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करवा चौथ पर छलनी से क्यों देखा जाता है पति का चेहरा, जानिए क्या कहते हैं शास्त्र

करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा. इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए निर्जला उपवास करती हैं. चांद निकलने के बाद अर्घ्य देकर छलनी से चंद्रमा और पति का चेहरा देखने की परंपरा निभाई जाती है. जानिए, इसके पीछे कौन-सी धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं.

करवा चौथ पर छलनी से क्यों देखा जाता है पति का चेहरा, जानिए क्या कहते हैं शास्त्र
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( Image Source:  Image Source : Google gemini )
State Mirror Astro
Edited By:State Mirror Astro3 Mins Read

Updated on: 28 Oct 2026 8:08 AM IST

करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा. हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व है. उत्तर और मध्य भारत समेत देश के कई हिस्सों में विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए करवा चौथ का उपवास रखती हैं. इस दिन महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत करती हैं और शाम को विधि-विधान से पूजा करती हैं. व्रत के पारण से पहले चंद्रमा को अर्घ्य देने और छलनी से चंद्र दर्शन के बाद पति का चेहरा देखने की परंपरा है. आइए जानते हैं कि करवा चौथ पर छलनी से पति का चेहरा देखने की परंपरा के पीछे क्या धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं.

करवा चौथ पर छलनी से क्यों देखते हैं पति का चेहरा?

करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद महिलाएं छलनी से चंद्र दर्शन करती हैं और फिर उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखती हैं. इस परंपरा को लेकर कई धार्मिक और लोक मान्यताएं प्रचलित हैं. मान्यता है कि छलनी के माध्यम से चंद्रमा और पति का चेहरा देखने से दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि आती है और पति की लंबी आयु की कामना पूरी होती है. छलनी को शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक भी माना जाता है. हालांकि, छलनी से पति का चेहरा देखने पर उनकी आयु बढ़ने की बात एक लोक मान्यता है, इसे शास्त्रों में प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

करवा चौथ का क्या महत्व है?

करवा चौथ को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत रखती हैं. धार्मिक परंपरा में इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. कई स्थानों पर भगवान कार्तिकेय की भी पूजा की जाती है.

करवा चौथ से जुड़ी करवा की पौराणिक कथा

करवा चौथ से जुड़ी एक अन्य प्रचलित कथा करवा नाम की पतिव्रता स्त्री की है. मान्यता के अनुसार, करवा अपने पति के साथ नदी के पास रहती थीं. एक दिन जब उनके पति नदी में स्नान कर रहे थे, तभी एक मगरमच्छ ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें पानी में खींचने लगा.अपने पति को संकट में देखकर करवा ने उनकी रक्षा के लिए मृत्यु के देवता यमराज से प्रार्थना की. उनकी भक्ति और पति के प्रति समर्पण से प्रसन्न होकर यमराज ने उनके पति को जीवनदान दिया. लोक मान्यता के अनुसार, इस कथा से करवा चौथ के व्रत में पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन की रक्षा का भाव जुड़ा हुआ है.

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