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ट्रक ड्राइवर की बेटी ने रचा इतिहास, पीटी ऊषा का 42 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए एशियन गेम्स में जीता ब्रॉन्ज मेडल; कौन हैं Vithya Ramraj?

विथ्या रामराज ने एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 400 मीटर हर्डल्स में 54.75 सेकंड का समय निकालकर ब्रॉन्ज मेडल जीता और पीटी उषा का 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया. उन्होंने 2023 में इसी रिकॉर्ड की बराबरी की थी.

Vithya Ramraj
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Vithya Ramraj

Who Is Vithya Ramraj: एथलेटिक्स में कुछ रिकॉर्ड सिर्फ आंकड़े नहीं होते, वे एक दौर की पहचान बन जाते हैं. पीटी उषा का 400 मीटर हर्डल्स का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी ऐसा ही रिकॉर्ड था, जो करीब 42 साल तक भारतीय एथलेटिक्स की किताब में कायम रहा... लेकिन अब इस रिकॉर्ड पर एक नया नाम लिख दिया गया है- विथ्या रामराज.

एशियन गेम्स 2026 के महिला 400 मीटर हर्डल्स ( बाधा दौड़) फाइनल में विथ्या रामराज ने 54.75 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक यानी ब्रॉन्ज मेडल जीता. इस शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने पीटी उषा के नाम दर्ज राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ दिया. यह सिर्फ एक पदक नहीं था, बल्कि उस रिकॉर्ड को तोड़ने की कहानी थी जिसे विथ्या पहले ही छू चुकी थीं.

2023 में बराबरी, 2026 में रिकॉर्ड अपने नाम

साल 2023 में हांगझोउ एशियन गेम्स में विथ्या ने महिलाओं की 400 मीटर हर्डल्स में 55.42 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक जीता था. उनका समय बिल्कुल वही था, जो पीटी उषा ने 8 अगस्त 1984 को लॉस एंजिल्स ओलंपिक में बनाया था. यानी विथ्या ने 2023 में 39 साल पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड की बराबरी कर ली थी. उस समय यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि उषा का रिकॉर्ड भारतीय एथलेटिक्स में दशकों से कायम था.

लेकिन विथ्या की कहानी वहीं नहीं रुकी. तीन साल बाद एशियन गेम्स 2026 में नागोया की ट्रैक पर उन्होंने अपने ही प्रदर्शन को एक नए स्तर पर पहुंचाया. 54.75 सेकंड के साथ उन्होंने पुराने रिकॉर्ड में 0.67 सेकंड का सुधार किया और आखिरकार पीटी उषा के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया. एक तरह से 2023 में विथ्या ने इतिहास के दरवाजे पर दस्तक दी थी और 2026 में उसे पार कर गईं.

कौन हैं विथ्या रामराज?

