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क्यों फिर से उठी करतारपुर कॉरिडोर खोलने की मांग, पंजाब में पास हुआ प्रस्ताव, जानें सिखों के लिए क्यों खास है पाकिस्तान की यह जगह

पंजाब विधानसभा में फिर से करतारपुर कॉरिडोर खोलने की मांग उठी है. करतारपुर साहिब में गुरु नानक देव जी जिंदगी के आखिरी 18 साल बिताए थे. वहीं, गुरुपर्व भी आने वाला है. इसलिए यह मांग जोर पकड़ रही है.

क्यों फिर से उठी करतारपुर कॉरिडोर खोलने की मांग, पंजाब में पास हुआ प्रस्ताव, जानें सिखों के लिए क्यों खास है पाकिस्तान की यह जगह
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( Image Source:  ANI )
हेमा पंत
Edited By:हेमा पंत4 Mins Read

Published on: 28 Oct 2026 9:55 AM

करतारपुर साहिब के दर्शन की आस लगाए बैठे श्रद्धालुओं के लिए एक बार फिर इस पवित्र जगह तक पहुंचने का मुद्दा उठाया गया है. मंगलवार को पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार से करतारपुर कॉरिडोर दोबारा खोलने की मांग करते हुए प्रस्ताव पास किया. यह रास्ता 7 मई 2025 से बंद है. अब नवंबर में गुरु नानक देव जी की जयंती यानी गुरुपर्व भी आने वाला है, ऐसे में श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मुद्दे पर फिर चर्चा तेज हो गई है.

पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब सिखों के लिए बेहद खास है. मान्यता है कि गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के आखिरी 18 साल यहीं बिताए थे. कॉरिडोर के जरिए भारतीय श्रद्धालु बिना वीजा के निर्धारित नियमों के तहत यहां दर्शन कर सकते हैं. पंजाब सरकार का कहना है कि यह रास्ता केवल दो देशों को जोड़ने का जरिया नहीं, बल्कि सिखों की आस्था और विरासत से जुड़ा है.

करतापुर साहिब क्यों खास है?

करतारपुर साहिब पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित है. सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष इसी स्थान पर बिताए थे. इसलिए यह जगह सिख समुदाय के लिए गहरी आस्था से जुड़ी हुई है. यहां पहुंचकर मत्था टेकना दुनियाभर में रहने वाले सिख श्रद्धालुओं की बड़ी इच्छा होती है.

क्या है करतारपुर कॉरिडोर?

इस गुरुद्वारे तक पहुंचने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच करतारपुर कॉरिडोर बनाया गया था. यह भारत के गुरदासपुर जिले में स्थित डेरा बाबा नानक को पाकिस्तान के करतारपुर साहिब से जोड़ता है. इसकी सबसे खास बात यह है कि भारतीय श्रद्धालु बिना पाकिस्तानी वीजा के निर्धारित नियमों के तहत गुरुद्वारे के दर्शन कर सकते हैं. हालांकि, इसके लिए जरूरी प्रक्रियाओं का पालन करना होता है.

कब शुरू हुआ था यह रास्ता?

भारत और पाकिस्तान ने गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती से पहले 24 अक्टूबर 2019 को इस कॉरिडोर को शुरू करने के लिए समझौता किया था. इसके बाद 9 नवंबर 2019 को इसे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया. इस पहल से उन लोगों को बड़ी राहत मिली, जो लंबे समय से सीमा पार स्थित गुरुद्वारे में दर्शन करने का इंतजार कर रहे थे. हालांकि, कोरोना महामारी के दौरान मार्च 2020 में इस रास्ते से आवाजाही रोक दी गई थी. नवंबर 2021 में इसे फिर से शुरू किया गया. इसके बाद एक बार फिर सुरक्षा कारणों से इस रास्ते पर रोक लगा दी गई.

आखिर कब और क्यों बंद हुआ कॉरिडोर?

करतारपुर कॉरिडोर 7 मई 2025 से बंद है. इससे पहले पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था. इसके बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल हमले किए थे. बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच करतारपुर साहिब की तीर्थयात्रा रोक दी गई. जुलाई 2025 में केंद्र सरकार ने संसद में बताया था कि सिख धार्मिक संगठनों की ओर से कॉरिडोर दोबारा खोलने के अनुरोध मिले हैं. लेकिन सुरक्षा स्थिति अनुकूल नहीं होने के कारण यात्रा बहाल नहीं की जा सकती. अगस्त में विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात में कॉरिडोर की सेवाएं बंद रहेंगी.

अब क्यों उठ रही है कॉरिडोर खोलने की मांग?

करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोलने की मांग का संबंध गुरु नानक देव जी की जयंती यानी गुरुपर्व जैसे धार्मिक अवसरों से भी जुड़ता है. इस मौके पर सिख श्रद्धालु गुरुद्वारों में मत्था टेकते हैं, कीर्तन सुनते हैं और गुरु साहिब की शिक्षाओं को याद करते हैं. ऐसे समय में करतारपुर साहिब के दर्शन की इच्छा और भी गहरी हो जाती है.

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