कभी सैमसन-अभिषेक का धमाका, कभी तिलक-धीर का कमाल; टीम इंडिया सिर्फ टॉप ऑर्डर के भरोसे नहीं, न्यूजीलैंड में तीन जीत ने खोले कई राज
भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन टी-20 मुकाबलों में तीन अलग-अलग अंदाज में लक्ष्य का पीछा करते हुए जीत दर्ज कर अपनी बल्लेबाजी की गहराई और लचीलेपन का प्रदर्शन किया. पहले मैच में संजू सैमसन और नमन धीर, दूसरे में तिलक वर्मा और तीसरे में अभिषेक शर्मा जीत के सबसे बड़े नायक बने.
India vs New Zealand T20I Series: किसी टीम की असली ताकत सिर्फ लगातार मैच जीतने में नहीं, बल्कि हर बार अलग तरीके से जीत हासिल करने में होती है. न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में भारतीय टीम ने यही करके दिखाया. तीन मुकाबले, तीन अलग परिस्थितियां और जीत के तीन अलग रास्ते... कहीं संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा की तूफानी शुरुआत ने मैच का रुख बदल दिया, कहीं तिलक वर्मा ने मुश्किल वक्त में मोर्चा संभाला, तो कहीं अभिषेक शर्मा ने ऐसी बल्लेबाजी की कि लक्ष्य का पीछा करना महज औपचारिकता बनकर रह गया.
इन तीनों जीतों के बीच कुछ समानताएं भी थीं. पावरप्ले में तेज रन, नमन धीर का उपयोगी कैमियो और मुश्किल हालात में भी जीत का भरोसा... लेकिन इन मुकाबलों की असली कहानी इन समानताओं से कहीं आगे निकलती है. भारतीय टीम ने दिखाया कि उसकी बल्लेबाजी सिर्फ शीर्ष क्रम के भरोसे नहीं है. जरूरत पड़ने पर मध्यक्रम और निचले क्रम के बल्लेबाज भी मैच का रुख पलट सकते हैं. यही लचीलापन किसी मजबूत टी20 टीम की सबसे बड़ी पहचान है.
संजू ने रखी नींव, नमन धीर ने दिया फिनिशिंग टच
न्यूजीलैंड की परिस्थितियों को भारतीय बल्लेबाजों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था. उम्मीद थी कि नई गेंद की स्विंग और बाद में स्पिनरों की मददगार पिच भारत के आक्रामक बल्लेबाजों की रफ्तार पर लगाम लगाएगी, लेकिन पहले मुकाबले में भारतीय सलामी बल्लेबाजों ने इन आशंकाओं को गलत साबित कर दिया.
न्यूजीलैंड ने 225 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया था. शुरुआती ओवरों में गेंद स्विंग हो रही थी, लेकिन संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा ने दबाव में आने के बजाय जवाबी हमला चुना. दोनों ने महज 5.4 ओवर में 93 रन जोड़ दिए. संजू ने 23 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया. उनकी बल्लेबाजी की खासियत यह रही कि उन्होंने बेवजह जोखिम लेने के बजाय गेंद की दिशा और अपनी ताकत के मुताबिक शॉट खेले. तेज गेंदबाजों के खिलाफ उन्होंने कवर से मिडविकेट के बीच के क्षेत्र में रन बटोरे, जबकि स्पिनरों पर मिडविकेट की दिशा में हमला किया.
इस तेज शुरुआत का महत्व तब समझ आया, जब पिच धीमी होने लगी और स्पिनरों ने भारतीय बल्लेबाजों को बांधना शुरू किया. संजू 67 रन बनाकर मिशेल सैंटनर की गेंद पर बोल्ड हुए, तो भारतीय पारी कुछ देर के लिए लड़खड़ाती दिखाई दी. ऐसे समय में श्रेयस अय्यर ने जिम्मेदारी संभाली और नमन धीर ने आक्रामक बल्लेबाजी से मैच को फिर भारत की तरफ मोड़ दिया.
धीर ने महज 15 गेंदों पर 42 रन ठोक दिए. यह सिर्फ तेज रन बनाने की पारी नहीं थी, बल्कि दबाव में मैच खत्म करने की क्षमता का प्रदर्शन भी था. आईपीएल जैसी प्रतियोगिताओं में खेलने वाले खिलाड़ियों को मुश्किल परिस्थितियों में तेजी से फैसले लेने की आदत पड़ती है. धीर ने इसी अनुभव का इस्तेमाल करते हुए भारत को लक्ष्य तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई.
जब पांच विकेट गिरने के बाद तिलक वर्मा ने बदली कहानी
दूसरे मुकाबले की कहानी पहले मैच से बिल्कुल अलग थी. यहां भारतीय टीम की शुरुआत के बाद मुकाबला उसके हाथ से निकलता दिखाई देने लगा. धीमी पिच पर मिशेल सैंटनर की स्पिन ने भारतीय बल्लेबाजी को मुश्किल में डाल दिया. उनके एक ओवर में दो विकेट गिरने से भारत की स्थिति बेहद नाजुक हो गई. टीम पांच विकेट गंवा चुकी थी और 54 गेंदों में 110 रन की जरूरत थी.
