गंभीर ने जैसा चाहा वैसा हुआ, स्टार कल्चर खत्म; विराट-रोहित के बाद सूर्या के लिए भी नहीं रूका भारतीय क्रिकेट
गौतम गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद भारतीय क्रिकेट में स्टार कल्चर को खत्म करने की दिशा में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं. टीम में अब खिलाड़ियों की पहचान नहीं, बल्कि मौजूदा फॉर्म, फिटनेस और प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जा रही है. सूर्यकुमार यादव से कप्तानी छीनना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
Gautam Gambhir’s No-Star Culture Policy: भारतीय क्रिकेट से स्टार कल्चर को पूरी तरह खत्म करने का जो प्लान मुख्य कोच गौतम गंभीर ने बनाया था, वह अब सच साबित हो रहा है. विराट कोहली और रोहित शर्मा के संन्यास के बाद, अब सूर्यकुमार यादव (SKY) से कप्तानी छीनना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि भारतीय क्रिकेट अब किसी एक चेहरे या नाम के भरोसे रुकने वाला नहीं है. नाम नहीं, मौजूदा फॉर्म और फिटनेस मायने रखता है, गंभीर का यह कड़ा नियम सूर्या के लिए भी जारी रहा.
सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारत ने भले ही हाल ही में टी20 एशिया कप 2025 और टी20 वर्ल्ड कप 2026 जीता हो, लेकिन पिछले 2 सालों में बतौर बल्लेबाज उनका प्रदर्शन बेहद साधारण रहा.
सिलेक्टर्स ने कप्तानी का जिम्मा श्रेयस अय्यर को सौंपने का मन बना लिया है. इससे पहले, रोहित और विराट के टी20 संन्यास के समय भी गंभीर ने साफ कर दिया था कि टीम इंडिया में युवाओं को बिना किसी देरी के मौके दिए जाएंगे, चाहे सामने कितना भी बड़ा नाम क्यों न हो.
टीम इंडिया में क्या बदलाव आ रहे हैं?
- परफॉर्मेंस आधारित टीम: अब टीम में जगह सिर्फ और सिर्फ मौजूदा फॉर्म (Current Form) और स्ट्राइक रेट देखकर मिलेगी, अतीत के रिकॉर्ड्स को देखकर नहीं.
- वर्कलोड मैनेजमेंट: सीनियर खिलाड़ियों को आराम देने की नीति खत्म होगी; जो फिट है और खेल रहा है, उसे ही प्राथमिकता मिलेगी.
- भविष्य की तैयारी: आगामी इंग्लैंड और आयरलैंड दौरों के लिए युवा और आक्रामक खिलाड़ियों की एक नई खेद तैयार की जा रही है, जो आधुनिक टी20 क्रिकेट के अंदाज में खेल सके.
मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भारतीय क्रिकेट टीम में वीआईपी संस्कृति और स्टार कल्चर (VIP & Superstar Culture) को खत्म करने पर बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है. उनके बयानों का मूल मंत्र यही है कि टीम में कोई भी खिलाड़ी बड़ा या छोटा नहीं होता. ड्रेसिंग रूम के सभी 15 खिलाड़ियों को एक समान माना जाएगा. आइए, जानते हैं वीआईपी कल्चर पर गौतम गंभीर ने क्या-क्या बयान दिए है...
1. "मेरा काम सुपर टीम बनाना है, सुपरस्टार नहीं"
एक इंटरव्यू में गंभीर ने मीडिया और फैन फॉलोइंग पर निशाना साधते हुए कहा था, "मेरा काम ड्रेसिंग रूम में सुपरस्टार बनाना नहीं बल्कि एक 'सुपर टीम' तैयार करना है. सुपरस्टार मीडिया और फैंस बनाते हैं, लेकिन मेरे लिए टीम में मौजूद सभी 15 खिलाड़ी बिल्कुल एक बराबर हैं. मैं इस बात पर ध्यान नहीं देता कि किसी खिलाड़ी के सोशल मीडिया फॉलोअर्स कितने हैं, उसकी टीआरपी क्या है या ब्रॉडकास्टर्स उसे कितना दिखा रहे हैं. मेरा एकमात्र ध्यान इस बात पर होता है कि वह खिलाड़ी टीम और देश की जीत में क्या योगदान दे रहा है."
2. "प्रदर्शन करो वरना बाहर जाओ, क्रिकेट को भावनाओं से मत जोड़ो"
टीम में बड़े नामों के विशेषाधिकार (VIP Treatment) को खत्म करने पर गंभीर ने सख्त लहजे में कहा था, "मैं स्टार कल्चर के पूरी तरह खिलाफ हूं. जो खिलाड़ी मैदान पर परफॉर्म करेगा वह टीम में रहेगा, जो परफॉर्म नहीं करेगा उसे बाहर का रास्ता देखना होगा. मैं यहां भविष्य को ध्यान में रखकर टीम बनाने आया हूँ. क्रिकेट को भावनाओं से जोड़ना बंद कीजिए, क्योंकि केवल भारत की जीत ही एकमात्र अंतिम लक्ष्य होना चाहिए."
3. विदेशी दौरों पर परिवारों के साथ जाने पर कड़े नियम
गंभीर ने केवल बातों में ही नहीं, बल्कि एक्शन लेकर भी वीआईपी संस्कृति पर चोट की. उन्होंने विदेशी दौरों पर खिलाड़ियों के साथ उनके परिवारों के लगातार रहने को 'हॉलीडे' की तरह न लेने की हिदायत दी. उन्होंने कहा, "परिवार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन खिलाड़ियों को यह समझना होगा कि वे यहां एक खास उद्देश्य से आए हैं. यह कोई छुट्टियां मनाने (Holiday) की जगह नहीं है. देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका बहुत कम लोगों को मिलता है, इसलिए पूरा ध्यान देश को गौरवान्वित करने पर होना चाहिए." इस नियम के तहत उन्होंने 45 दिन से कम के विदेशी दौरों पर परिवार को साथ रखने की सीमा अधिकतम 7 दिनों की तय कर दी.
4. डोमेस्टिक (घरेलू) क्रिकेट खेलना अनिवार्य
गंभीर ने भारतीय टीम में यह 'वीआईपी कल्चर' भी खत्म किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होने के बाद स्टार खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट खेलने से बचते थे. उनके कोच बनने के बाद यह नियम अनिवार्य कर दिया गया कि कोई भी खिलाड़ी कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि वह राष्ट्रीय टीम में जगह बनाना चाहता है या चोट के बाद वापसी कर रहा है, तो उसे अपनी राज्य की टीम (रणजी/सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी) के लिए खेलना ही होगा.




