है. परियोजना चरणबद्ध तरीके से विकसित की जानी है, इसलिए विस्तृत DPR और निवेश मॉडल के बाद ही कुल लागत का स्पष्ट आंकड़ा सामने आएगा. फिलहाल सरकार ने इसे बिहार की सबसे बड़ी शहरी विकास परियोजनाओं में शामिल किया है.
निर्माण और विकास की जिम्मेदारी किसकी?
परियोजना का नेतृत्व बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग तथा बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निकायों के माध्यम से किया जाएगा. भूमि प्रबंधन के लिए राज्य सरकार ने लैंड पूलिंग मॉडल को भी नीति का हिस्सा बनाया है, जिससे किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके. विस्तृत विकास कार्यों के लिए निजी डेवलपर्स और एजेंसियों की भी भागीदारी हो सकती है.
टाउनशिप में क्या-क्या होगा?
स्पोर्ट्स सिटी: राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाओं वाला विशेष क्षेत्र.
फिनटेक सिटी: बैंकिंग, फिनटेक, आईटी और स्टार्टअप्स के लिए विशेष व्यावसायिक हब.
आधुनिक आवासीय सेक्टर: योजनाबद्ध आवासीय कॉलोनियां, अपार्टमेंट, समूह आवास और मिश्रित उपयोग क्षेत्र.
स्वास्थ्य और शिक्षा हब: अस्पताल, मेडिकल सुविधाएं, स्कूल, कॉलेज और अन्य संस्थागत क्षेत्र.
कमर्शियल और मार्केट जोन: शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, व्यापारिक केंद्र और सेवा क्षेत्र.
हरित क्षेत्र: पार्क, ग्रीन बेल्ट और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक स्थान.
हाई-स्पीड कनेक्टिविटी: टाउनशिप से होकर एक्सप्रेसवे और सिक्स-लेन रिंग रोड गुजरने की योजना है, जिससे पटना और आसपास के क्षेत्रों से तेज संपर्क स्थापित होगा.
बिहार में 11 नई ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप
बिहार सरकार ने राज्य के शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए 11 प्रमुख शहरों के आसपास आधुनिक सुविधाओं से लैस ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की मंजूरी दी है. इन टाउनशिप का उद्देश्य बढ़ती आबादी का दबाव कम करना, नियोजित शहरीकरण को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है.
सभी टाउनशिप को मास्टर प्लान के तहत विकसित किया जाएगा, जहां चौड़ी सड़कें, हरित क्षेत्र, आधुनिक अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, मार्केट कॉम्प्लेक्स तथा आईटी और फिनटेक हब जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी.
किन-किन शहरों में बनेंगी नई टाउनशिप?
सरकार द्वारा स्वीकृत टाउनशिप में पाटलिपुत्र (पटना), हरिहरनाथपुरम (सोनपुर), मगध (गया), मिथिला (दरभंगा), कोसी (सहरसा), पूर्णिया (पूर्णिया), अंग (मुंगेर), विक्रमशिला (भागलपुर), तिरहुत (मुजफ्फरपुर), सारण (छपरा) और सीतापुरम (सीतामढ़ी) शामिल हैं.