टी20 क्रिकेट में यह लक्ष्य असंभव नहीं था, लेकिन पिच और गिरते विकेटों ने चुनौती बढ़ा दी थी. ऐसे समय में तिलक वर्मा ने पारी को संभालने का फैसला किया. हैदराबाद के इस बल्लेबाज के लिए निचले क्रम में उतरकर मैच खत्म करना हमेशा स्वाभाविक भूमिका नहीं रही, लेकिन उन्होंने धीरे-धीरे इस जिम्मेदारी को अपनी ताकत बना लिया है.
तिलक ने शुरुआत में जोखिम कम रखा. पहली 10 गेंदों पर वह केवल नौ रन बना सके, लेकिन जैसे-जैसे मैच निर्णायक मोड़ पर पहुंचा, उनकी बल्लेबाजी का अंदाज बदलता गया. उन्होंने अगली 16 गेंदों में 42 रन बना दिए. दबाव के बीच उनके शॉट्स में तेजी के साथ नियंत्रण भी दिखाई दिया. नमन धीर और नितीश कुमार रेड्डी ने भी उनका अच्छा साथ दिया. दोनों ने मिलकर 30 गेंदों में 57 रन जोड़े. धीमी पिच पर यह योगदान बेहद अहम था, क्योंकि यहां हर गेंद पर बड़े शॉट लगाना आसान नहीं था. भारत ने आखिरी से पहले वाली गेंद पर मुकाबला जीत लिया.
इस जीत ने भारतीय टीम की बल्लेबाजी को लेकर एक बड़ा संकेत दिया. टीम की ताकत सिर्फ शीर्ष तीन बल्लेबाजों तक सीमित नहीं है. जब शुरुआती बल्लेबाज नाकाम हों या मध्यक्रम पर दबाव बढ़े, तब भी निचले क्रम के बल्लेबाज मैच जिताने की क्षमता रखते हैं. तिलक की पारी इसी भरोसे की मिसाल बनी.
जब अभिषेक शर्मा ने मचाया तांडव
तीसरे मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजी का एक और रंग देखने को मिला. पारी की शुरुआत करने के लिए प्रतिस्पर्धा तेज है और कई युवा बल्लेबाज मौके का इंतजार कर रहे हैं. इस बार वैभव सूर्यवंशी को मौका मिला. उन्होंने 19 गेंदों पर 44 रन बनाकर अपनी आक्रामक क्षमता दिखाई... लेकिन मैच की सबसे बड़ी कहानी उनके साथी अभिषेक शर्मा की बल्लेबाजी रही.
पहले ही ओवर में दोनों बल्लेबाजों ने मिलकर 26 रन बटोर लिए. यह किसी पारी के शुरुआती ओवर में संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा रन बनाने के रिकॉर्ड की बराबरी थी. इसके बाद अभिषेक ने पारी की कमान अपने हाथ में ले ली. उनकी बल्लेबाजी में इतनी तेजी थी कि पावरप्ले खत्म होने तक भारत लक्ष्य के आधे से ज्यादा हिस्से को पार कर चुका था और जरूरी रन रेट छह से नीचे आ गया था.
अभिषेक ने 35 गेंदों में शतक पूरा किया. यह पारी सिर्फ तेजी के आंकड़ों के लिए याद नहीं रखी जाएगी, बल्कि इसलिए भी कि उन्होंने विपक्षी गेंदबाजों को रणनीति बदलने का समय तक नहीं दिया. जब कोई बल्लेबाज इतनी तेजी से रन बनाता है, तो गेंदबाजों के पास बचाव के विकल्प लगातार कम होते जाते हैं. अभिषेक ने इसी दबाव को लगातार बढ़ाया और मुकाबले को भारत के पक्ष में झुका दिया.
इस पारी ने उनकी जगह को लेकर चल रही बहस को भी खत्म कर दिया है. संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ियों के बीच ओपनिंग की प्रतिस्पर्धा भले ही जारी रहे, लेकिन अभिषेक ने दिखाया कि वह अपनी आक्रामक शैली से मैच का रुख कितनी जल्दी बदल सकते हैं.
तीन जीतों से क्या पता चला?
न्यूजीलैंड के खिलाफ इन तीन मुकाबलों की सबसे अहम बात सिर्फ यह नहीं रही कि भारत ने लक्ष्य हासिल किए. असली बात यह रही कि टीम ने हर बार अलग परिस्थिति के मुताबिक अपना तरीका बदला. पहले मैच में तेज शुरुआत और आक्रामक फिनिश निर्णायक बने. दूसरे में मुश्किल हालात के बीच तिलक वर्मा और निचले क्रम ने जीत दिलाई. तीसरे में अभिषेक शर्मा की विस्फोटक बल्लेबाजी ने लक्ष्य का पीछा बेहद आसान बना दिया.
नमन धीर का योगदान भी इन मुकाबलों में एक अहम कड़ी के रूप में उभरा. उनकी उपयोगी पारियों ने दिखाया कि भारतीय टीम को सिर्फ बड़े नामों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. वहीं तिलक की पारी ने यह भरोसा मजबूत किया कि दबाव के समय मध्यक्रम जिम्मेदारी उठा सकता है.
टी20 क्रिकेट में एक ही रणनीति हर मैच में सफल नहीं होती. पिच, गेंदबाजों और लक्ष्य की मांग के हिसाब से बल्लेबाजी का तरीका बदलना पड़ता है. भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ यही लचीलापन दिखाया. मंजिल हर बार जीत रही, लेकिन वहां तक पहुंचने का रास्ता अलग था. यही तीन जीतों की सबसे बड़ी कहानी है.




