क्या वापस भारत विरोधी ट्रैक पर चल रहे हैं मुइज्जू, पाकिस्तान पहुंचे तो अपने घर में ही घिर गए, मालदीव को मुश्किल में डालने का लगा आरोप
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के पाकिस्तान दौरे के दौरान 20 समझौता ज्ञापनों पर सहमति बनी, जिनमें रक्षा और समुद्री सुरक्षा भी शामिल हैं. पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद समेत विपक्षी नेताओं ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान से बढ़ता सुरक्षा सहयोग भारत के साथ संबंधों पर असर डाल सकता है
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा ने भारत के साथ रिश्तों को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है. पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद समेत विपक्षी नेताओं ने चेतावनी दी है कि इस्लामाबाद के साथ बढ़ता सहयोग भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा सकता है. विवाद की वजह सिर्फ कूटनीतिक मुलाकातें नहीं, बल्कि रक्षा, समुद्री सुरक्षा और सैन्य प्रशिक्षण से जुड़े समझौते भी हैं.
20 से 22 अक्टूबर तक हुई मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 20 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर साइन किया. भारत ने कहा है कि वह इन समझौतों पर करीब से नजर रख रहा है. ऐसे में सवाल है कि क्या मुइज्जू की पाकिस्तान से नजदीकी भारत-मालदीव संबंधों में फिर तनाव पैदा कर सकती है? और क्या मालदीव के लिए भारत और पाकिस्तान के साथ रिश्तों में संतुलन बनाए रखना आसान होगा?
मुइज्जू के पाकिस्तान दौरे पर क्यों मचा है बवाल? 10 Points
1. मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा पर विवाद क्यों?
- मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू 20 से 22 अक्टूबर तक पाकिस्तान के दौरे पर थे. 11 साल में किसी मालदीवी राष्ट्रपति की यह पहली पाकिस्तान यात्रा थी. यह दौरा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ के मौके पर हुआ.
- यात्रा के दौरान मुइज्जू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से मुलाकात की. उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल असीम मुनीर से भी बातचीत की.
- दोनों देशों ने स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार, कृषि, साइबर सुरक्षा, रक्षा और समुद्री सुरक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 20 MoUs किए.
- विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि इन समझौतों में आर्थिक और सामाजिक सहयोग के साथ सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं. भारत के लिए मालदीव की भौगोलिक स्थिति अहम है. यह द्वीपीय देश हिंद महासागर के उन समुद्री रास्तों के करीब है, जो भारत के व्यापार और रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण हैं.
2. मोहम्मद नशीद ने भारत को लेकर क्या चेतावनी दी?
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति और विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) के अध्यक्ष मोहम्मद नशीद ने 25 अक्टूबर को अड्डू सिटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुइज्जू की यात्रा पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ने भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के जोखिमों पर पर्याप्त विचार किए बिना यह कदम उठाया. नशीद की चेतावनी का सबसे अहम हिस्सा भारत की सुरक्षा से जुड़ा था. उन्होंने कहा कि अगर भारत को लगता है कि उसकी सुरक्षा से समझौता हो रहा है, तो मालदीव को इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं. छोटे देश को क्षेत्रीय शक्तियों के बीच तनाव में अपनी रणनीतिक स्थिति का ध्यान रखना चाहिए.
3. पाकिस्तान के साथ 20 समझौते, सबसे ज्यादा चर्चा रक्षा सहयोग की
मुइज्जू की यात्रा में हुए 20 समझौता ज्ञापनों का दायरा काफी व्यापक था. इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और व्यापार जैसे क्षेत्र शामिल थे. दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को लगभग 1.3 करोड़ डॉलर से बढ़ाकर दो साल में 20 करोड़ डॉलर तक पहुंचाने की दिशा में काम करने पर भी सहमति जताई... लेकिन चर्चा का केंद्र रक्षा और समुद्री सुरक्षा से जुड़े समझौते बने. मुइज्जू की पाकिस्तान के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के साथ-साथ सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात ने इन चिंताओं को और बढ़ाया.