  • विथ्या रामराज का सफर किसी बड़े एथलेटिक्स परिवार से शुरू नहीं हुआ था. वह एक साधारण परिवार से आती हैं और उनके पिता ट्रक ड्राइवर रहे हैं. उनकी मां ने विथ्या और उनकी जुड़वां बहन निथ्या रामराज, जो 110 मीटर हर्डल्स की एथलीट हैं, दोनों को तमिलनाडु के स्पोर्ट्स हॉस्टल में दाखिला दिलाया.
  • विथ्या के लिए एथलेटिक्स कोई बचपन से तय किया हुआ सपना नहीं था. एक पैरेंट-टीचर मीटिंग के दौरान उनके फिजिकल एजुकेशन शिक्षक ने उन्हें खेलों में जाने की सलाह दी थी. इसके बाद उनकी मां ने एथलेटिक्स को चुना.
  • स्पोर्ट्स हॉस्टल ने भी विथ्या के परिवार के लिए बड़ी भूमिका निभाई, क्योंकि वहां ट्रेनिंग और रहने की सुविधाओं ने उनके लिए आगे बढ़ने का रास्ता आसान किया.
  • स्कूल के बाद विथ्या ने स्पोर्ट्स कोटा के तहत BBA की पढ़ाई की और 2018 में पटियाला स्थित NIS के राष्ट्रीय कैंप से जुड़ीं... लेकिन उनका सफर सीधा और आसान नहीं रहा.
  • राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के बाद भी विथ्या को कई परेशानियों से गुजरना पड़ा. पटियाला में उन्हें व्यक्तिगत ट्रेनिंग की कमी, खाने की परेशानी और हिंदी भाषा को समझने में दिक्कत जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इसके बाद जब वह टोक्यो ओलंपिक ट्रायल्स की तैयारी कर रही थीं, तभी उन्हें कोविड संक्रमण हुआ. इसके बाद उनकी अपेंडिसाइटिस की सर्जरी भी हुई. इन वजहों से उन्हें कैंप छोड़कर घर लौटना पड़ा और उनकी तैयारी प्रभावित हुई. यानी जिस एथलीट से आगे चलकर पीटी उषा का रिकॉर्ड तोड़ने की उम्मीद की जाने लगी, उसकी राह में एक समय ऐसा भी था, जब बीमारी और परिस्थितियों के कारण ट्रेनिंग तक रोकनी पड़ी थी.
  • विथ्या के करियर में उनकी जुड़वां बहन निथ्या की भी खास भूमिका रही. निथ्या कोच नेहपाल सिंह राठौड़ के साथ ट्रेनिंग कर रही थीं. बाद में उन्होंने विथ्या को भी इस ट्रेनिंग सेटअप से जुड़ने में मदद की.
  • शुरुआत में विथ्या मुख्य रूप से 400 मीटर फ्लैट रेस पर ध्यान देती थीं, लेकिन राठौड़ ने उन्हें 400 मीटर हर्डल्स पर भी ध्यान देने के लिए प्रेरित किया. यहीं से पीटी उषा के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को चुनौती देने का लक्ष्य सामने आया. विथ्या ने दोनों इवेंट्स पर काम करना शुरू किया और धीरे-धीरे हर्डल्स में उनकी पहचान मजबूत होती गई.
  • नागोया में जीता गया कांस्य विथ्या का एशियन गेम्स में दूसरा व्यक्तिगत पदक है. 2023 हांगझोउ एशियन गेम्स में उन्होंने 400 मीटर हर्डल्स में कांस्य जीता था. अब 2026 में भी उन्होंने इसी इवेंट में कांस्य अपने नाम किया, लेकिन इस बार उनके पदक के साथ एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी जुड़ गया.
  • विथ्या इससे पहले एशियन गेम्स 2026 में भारत की मिश्रित 4x400 मीटर रिले टीम का हिस्सा भी रही हैं. उस टीम ने रजत पदक जीता था और विथ्या ने एंकर लेग दौड़ते हुए भारत को दूसरे स्थान पर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई. इस तरह एशियन गेम्स 2026 में उनके खाते में अब दो पदक हो चुके हैं.

अनू राघवन भी रहीं रेस का हिस्सा

भारत की एक और एथलीट अनू राघवन ने भी 400 मीटर हर्डल्स में हिस्सा लिया. उन्होंने 55.88 सेकंड का समय निकालकर पांचवां स्थान हासिल किया और इस दौरान अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी दर्ज किया... लेकिन इस रेस की सबसे बड़ी खबर विथ्या रामराज रहीं.

54.75 सेकंड... यही वह समय था जिसने चार दशक से ज्यादा पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को बदल दिया. पीटी उषा का रिकॉर्ड, जिसकी 2023 में विथ्या ने बराबरी की थी, अब आधिकारिक तौर पर उनके नाम हो गया है.

विथ्या रामराज की कहानी क्यों खास है?

विथ्या रामराज की कहानी इसलिए खास है क्योंकि इसमें सिर्फ एक रिकॉर्ड टूटने की कहानी नहीं है. इसमें एक ऐसे परिवार की कहानी है जहां पिता ट्रक चलाते थे, मां ने बेटियों को खेलों में भेजने का फैसला किया, बीमारी ने करियर को रोकने की कोशिश की और फिर एक जुड़वां बहन की मदद से ट्रेनिंग का नया रास्ता मिला.

2023 में विथ्या ने पीटी उषा के रिकॉर्ड की बराबरी की थी. 2026 में उन्होंने वही रिकॉर्ड तोड़ दिया... और अब भारतीय एथलेटिक्स के रिकॉर्ड बुक में उस 400 मीटर हर्डल्स के राष्ट्रीय रिकॉर्ड के सामने नया नाम है- विथ्या रामराज.

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