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चक्रवात ‘अर्नब’ का नाम किसने रखा, कैसे तय होते हैं तूफानों के नाम और कब आती है किस देश की बारी? FAQs

चक्रवात अर्नब का नाम किस देश ने रखा और समुद्री तूफानों के नाम कैसे तय होते हैं? जानें 13 देशों की लिस्ट, नामकरण की प्रक्रिया और किस देश की कब आती है बारी.

चक्रवात ‘अर्नब’ का नाम किसने रखा, कैसे तय होते हैं तूफानों के नाम और कब आती है किस देश की बारी? FAQs
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बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ बुधवार सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की प्रक्रिया में बना रहा. इसके कारण तेज हवाएं चल रही हैं, भारी बारिश हो रही है और समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने तटीय जिलों में जनजीवन प्रभावित होने की चेतावनी दी है. खास तौर पर काकीनाडा, यानम और गोदावरी डेल्टा के आसपास के इलाकों में अधिक सतर्क रहने को कहा गया है. IMD के ताजा आकलन के मुताबिक, तूफान की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा बनी हुई थी. इस दौरान हवा के झोंकों की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच रही थी. आखिर इस तूफान का नाम अर्नब किसने रखा, इसका मतलब क्या है और समुद्री तूफानों के नाम तय करने की जिम्मेदारी किसकी होती है?

चक्रवातों के नाम पहले से तैयार सूची के आधार पर तय किए जाते हैं. आधिकारिक सूची में ‘अर्नब’ नाम बांग्लादेश ने सुझाया है. उत्तर हिंद महासागर में बनने वाले चक्रवातों के नामकरण के लिए 13 देशों ने मिलकर यह सूची तैयार की है.

अर्नब शब्द का मतलब आम तौर पर बंगाली भाषा में समुद्र या महासागर से जोड़ा जाता है. भारत मौसम विज्ञान विभाग की सूची में इस नाम का उच्चारण ‘ओरनब’ दिया गया है. हालांकि, आधिकारिक सूची में इसके अर्थ की अलग से व्याख्या नहीं की गई है.

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठने वाले चक्रवातों के नाम मनमाने ढंग से नहीं रखे जाते. इनके नाम तय करने की जिम्मेदारी WMO और संयुक्त राष्ट्र के ESCAP के संयुक्त पैनल की होती है.

चक्रवातों के नाम रखने का मुख्य उद्देश्य उन्हें आसानी से पहचानना और उनके बारे में जानकारी देना है. नाम होने से मौसम विभाग, मीडिया, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और आम लोगों के बीच संवाद आसान होता है. इससे चेतावनी जारी करने और लोगों तक जरूरी सूचना पहुंचाने में भी मदद मिलती है.

उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवातों के नामकरण की व्यवस्था में 13 देश शामिल हैं. इनमें भारत, बांग्लादेश, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन शामिल हैं.

उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवातों के नामकरण की शुरुआत सितंबर 2004 में हुई थी. शुरुआत में आठ देश इस व्यवस्था का हिस्सा थे. बाद में इसमें विस्तार किया गया और अप्रैल 2020 में 13 देशों की भागीदारी वाली संशोधित सूची अपनाई गई.

अप्रैल 2020 में अपनाई गई सूची में कुल 169 नाम शामिल किए गए. प्रत्येक भाग लेने वाले देश ने 13 नाम सुझाए थे. इन नामों का इस्तेमाल तय क्रम से किया जाता है, ताकि हर नए चक्रवात के लिए अलग से नाम चुनने की जरूरत न पड़े.

नहीं, हर कम दबाव वाले क्षेत्र को चक्रवात का नाम नहीं दिया जाता. मौसम प्रणाली को निर्धारित मानदंडों के अनुसार जरूरी तीव्रता हासिल करनी होती है. इसके बाद ही संबंधित मौसम विज्ञान केंद्र उसे निर्धारित सूची से नाम देता है.

नहीं, नाम सुझाने वाले देश और चक्रवात से प्रभावित होने वाले देश के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है. उदाहरण के लिए, अर्नब नाम बांग्लादेश ने सुझाया है, लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि तूफान बांग्लादेश में ही आएगा. चक्रवात की दिशा और संभावित असर मौसम संबंधी परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं.

नाम फाइलन करने के लिए देशों को Alphabetical Order में रखा जाता है. Bangladesh, India, Iran, Maldives, Myanmar, Oman, Pakistan, Qatar, Saudi Arabia, Sri Lanka, Thailand, UAE, Yemen

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