Karwa Chauth 2026: करवा चौथ पर कब निकलेगा आपके शहर में चांद, नोट कर लें समय, कब करें सरगी और क्या है महत्व, सब जानें
29 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा. इस दिन चांद देखकर व्रत खोला जाता है. दिल्ली में रात 08:17 पर चांद नजर आएगा.
करवा चौथ हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहार है. करवा चौथ का यह त्योहार हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आता है. इस व्रत में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं.
इस बार करवा चौथ का यह व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार 2026 को है. आइए जानते हैं करवा चौथ व्रत पूजा की विधि, शुभ मुहूर्त और चन्द्रोदय समय के बारे में विस्तार से.
ये भी पढ़ें :करवा चौथ पर छलनी से क्यों देखा जाता है पति का चेहरा, जानिए क्या कहते हैं शास्त्र
क्या है करवा चौथ की तिथि
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 29 अक्टूबर, 2026 को 01:06 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त: 29 अक्टूबर, 2026 को रात्रि 10:09 बजे
करवा चौथ पूजा मुहूर्त: शाम 05:38 से 06:56 बजे तक
करवा चौथ व्रत समय: सुबह 06:31 से रात्रि 08:17 बजे तक
करवा चौथ के दिन चन्द्रोदय: रात्रि 08:17 बजे
करवा चौथ की परंपरा और सरगी का महत्व
करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से शुरू होकर चंद्रोदय तक चलता है. परंपरा के अनुसार, व्रत वाले दिन सुबह सूर्योदय से पहले सास अपनी बहू को सरगी देती है. सरगी में फल, मिठाई, मेवे और अन्य खाद्य पदार्थ रखे जाते हैं. महिलाएं सरगी ग्रहण करने के बाद निर्जला व्रत शुरू करती हैं.दिनभर व्रत रखने के बाद महिलाएं शाम को स्नान कर नए वस्त्र पहनती हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं. इसके बाद पूजा की तैयारियां की जाती हैं. इस पर्व पर महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं.
करवा चौथ की पूजा कैसी होती है ?
- करवा चौथ के दिन शाम को पूजा की विशेष परंपरा है.
- इस दौरान भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की पूजा की जाती है. पूजा में मिट्टी के करवे का विशेष महत्व होता है.
- सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करके चौकी पर देवी-देवताओं की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें.
- भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश का पूजन करें.
- पूजा में करवा, दीपक, रोली, अक्षत, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें.
- करवा चौथ की पारंपरिक व्रत कथा सुनें या पढ़ें.
- परंपरा के अनुसार, महिलाएं एक साथ बैठकर कथा सुनती हैं और पूजा की थाली या करवे का आदान-प्रदान करती हैं.
चंद्र दर्शन और करवा चौथ व्रत का पारण
करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व है. रात में चांद निकलने के बाद महिलाएं छलनी से चंद्रमा को देखती हैं और फिर पति का चेहरा देखती हैं. इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा की जाती है. परंपरा के अनुसार, पति अपनी पत्नी को पानी पिलाकर और मिठाई खिलाकर व्रत खुलवाते हैं. इसके साथ ही दिनभर रखा गया निर्जला व्रत पूरा होता है.
करवा चौथ 2026: कब निकलेगा आपके शहर में चांद?
दिल्ली रात 08:17
नोएडा रात 08:16
मुबंई रात 08: 52
कोलकाता रात 07:47
चंडीगढ़ रात 08:17
पंजाब रात 08:10
जम्मू रात 08: 07
लुधियाना रात 08:11
देहरादून रात 08:02
शिमला रात 08:03
जयपुर रात 08: 22
पटना रात 07: 47
रांची रात 07:52
लखनऊ रात 08:00
कानपुर रात 08:03
प्रयागराज रात 8:00
इंदौर रात 08: 33
भोपाल रात 08: 25
अहमदाबाद रात 8:52
चेन्नई रात 8:44
बंगलुरू रात 8:55