भारत के लिए यहां अहम सवाल समझौतों की संख्या से ज्यादा उनका वास्तविक दायरा है. रक्षा सहयोग में किस तरह की गतिविधियां होंगी, सैन्य प्रशिक्षण किस स्तर पर होगा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देश क्या कदम उठाएंगे... इन सवालों के जवाब से ही उनके रणनीतिक प्रभाव का आकलन किया जा सकता है.
4. भारत ने मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा पर क्या कहा?
- भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 24 अक्टूबर को कहा कि भारत दोनों देशों के बीच हुए समझौतों पर करीब से नजर रख रहा है और जरूरत पड़ने पर आवश्यक कदम उठाएगा.
- भारत की प्रतिक्रिया सतर्क थी. उसने न तो इन समझौतों को लेकर तत्काल किसी टकराव का संकेत दिया और न ही उन्हें नजरअंदाज किया. बयान से साफ है कि भारत इस घटनाक्रम के संभावित प्रभावों का आकलन करना चाहता है।
- मालदीव भारत के नजदीक स्थित है. दोनों देशों के बीच सुरक्षा, समुद्री निगरानी, आपदा राहत और चिकित्सा सहायता जैसे क्षेत्रों में सहयोग रहा है. ऐसे में मालदीव की किसी तीसरे देश के साथ रक्षा साझेदारी भारत के लिए भी रणनीतिक महत्व रख सकती है.
5. पूर्व रक्षा मंत्री मारिया अहमद दीदी को किस बात की चिंता है?
मालदीव की पूर्व रक्षा मंत्री मारिया अहमद दीदी ने 25 अक्टूबर को प्रकाशित एक लेख में पाकिस्तान के साथ सुरक्षा समझौतों की समीक्षा की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने माना कि पाकिस्तान के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार, कृषि और पर्यटन में सहयोग मालदीव के लिए फायदेमंद हो सकता है. दीदी का कहना था कि मालदीव को दोनों देशों के साथ स्वतंत्र संबंध बनाए रखने का अधिकार है. भारत और पाकिस्तान के साथ संबंध एक-दूसरे के विरोधी होना जरूरी नहीं है.
पूर्व रक्षा मंत्री के मुताबिक, किसी समझौते, सार्वजनिक बयान या कूटनीतिक कदम को दूसरे देश व्यापक रणनीतिक साझेदारी के संकेत के रूप में देख सकते हैं- भले ही ऐसा करना संबंधित सरकार का उद्देश्य न हो. उनकी चिंता यह भी है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने की स्थिति में मालदीव पर अपनी कूटनीतिक स्थिति स्पष्ट करने का दबाव आ सकता है. ऐसे हालात में सुरक्षा साझेदारी, खुफिया सहयोग और देश की सुविधाओं के इस्तेमाल जैसे मुद्दे भी संवेदनशील हो सकते हैं.
6. पाकिस्तान ने कश्मीर और सिंधु जल संधि का मुद्दा क्यों उठाया?
मुइज्जू की यात्रा के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जम्मू-कश्मीर और सिंधु जल संधि (IWT) पर इस्लामाबाद का पक्ष रखा. ये दोनों मुद्दे भारत और पाकिस्तान के संबंधों में लंबे समय से विवाद का कारण रहे हैं. अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था. पाकिस्तान ने इस कदम का विरोध किया है. हालांकि, मुइज्जू ने अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान कश्मीर या सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान के रुख का सार्वजनिक रूप से समर्थन नहीं किया. बता दें कि मालदीव जैसे छोटे देश के लिए भारत-पाकिस्तान विवादों पर किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने का दबाव उसकी विदेश नीति को प्रभावित कर सकता है.
7. मुइज्जू ने SAARC को फिर सक्रिय करने की बात क्यों कही?
पाकिस्तान यात्रा के दौरान मुइज्जू ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) के शिखर सम्मेलन को फिर से आयोजित करने की अपील की. उन्होंने कहा कि मालदीव इस दिशा में सदस्य देशों के साथ काम करने को तैयार है. SAARC का आखिरी शिखर सम्मेलन नवंबर 2014 में काठमांडू में हुआ था. 2016 में पाकिस्तान में प्रस्तावित अगला सम्मेलन उरी आतंकी हमले के बाद रद्द कर दिया गया था. भारत ने लंबे समय से यह रुख रखा है कि आतंकवाद से मुक्त माहौल के बिना क्षेत्रीय सहयोग आगे नहीं बढ़ सकता.
मुइज्जू की अपील क्षेत्रीय सहयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन SAARC को दोबारा सक्रिय करना आसान नहीं होगा. इसके लिए सदस्य देशों के बीच राजनीतिक सहमति और भारत-पाकिस्तान के तनाव से जुड़े अवरोधों को दूर करना जरूरी होगा. यहां भी मालदीव की चुनौती सामने आती है. वह क्षेत्रीय सहयोग का समर्थन कर सकता है, लेकिन संगठन की बहाली का रास्ता उन विवादों से होकर गुजरता है जिन्हें वह अकेले हल नहीं कर सकता.
8. 'इंडिया आउट' अभियान से भारत के साथ रिश्ते सुधारने तक मुइज्जू का सफर
- मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा को समझने के लिए उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि पर नजर डालना जरूरी है. वह 2023 में 'इंडिया आउट' अभियान के साथ सत्ता में आए थे. इस अभियान में मालदीव में तैनात भारतीय सैन्यकर्मियों की मौजूदगी बड़ा मुद्दा थी.
- मई 2024 में भारतीय सैन्यकर्मियों की जगह नागरिक तकनीकी कर्मियों ने ली, जो भारत की ओर से उपलब्ध कराए गए विमानों के संचालन और रखरखाव से जुड़े काम करते थे. इसके बाद मुइज्जू सरकार ने भारत के साथ संबंध सुधारने की दिशा में भी कदम उठाए.
- जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव की राजकीय यात्रा इसी व्यापक संदर्भ का हिस्सा थी. इससे दोनों देशों के संबंधों को स्थिर करने की कोशिशों का संकेत मिला.
- अब पाकिस्तान के साथ रक्षा और समुद्री सुरक्षा संबंधी समझौतों ने मुइज्जू की विदेश नीति पर फिर सवाल खड़े किए हैं. हालांकि, पाकिस्तान से संपर्क बढ़ाना अपने आप में 'इंडिया आउट' अभियान की वापसी का प्रमाण नहीं है.
9. क्या मुइज्जू फिर भारत विरोधी राजनीति की ओर बढ़ रहे हैं?
मालदीव के पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने आरोप लगाया है कि मुइज्जू 2023 जैसी भारत विरोधी राजनीति फिर शुरू कर सकते हैं. शाहिद 2028 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले विपक्षी MDP के नेतृत्व की दौड़ में भी हैं. शाहिद के मुताबिक, सरकार अपने वादों को पूरा करने में सफल नहीं रही है और ऐसे में भारत को फिर राजनीतिक मुद्दा बनाया जा सकता है. पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने भी पाकिस्तान यात्रा के दौरान मुइज्जू को मानद डॉक्टरेट दिए जाने पर सवाल उठाए. मालदीव सरकार अपनी विदेश नीति को 'मालदीव फर्स्ट' के सिद्धांत से जोड़ती रही है. अब उसके सामने यह चुनौती है कि वह भारत के साथ अपने सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को किस तरह बनाए रखती है.
10. भारत-मालदीव संबंधों के लिए आगे सबसे बड़ा सवाल क्या है?
मालदीव की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर काफी निर्भर है और देश कई जरूरी वस्तुओं के लिए आयात पर भी निर्भर करता है. क्षेत्रीय अस्थिरता, व्यापार और यात्रा संपर्कों में बाधा या पर्यटकों के भरोसे में कमी का असर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. भारत और मालदीव के संबंध केवल राजनीतिक संपर्कों तक सीमित नहीं हैं. भौगोलिक निकटता, समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत और अन्य सहयोग दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं. दूसरी ओर, मालदीव को पाकिस्तान सहित दूसरे देशों के साथ संबंध विकसित करने का अधिकार भी है.
इसलिए सवाल यह नहीं है कि मालदीव पाकिस्तान से संबंध रखे या नहीं. असली सवाल यह है कि क्या वह इन संबंधों को इस तरह आगे बढ़ा सकता है कि भारत के साथ उसका भरोसा और सुरक्षा सहयोग प्रभावित न हो. मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा ने मालदीव की विदेश नीति के सामने संतुलन की चुनौती को फिर उजागर किया है.




